Posts

Showing posts from February, 2021

बिखरे हैं अपने ख़्वाब न जाने कहाँ-कहाँ..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 बिखरे हैं अपने ख़्वाब न जाने कहाँ-कहाँ हम तुमको ले चलें ये दिखाने कहाँ-कहाँ सोचा कि अपने दिल में छुपालूँ मैं ग़म मगर पहुंचे हैं मेरे ग़म के फ़साने कहाँ-कहाँ !! मुश्किल से आए हाथ जो क़ुर्बानियों के बाद हमने लुटा दिए वो ख़ज़ाने कहाँ-कहाँ !! ऐ चैन की हसीना, तू रहती है किस जगह भटके तिरी तलब में दिवाने कहाँ-कहाँ !! मेरी ग़ज़ल के आगे जो ख़ामोश थे पड़े गूँजा करेंगे अब वो तराने कहाँ-कहाँ !! मंज़िल की जुस्तजू में वो बचपन के यार सब लेते गए यहाँ से  ठिकाने कहाँ-कहाँ !! सबसे ही खुलके मिलना है उसकी अदा 'जहद' उसके दिवाने होंगे न जाने कहाँ-कहाँ !!       ~जावेद जहद

न अच्छी कोई उदासी, न कोई डर अच्छा..

        ताज़ा ग़ज़ल 💐 न अच्छी कोई उदासी, न कोई डर अच्छा हो अज़्म दिल में तो होता है हर सफ़र अच्छा वो जिसकी राह में चलती हो सिर्फ़ मक्कारी सफ़र ही अच्छा है उसका न हमसफ़र अच्छा वहाँ है दहशत-ओ-नफ़रत, यहाँ मोहब्बत है कि तेरे शह्र से है मेरा ये नगर अच्छा !! कोई तो अच्छा सा एज़ाज़ भी मिले उसको कि वाक़ई में जो रखता है इक हुनर अच्छा सुधार थोड़ा कहीं पे ये करके क्या होगा करो कुछ और भी तो रोग तुम दिगर अच्छा दुआ, दवाओं से, हिकमत से एक काम बना समझ में आए न किसका हुआ असर अच्छा न अच्छा हुस्न, न इख़लाक़ और न ख़सलत थी अजब वो शख़्स था, जो बन गया मगर अच्छा वो आँख खुलते ही झटके से जैसे टूट गया जो ख़्वाब देखा था कल मैंने रात भर अच्छा तुम्हारे साथ भी अच्छा करेगी ये दुनिया करोगे दुनिया का तुम जो 'जहद' अगर अच्छा       #जावेद_जहद

जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..

Image
       1..ग़ज़ल 💐 ग़ज़ल की दुनिया में भी अब बहार है कि नहीं सभी को कल की तरह इससे प्यार है कि नहीं मैं शायरी तो बहुत उम्दा करता हूँ लेकिन मिरा भी शायरों में कुछ शुमार है कि नहीं कि मैं भी कर सकूँ जिससे कि मार दुनिया में मिरी भी शायरी में ऐसी धार है कि नहीं !! करम किया जो मुझे तूने दिल दिया लेकिन मिरी भी तुम पे सनम जाँ निसार है कि नहीं वो बेपनाह मोहब्बत में डूबे रहने का नशा तो टूट चुका, अब ख़ुमार है कि नहीं क़रार दिल को मिलेगा ज़रूर ऐ यारो हाँ पहले देख तो लो बेक़रार है कि नहीं जो सारी दुनिया को करदे दुखों से दूर 'जहद' किसी को इतना बड़ा इख़्तियार है कि नहीं ! *********************************      2..ग़ज़ल 💐 दिल-ए-बेदार कोई अहले-नज़र है कि नहीं किस से पूछें कि कोई ऐसा बशर है कि नहीं छल-कपट, राहज़नी, ज़ुल्म-ओ-सितम, ख़ूँरेज़ी ये भी दो-रंगीं सियासत का समर है कि नहीं जिस तरफ़ देखिए बाज़ार-ए-हवस है यारो और ईसार-ओ-वफ़ा हममें सिफ़र है कि नहीं अम्न-ओ-इंसाफ़ की लुटती हुई दुनिया से उदास आज इस देश का इक एक बशर है कि नहीं !! अपना चेहरा भी बदल जाए तो हैरत कैसी आज बदली हुई दुनिया की नज़र...

मिरा हँसना, मिरा चलना, मिरा अंदाज़ तो देखो..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 मिरा हँसना, मिरा चलना, मिरा अंदाज़ तो देखो मिरी शोख़ी, मिरा नख़रा, मिरा ये नाज़ तो देखो अलग कथनी, अलग करनी, अलग अफ़्आल और आमाल मिरे अंदर, मिरे बाहर अजब है राज़ तो देखो !! अभी सीखा है उड़ना और छूता हूँ बुलंदी को कहाँ अश्आर मेरे और कहाँ परवाज़ तो देखो इधर अपने कबूतर की क़लाबाज़ी में तुम गुम हो चला आता है वो कैसे उधर से बाज़ तो देखो !! मिरे दुश्मन भी मुझको तो नज़र आते बड़े प्यारे कि मेरे देखने का ये मिरा अंदाज़ तो देखो !! मधुरता अब है गीतों में न सरगम में कोई जादू गरजते साज़ पे बस चीख़ती आवाज़ तो देखो किसी की भी नहीं सुनते, ये करते रहते मनमानी हुकूमत के अनोखे ये नए रंगबाज़ तो देखो !! वो लेके प्यार क्या आए 'जहद' मेरी पनाहों में मुझे भी आगया लो ख़ुद पे करना नाज़ तो देखो        #जावेद_जहद

किसी को खेत, किसी को मकां ज़ियादा है..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 किसी को खेत, किसी को मकां ज़ियादा है किसी के वास्ते बस आसमां ज़ियादा है !! कोई शरीफ़, कोई नेक है, कोई सीधा किसी को आन, किसी को गुमां ज़ियादा है कोई भी बात छुपाने से छुप नहीं सकती ज़माना पहले से अब राज़दां ज़ियादा है ज़रूर उसको भी लूटा है उसके अपनों ने कि उसके लब पे तो आह-ओ-फ़ुग़ां ज़ियादा है मिरे लिए तो सिवा साक़ी के वो कुछ भी नहीं मगर वो मुझपे तो कुछ मेहरबां ज़ियादा है !! जिधर को मिलती हैं बेचैनियां बहुत ज़्यादा ज़माना आज उधर ही रवां ज़ियादा है !! घना ये शह्र है, चारों तरफ़ यहाँ तो 'जहद' हवा में ज़ह्र भरा सा धुआं ज़ियादा है !!       ~जावेद जहद

नशा था,जल्वा-ए-दिलदार था, कल शब जहाँ मैं था..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 नशा था, जल्वा-ए-दिलदार था, कल शब जहाँ मैं था मिरी बाँहों में मेरा यार था, कल शब जहाँ मैं था !! दहकते थे ज़मीन-ओ-आसमां, वो आतिशी शब थी अजब वो शह्र शोलाबार था, कल शब जहाँ मैं था ! कली, ख़ुश्बू, हिना, फल, फूल उसके पास थे सबकुछ वो जैसे इक हसीं गुलज़ार था, कल शब जहाँ मैं था !! था आँखों से अयां कुछ भी, न होंठों से बयां कुछ भी कोई इंकार न इक़रार था, कल शब जहाँ मैं था !! जिगर घायल, नज़र पागल, ये मेरा दिल भी बेकल था अजब वो दो निगह का वार था, कल शब जहाँ मैं था जिसे मैंने कभी सपने में भी देखा नहीं यारो वहाँ वो हुस्न का बाज़ार था, कल शब जहाँ मैं था झपटता था वहाँ हर मर्द ज़न पे कुछ 'जहद' ऐसे क़यामत होने का आसार था, कल शब जहाँ मैं था          ~जावेद जहद

जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..

Image
     1..ग़ज़ल 💐 मोहब्बत तो होती है इक रात की शुरू फिर घड़ी इख़्तिलाफ़ात की वो पाकीज़गी अब कहाँ इश्क़ में ये शै बन गई है ख़ुराफ़ात की !! थी पहले तो शाम-ओ-सहर ही की फ़िक्र मगर अब तो उलझन है दिन-रात की !! अजब सरफिरा आदमी वो भी है लड़ाई वो करता है बे-बात की !! हैं उनके बिना क्या बहारों के दिन लगे रुत भी फीकी सी बरसात की वो जब सामने थे तो था जोश भी उठे लह्र अब कैसे जज़्बात की ? कही ख़ूब हमने ये ग़ज़लें तो क्या करिश्मे किए या करामात की !! ग़ज़ल में बहुत ही है जादू भरा करो बात इसके तिलिस्मात की ग़ज़ल से है मुझको तो उल्फ़त 'जहद' करो बात मुझसे ग़ज़लयात की !! ****************************       2..ग़ज़ल 💐 गुलाब अच्छे भी लगते हैं गुलसितां से कहाँ यहाँ खिले हैं तो जाएंगे हम  यहां से कहाँ यहाँ भी दर्द-मुसीबत, वहाँ भी स्वर्ग-नरक फ़रार मिलता है ये दे भी देने जां से कहाँ ये अस्र-ए-नव का चलन, तौबा माफ़ हो बाबा बिछड़ के आ गए हम तेरे कारवां से कहाँ !! ज़मीन, चाँद, फ़लक का सफ़र भी कर डाला अब और आगे भी हम जाएं आसमां से कहाँ हर एक मुल्क दिखाता है ताक़तें अपनी किसी को ग़र्ज़ भी है अम्न और अमां से कहाँ तमाम...

मिरी जाँ, शाम-ओ-सहर आज़माइए न मुझे..

    ताज़ा ग़ज़ल 💐 मिरी जाँ, शाम-ओ-सहर आज़माइए न मुझे दिवाना और भी अपना  बनाइए न मुझे !! मैं इक हसीं के अभी तो बड़े ही प्यारे से अधूरे ख़्वाब में गुम हूँ  जगाइए न मुझे !! हसीन शै की परस्तिश है मेरी कमज़ोरी हसीन चेहरा ये अपना  दिखाइए न मुझे ये मेरे दम से ही रौशन हैं आपकी रातें चराग़-ए-सुब्ह समझ कर बुझाइए न मुझे नई हो बात कोई और नया ख़्याल कोई वही पुरानी ग़ज़ल फिर  सुनाइए न मुझे  हसीन चाँद सितारों से मुझको क्या लेना मुझे तो आपसे मतलब भगाइए न मुझे ! ये दिलनशीं, ये फ़रेबी, ये क़ातलाना 'जेहद' अदाएं नित नई अपनी दिखाइए न मुझे !!       ~जावेद जेहद

हज़ारों ग़म में घिरी है लेकिन मना ही लेती ये हर ख़ुशी है..

         ताज़ा ग़ज़ल 💐 हज़ारों ग़म में घिरी है लेकिन मना ही लेती ये हर ख़ुशी है ये कैसी मस्तानी ज़िंदगी है, ये कैसी मतवाली ज़िंदगी है कोई ख़ुशी के नशे में जीता, कोई ग़मों का है जाम पीता हर इक बशर की ही अपनी-अपनी, अलग तरह की ये मयकशी है ये इक जहाँ में जहाँ है कितना, हर इक जहाँ में मज़ा है कितना कोई किसी में, कोई किसी में, है डूबा ये भी तो बंदगी है वो शान-ओ-शौकत, वफ़ा-मोहब्बत, वो आबरू और दया-मरव्वत पुरानी बातों को छोड़ो यारो, ये दुनिया आगे निकल चुकी है तलाब कोड़ो लगाओ पौधे, सजाओ गुलशन बचाओ जीवन इसे बनाओ हरा-भरा फिर, ये दुनिया काफ़ी उजड़ चुकी है ज़रा सा छूलूँ जो मैं तुम्हें तो उछलने लगती हो तुम बहुत ही तुम्हारे जानम ये तन-बदन में, न जाने कितनी ही गुदगुदी है बड़ी रवानी भरी है इसमें, धुनें भी प्यारी छिपी हैं इसमें ये जिस बहर में ग़ज़ल है यारो, क़सम से ये तो हसीं बड़ी है यक़ीं करो ये बहुत ही उम्दा, बहुत ही आला सी होगी इक दिन अभी तो अपनी ये कुछ नहीं है, अभी ये सीधी सी शायरी है 'जेहद' तुम्हारा बहुत बड़ा ये, समझ लो दुख दूर हो गया है कि अब तुम्हारी तो शायरी में, कहीं से भी न कोई कमी है   ...

मैं जिस ज़माने में ख़्वाब में था..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐 मैं जिस ज़माने में ख़्वाब में था बड़े ही तब पेच-ओ-ताब में था समझ में आई ये ज़िंदगी जब अवारा दिल ये अदाब में था थी महफ़िलों में सियाही सारी उजाला सारा किताब में था बड़ा ही दिलकश था हुस्न उसका कि चाँद जब तक हिजाब में था  वो उनकी चाहत की मस्तियाँ थीं कहाँ मैं डूबा शराब में था  था मेरी तोपों की टोह में वो मैं उसके बम के हिसाब में था वही तमाशा, लड़ाई, झगड़ा वही समाँ इंतेख़ाब में था ये उलझनों से भरा ज़माना ये इतना कल न अज़ाब में था भटक रहा है ज़माना जिसमें ये रस्ता तो इंतेख़ाब में था बिकार बैठा था जब 'जेहद' मैं कभी न यूँ इज़्तिराब में था     ~जावेद जेहद

दिल कितना था वो प्यार भरा याद करेंगे..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 दिल कितना था वो प्यार भरा याद करेंगे दिल तोड़ के वो ये भी सदा याद करेंगे !! पहले ख़ुदा के बंदों पे ढाएंगे सितम वो जब ख़ुद पे पड़ेगी तो ख़ुदा याद करेंगे गर हमको हुआ इसका कभी शौक़ तो हम तो महबूब की आँखों का नशा याद करेंगे !! ये अपने सभी पाप धुलेंगे तभी जब हम रो-रो के बहुत अपनी ख़ता याद करेंगे ! जिनके दिलों में दर्द का होता नहीं एहसास वो दूसरों के दर्द को क्या याद करेंगे !! इतनी है मोहब्बत हमें उनसे भी कि हमको हम मर गए तो तारे-घटा याद करेंगे !! ये शायरी है, दर्स है, या है कोई रोना जो भी है 'जेहद' लोग सदा याद करेंगे      ~जावेद जेहद    #Jawed_Jehad

बड़ी प्यारी-प्यारी सदा आ रही है..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 बड़ी प्यारी-प्यारी सदा आ रही है ग़ज़ल मेरी शायद पढ़ी जा रही है बहुत दुनिया भर की नज़र पा रही है लो मेरी भी रचना असर ला रही है ! बहारों का मौसम नज़र आ रहा है पयाम-ए-मोहब्बत फ़ज़ा ला रही है पता क्या है नफ़रत के शैदाई तुझको कि दुनिया मोहब्बत की क्या-क्या रही है लगाया है दिल को मैं जबसे ग़ज़ल से ग़ज़ल मेरे दिल को बहुत भा रही है ! कभी मीर-ओ-ग़ालिब से ये जा मिलेगी अभी फ़िक्र उनका पता पा रही है !! कला मेरी कितनी थी छोटी मगर अब वसी से वसी-तर हुई जा रही है !! वो आया है जबसे नज़र में 'जेहद' गुल नज़र मेरी रंगीं हुई जा रही है !!      ~ जावेद जेहद

कहाँ-कहाँ का जी इसमें बयां नहीं मिलता..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 कहाँ-कहाँ का जी इसमें बयां नहीं मिलता किसी भी  दुनिया में ऐसा क़ुरांं नहीं मिलता ! यहाँ जो मिलती है नेमत, वहाँ नहीं मिलती वहाँ जो मिलता है मेवा, यहाँ नहीं मिलता ! जो साथ है उसे ही साथ लेके चलते चलो बिछड़ जो जाता है वो कारवां नहीं मिलता सुकून-ओ-चैन की उम्मीद मत रखो कोई ये शहर-ए-ग़म है, यहाँ तो अमां नहीं मिलता वहाँ भी, जो है जगह मस्तियों की मौजों की हर इक घड़ी तो ख़ुशी का समां नहीं मिलता वो कैसी गुप्त जगह है, जहाँ से बरसों से किसी का कोई भी राज़-ए-निहां नहीं मिलता हवा में ज़ह्र यहाँ है 'जहद' वहाँ पे चलो जहां पे गर्द-ओ-ग़ुबार-ओ-धुआं नहीं मिलता         ~ जावेद जहद

शराफ़त के जो पैकर हो तो आओ..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 शराफ़त के जो पैकर हो तो आओ हया की सर पे चादर हो तो आओ मोहब्बत से भरे रुख़सार छोड़ो मोहब्बत दिल के अंदर हो तो आओ तुम्हारे ख़्वाब में मेरी तरह ही हसीं दुनिया का मंज़र हो तो आओ मुझे भाती नहीं हैं झूटी बातें अगर सच्चे सुख़नवर हो तो आओ सभी से प्यार मैं करता हूँ लेकिन ज़रा इख़लाक़ बेहतर हो तो आओ मिरे दिल में ग़मों का है ज़ख़ीरा अगर ग़म न मयस्सर हो तो आओ मुझे बातें सुनाने मज़हबों की मुकम्मल ईमां परवर हो तो आओ 'जहद' होती ख़ताएं मुझसे भी हैं भरोसा तुमको मुझपर हो तो आओ     ~ जावेद जहद

कहाँ से आगया ये ज़िंदगी में दोराहा..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 कहाँ से आगया ये ज़िंदगी में दोराहा दिखाई देता है अब हर किसी में दोराहा ये दोहरी ज़ात इकहरी बना दे या अल्लाह वगरना होगा तिरी बंदगी में दोराहा !! बस इक ख़्याल का अफ़साना अच्छा होता है मगर ये ख़ूब है जी शायरी में दोराहा !! समझ में आती नहीं है किसी की मक्कारी हर इक की बात में, आंसू, हँसी में दोराहा तमाम क़ौल-ओ-अमल में तज़ाद है उनके है ख़ूब ये भी सियासतगरी में दोराहा !! लगा के दिल जुदा हम हो गए निगाहों से यहाँ भी आगया लो आशिक़ी में दोराहा इकहरी ज़िंदगी का बोझ ही गिराँ है मुझे कभी न आए मिरी ज़िंदगी में दोराहा !! हमारी एकता मशहूर है ज़माने में 'जहद' न आए कभी इस गली मेंं दोराहा         ~ जावेद जहद

कहाँ-कहाँ की फ़िज़ा में न लहलहाई ग़ज़ल..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐 कहाँ-कहाँ की फ़िज़ा में न लहलहाई ग़ज़ल ज़मीन-ओ-आस्मां ख़ुद में समेट लाई ग़ज़ल वो ख़ुशनसीब हैं शायर कि जीते जी जिनकी ज़मीन-ओ-आस्मां, शम्स-ओ-क़मर पे छाई ग़ज़ल न छोड़ा कोई विषय, कोई बात भी इसने तमाम दुनिया को ख़ुद में समो है लाई ग़ज़ल ग़ज़ल कही गई कसरत से ख़ूब दुनिया में है गायकों ने भी ज़्यादा ही तर तो गाई ग़ज़ल मिरी ग़ज़ल को तो वो भी क़सम से सुनते हैं जिन्हें कभी भी न मैंने कहीं सुनाई ग़ज़ल !! दिवाने कितने नज़र इसके आते हैं वो भी है जिनके वास्ते दुनिया में ये पराई ग़ज़ल न जाने कौन सी चमके गी उनमें तारों सी बना-बना के हवा में जो है उड़ाई ग़ज़ल ! इसे निहारो, सराहो, लगा लो दिल से 'जहद' बड़े ही प्यार से है मैंने ये बनाई ग़ज़ल !!       ~ जावेद जहद

कि फूलों से जब-जब सबा खेलती है..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 कि फूलों से जब-जब सबा खेलती है बहारों के दिल की  गली  झूमती है !! फ़ज़ाओं में कोयल जो मुँह खोलती है तो हर दिल में मीठा सा रस घोलती है समंदर की लहरों की अठखेलियों पर तबीयत ये किसकी नहीं डोलती है !! बरसती ये रिमझिम सी बरसात में तो बदन में अजब सी अगन दौड़ती है !! हर इक शै ही जैसे नई सी लगे है सुबह में जो पहली किरन फूटती है जो गिरती है कलियों पे चुपके से शबनम तो उनमें जवानी का रस घोलती है !! बनारस में ढलते ही जलवा सुबह का सहर बनके शाम-ए-अवध जागती है ख़िज़ाँ का भी अपना नज़ारा है यारो हर इक शाख़ अपना बदन खोलती है छुपे हैं जो दुनिया में कितने नज़ारें 'जेहद' उनकी भी इक अलग दिलकशी है     ~ जावेद जेहद

कभी गोली से भुनवाया गया हूँ..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 कभी गोली से भुनवाया गया हूँ कभी बम से भी उड़वाया गया हूँ कभी इज़्ज़त मिली है हद से ज़्यादा कभी नज़रों से गिरवाया गया हूँ !! कभी फेंका गया हूँ क़ब्र से भी कभी ज़िंदा भी दफ़नाया गया हूँ ग़रीबी, भुखमरी, नफ़रत, घुटन का ज़हर दे-दे के मरवाया गया हूँ !! उठा कर ख़ाक से उस आसमां तक मैं फिर मिट्टी में मिलवाया गया हूँ !! बहुत पढ़-लिख के भी सारे जहाँ में मैं जाहिल ही तो कहलाया गया हूँ मुझे हिम्मत सदा दे-दे के यारो मैं शायर भी तो बनवाया गया हूँ बसाया है मुझे जिसने भी दिल में मैं उसमें ही 'जेहद' पाया गया हूँ हमेशा इक नया क़ानून ला के नई उलझन में उलझाया गया हूँ लगा है कुछ सही इलज़ाम और कुछ ग़लत केसों में फँसवाया गया हूँ !! पलट आया वो फिर से तो कहेगा "बड़ी मुश्किल से मनवाया गया हूँ" यहाँ पैदा किया मुझको ख़ुदा ने "मैं ख़ुद आया नहीं लाया गया हूँ" सुनी जाती नहीं आवाज़ जल्दी यूँ ताक़तवर तो कहलाया गया हूँ कभी बदला ख़ुशी से धर्म अपना कभी जबरन बदलवाया गया हूँ बुराई चाँद पर आबाद करने वहाँ भी अब तो भिजवाया गया हूँ अगर मैं 'मीर' होता तो ये कहता मैं सारे जग में ही पाया गया हूँ गई...

हम कभी भी हो न पाए तेरी यादों से बरी..

    ताज़ा ग़ज़ल 💐 हम कभी भी हो न पाए तेरी यादों से बरी मेरे दिलवर कैसी है ज़ालिम ये तेरी दिलवरी ना-उमीदी कुफ़्र है तो अब ये मेरे साथ है तोड़ दी है क्यों कि तूने सारी उम्मीदें मिरी बेवफ़ाई से तो तेरी बस मिरा ये दिल जला तेरा क्या होगा जो करलूँ तुमसे मैं धोखाधड़ी जादू-टोना भी कभी तो उलटे ही आलगता है इसलिए तू छोड़ दे अब अपनी ये जादूगरी !! मेरे ग़म के आगे तो तेरा ये ग़म कुछ भी नहीं एक क़िस्सा ही कहाँ और दास्ताँ ही दुखभरी दौलत-ए-दुनिया से इतना दिल लगाना क्या 'जहद' हम चले जाएंगे और रह जाएगी ये तो धरी !!        ~ जावेद जहद

रुख़ बदलती हुई हवाएं हैं..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐 रुख़ बदलती हुई हवाएं हैं हर तरफ़ अब नई फ़ज़ाएं हैं गर्म से गर्म अफ़सराएं हैं जिस्म पर नाम की क़बाएं हैं रंग देसी है ढंग परदेसी ये यहीं की न फ़ाख़ताएं हैं ? लूट लो प्यार की सभी दौलत इसकी मिलती नहीं सज़ाएं हैं अम्न होता नहीं ज़माने में बड़ी घंघोर ये घटाएं हैं !! मिट रही है जहाँ से अच्छाई इसलिए आरही बलाएं हैं !! सारा संसार खो गया ख़ुद में मिल गई अब सभी दिशाएं हैं फिर यही रंग लाएंगी यारो ये जो बेरंग सी वफ़ाएं हैं ! अक़्ल दे हर किसी को या अल्लाह अब तो बस मेरी ये दुआएं हैं !! कैसे होंगी ये माफ़ सोचो 'जहद' हमने की जो बड़ी ख़ताएं हैं !!     ~ जावेद जहद

मैं ग़ज़ल गाऊँ सनम और ग़ज़ल तुम सुन्ना..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 मैं ग़ज़ल गाऊँ सनम और ग़ज़ल तुम सुनना तारिफ़ें अपनी हसीं ख़ूब मचल तुम सुनना ग़ौर से सुनना सनम प्यार भरी बातों को देख के मेरी तरफ़, रुख़ न बदल तुम सुनना गीत जब गाते हुए गुज़रूँ मैं घर से तेरे तो मिरी जान-ए-ग़ज़ल, छत पे निकल तुम सुनना इस क़दर तुम मिरी बातों में कभी खो जाना मैं अगर बोलूँ महल, उसको कँवल तुम सुनना गर कठिन तुम को लगे रचना किसी शायर की तो मिरे गीत सहज और सरल तुम सुनना !! मैं कोई बात भी बोलूँ तो वज़न होता है इसलिए बात मिरी जान सँभल तुम सुनना मेरी ग़ज़लों में कभी कुछ तो ख़याली होंगी और कभी बात मिरी उसमें असल तुम सुनना क्यों ये नाकाम ग़ज़ल हर घड़ी सुनते हो तुम अब 'जहद' लो ये ग़ज़ल मेरी सफ़ल तुम सुनना       ~ जावेद जहद

100 Ghazals 💐

Image
   दोस्तो, आदाब ! पेशे-ख़िदमत है अपनी ये सौवीं ग़ज़ल.. अभी आपलोगों को यहाँ मेरी काफ़ी रचनाएं देखने को मिलेंगी.. एक पूरा दीवान मिलेगा इंशाअल्लाह !   मेरी पहली रचना (कहानी) उर्दू की मशहूर पत्रिका "बीसवीं सदी" में "गुमनाम जज़्बे" जमशेद अख़्तर नाम से (जून 2000 ई ) में छपी थी..फिर मेरे इसी नाम से "शायर" "सरिता" "पालिका समाचार" "फ़िल्मी दुनिया" "उर्दू चैनल" "सरस सलिल" "गुलाबी किरन" जैसी पत्र-पत्रिकाओं में मेरी ग़ज़लें और कहानियां आती रहीं..    मेरा ये अदबी सफ़र बहुत सुस्त और लापरवाही भरा रहा और रुक रुक के चलता रहा...   ग़ज़ल का फ़न काफ़ी मुश्किल है.. इसे बड़ी बारीकी से चेक करना पड़ता है और इसके बहर-वज़न, काफ़िया-रदीफ़, मानी-मतलब, पाई-बिंदु, एक एक शब्द पर ग़ौर करना पड़ता है.. और फिर उसे अपनी पसंदीदा जगहों पर पहुंचाना, ये भी तेढ़ा काम है.. जो हमें ख़ुद से ही करना पड़ता है...     आज बहुत सारे लोग सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय हैं, और सफ़ल हैं.. सभी की मेहनतों को सलाम.. शुभकामनाएं.. मैं फ़िल्हाल उतना सक्रिय नहीं हूँ.. आगे इंशाअल्लाह ते...

प्यारा सा दिल और प्यारी नज़र दे..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 प्यारा सा दिल और प्यारी नज़र दे प्यार ही प्यार मुझमें तू भर दे !! मेरी वफ़ा का मुझको समर दे अपनी वफ़ा से मुझको तू भर दे मेहनत-कशों को उनका समर दे दामन उनका ख़ुशियों से भर दे ! प्यार में पागल मैं हो जाऊँ प्यार का जादू ऐसा तू कर दे सच्ची वफ़ा का यही है तक़ाज़ा जान उसे दे, दिल जो अगर दे ! आज फ़ज़ा में काफ़ी नशा है कुछ बहकी सी मस्त ख़बर दे बरसों मुझे तड़पाया है तूने अब और न तू दर्द-ए-जिगर दे मुझपे लुटा दो सबकुछ और तुम बोलो 'जेहद' क्या तुमको भर दे        ~ जावेद जेहद

फिर चलो हम सफ़र करें..

    ताज़ा ग़ज़ल 💐 फिर चलो हम सफ़र करें हिज्र को मुख़्तसर करें ! अपनी-अपनी मोहब्बतें हम सभी की नज़र करें शाम-ए-ग़म को मिटाके हम ख़ुशनुमा इक सहर करें !! माल-ओ-ज़र इक अज़ाब है ज़्यादा की न फ़िकर करें !! शोला-शोला सी राह को गुल भरी रहगुज़र करें !! मैल धोकर दिलों की हम साफ़-सुथरी नज़र करें !! शान से ज़िंदगी कटे ख़ौफ़ में न बसर करें ग़म है करना मना 'जेहद' ग़म कभी कुछ मगर करें    ~ जावेद जहद

बड़ी ही मुश्किलों से गुज़रे हैं..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐 बड़ी ही मुश्किलों से गुज़रे हैं वो जो भी मंज़िलों से गुज़रे हैं उन्हीं की मुश्किलें आसाँ हुईं जो पूरे हौसलों से गुज़रे हैं !! वो दिलवर क्या चलेंगे शोलों पर जो हर दम मख़मलों से गुज़रे हैं पड़ा जब ख़ार पे चलना उन्हें वो मुड़ के रास्तों से गुज़रे हैं !! डरेंगे छोटे वो झटकों से क्या बड़े जो ज़लज़लों से गुज़रे हैं हमारे पास है ऐसा हुनर कि हम सबके दिलों से गुज़रे हैं ये नंगे नाच-गाने तो 'जेहद' न पहले महफ़िलों से गुज़रे हैं     ~ जावेद जहद

सँभल-सँभल के बहुत ही कलाम करता हूँ..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 सँभल-सँभल के बहुत ही कलाम करता हूँ मैं हर किसी का बड़ा एहतिराम करता हूँ सुबह मैं उठते ही पहला ये काम करता हूँ कि नेक रूहों को दिल से सलाम करता हूँ समेट लेता हूँ दुनिया के दर्द को दिल में सुकून दिल का मैं दुनिया के नाम करता हूँ उसी घड़ी मिरा एहसास जाग उठता है मैं जब कभी भी ग़लत कोई काम करता हूँ मिरे सुख़नवरो, मुझपे भी ग़ौर फ़रमाना कि तेरी दुनिया में मैं भी क़याम करता हूँ मिरे भी शेरों पे होने लगी हैं तंक़ीदें चलो जी मैं भी अब अपना भी नाम करता हूँ मिरे क़दम तो कभी भी बहक नहीं सकते मैं अपने दिल को जो हर पल लगाम करता हूँ सब अपनी राह चले, महफ़िलें तमाम हुईं चलो 'जेहद' कोई अब मैं भी काम करता हूँ       ~ जावेद जहद