मिरी जाँ, शाम-ओ-सहर आज़माइए न मुझे..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 मिरी जाँ, शाम-ओ-सहर आज़माइए न मुझे दिवाना और भी अपना बनाइए न मुझे !! मैं इक हसीं के अभी तो बड़े ही प्यारे से अधूरे ख़्वाब में गुम हूँ जगाइए न मुझे !! हसीन शै की परस्तिश है मेरी कमज़ोरी हसीन चेहरा ये अपना दिखाइए न मुझे ये मेरे दम से ही रौशन हैं आपकी रातें चराग़-ए-सुब्ह समझ कर बुझाइए न मुझे नई हो बात कोई और नया ख़्याल कोई वही पुरानी ग़ज़ल फिर सुनाइए न मुझे हसीन चाँद सितारों से मुझको क्या लेना मुझे तो आपसे मतलब भगाइए न मुझे ! ये दिलनशीं, ये फ़रेबी, ये क़ातलाना 'जेहद' अदाएं नित नई अपनी दिखाइए न मुझे !! ~जावेद जेहद