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Showing posts with the label #जावेद_जहद.. सासाराम

तुम्हारी क्या वफ़ा है, हम नहीं समझे..

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        ताज़ा ग़ज़ल तुम्हारी क्या वफ़ा है, हम नहीं समझे लहर,आंधी है क्या है, हम नहीं समझे ये सब कैसी अदा है, हम नहीं समझे मिलन में लब सिला है, हम नहीं समझे तुम्हारे भेद तो हैं  सारे ही न्यारे तुम्हारा रूप क्या है, हम नहीं समझे हमारी क्या लगन है, जानते हो तुम तुम्हारी चाह क्या है, हम नहीं समझे तड़पता है तुम्हारा दिल मिलन को जब क़दम फिर क्यों रुका है, हम नहीं समझे तुम्हें हम भूलना तो  चाहते हैं पर तुम्हीँ में दिल लगा है, हम नहीं समझे बहुत नज़दीक से देखा मगर फिर भी मोहब्बत क्या बला है हम नहीं समझे ये कैसा है सियासत का जहाँ यारो कि इसका धर्म क्या है, हम नहीं समझे किसी की लूट कर इज़्ज़त 'जहद' आख़िर किसी को क्या मिला है, हम नहीं समझे !!                   जावेेद जहद सहसरामी

मोहब्बत अब दिलों में इस तरह कम होती जाती है..

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          ताज़ा ग़ज़ल मोहब्बत अब दिलों में इस तरह कम होती जाती है  कि जैसे  धूप में ये ख़ुश्क  शबनम  होती  जाती  है ये कैसी  छिड़ गई है  हर तरफ़ ही  जंग दुनिया में बिछी जाती हैं लाशें, आँख पुर-नम होती जाती है तुम्हारे चाँद, सूरज  और सितारे  बुझते जाते हैं तिरी दुनिया भी क्या ग़म का ही आलम होती जाती है हमारी शक्ल से तुम जितनी नफ़रत करते जाते हो हमें उतनी मोहब्बत तुमसे जानम होती जाती है !! बस इक बचपन का मौसम होता है जी शादमानी का उमर बढ़ती है ज्यों ज्यों दफ़्तर-ए-ग़म होती जाती है  कोई आराम से  करता है शायर  शायरी कैसे यहाँ तो कुछ न कुछ तख़्लीक़ हरदम होती जाती है तरक़्क़ी करती जाती है 'जहद' ये देखिए जितनी ये दुनिया और भी जैसे जहन्नम होती जाती है !!                    #जावेेद_जहद

मत पूछिए ग़ज़ल से क्या-क्या बना लिया..

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            #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 मत पूछिए ग़ज़ल से क्या-क्या बना लिया इस फ़न से हर नज़र को अपना बना लिया मुश्किल सुख़न से होती हैं सबको उलझनें आसान इस लिए ही लहजा बना लिया !! सच बात लब पे आए अब कैसे दोस्तो दिल में तो झूट ने है डेरा बना लिया !! तुम भी तो हो गए हो इक हुक्म के ग़ुलाम हमने भी इक सदा को आक़ा बना लिया ! आपस के मस्अलों में ग़ैरों का दख़्ल क्यों ऐ दोस्त तूने ये क्या धंधा बना लिया ?? कुछ ऐसे शौक़ में अब लोगों ने डूब कर ख़ुद को है इक तरह से तन्हा बना लिया देते ही जा रहे हैं दुनिया को दर्द-ओ-ग़म दुनिया ने कैसा-कैसा नेता बना लिया !! छोड़ा 'जहद' किसी को तो छोड़ ही दिया रिश्ता बना लिया तो रिश्ता बना लिया !!                 जावेेद जहद

हम सेहतयाब न अब कोई दवा से होंगे..

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           #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 हम सेहतयाब न अब कोई दवा से होंगे अपने दुख दूर तो ग़ज़लों की ग़िज़ा से होंगे अब कोई साज़ भी हमको तो नहीं भाएगा हम तो पागल तिरी पायल की सदा से होंगे उनके पहलू की जगह होगी मिरा बाग़ हसीं और गेसू घने मुझपे तो घटा से होंगे !! तू अगर तोड़ गया प्यार भरा दिल तो बता हम ख़फ़ा तुझसे या तेरी वो जफ़ा से होंगे क्या कहें इश्क़ की वो पहली हवा कैसी लगी आप तो मिल ही चुके बाद-ए-सबा से होंगे !! हम तिरे पास तो रह कर भी सनम प्यासे हैं तुझसे हैं दूर जो कितने वो पियासे होंगे !! इस जहाँ से ये 'जहद' भर गया जो दिल मेरा फिर तो रिश्ते मिरे सारे ही ख़ुदा से होंगे !!               जावेेद जहद

इक हसीं से प्यार का तुम ख़ुशनुमा एहसास हो..

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         ताज़ा ग़ज़ल इक हसीं से प्यार का तुम ख़ुशनुमा एहसास हो दूर होकर भी सनम तुम  कितने  मेरे  पास  हो कैसे फिर रस्ता न देखूँ  मैं तुम्हारा हर घड़ी आज तक टूटी नहीं जो तुम मिरी वो आस हो आज भी तन्हाई में तुम ख़्यालों,ख़्वाबों में कभी प्यार का नग़्मा लिए आ जाया  करते पास हो !! आज तक दुनिया में मैं तो ज़िंदा हूँ बस इस लिए मुझमें चलती रहती है जो, तुम ही तो वो सांस हो देख कर तुमको सनम हो जाती है तबियत हरी मेरी प्यासी ज़िंदगी की इक तुम्हीं तो प्यास हो ! कैसे मैं ये मान लूँ तुम हो सनम मुझसे अलग मैं जो हूँ इक गुल अगर तो तुम मिरी बू-बास हो क्या है मेरा हाल तेरे बिन सनम मैं क्या कहूँ ख़ुद ही तुम ये जान लो, ख़ुद ही तो तुम हस्सास हो काम कोई क्या करेगा वो बड़ा जग में 'जहद' कुछ न कर पाएगा, जिसको ख़ुद पे न विश्वास हो              जावेेद जहद