न आए तंग क्यों कोई जी ऐसी ज़िंदगानी से..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 न आए तंग क्यों कोई जी ऐसी ज़िंदगानी से कि फैली हर तरफ़ बेचैनी है बढ़ती गिरानी से कभी शायद ही आई हो ये इतनी तेज़ बाज़ारी हुई जाती है ख़ाली जेब पैसों की रवानी से !! सियासत ख़ाक में सारे ज़माने को मिला बैठी अजब क्या बैर करलें लोग ऐसी हुक्मरानी से हुजूम-ए-शह्र ने ख़ुद को दिवाना कर लिया ऐसा नहीं है ख़ौफ़ कुछ उनको बला-ए-नागहानी से ! ख़ुदाया मैं भी क्या उलफ़त करूँ ये आज के जैसी न आएं हाथ वो मेरे अगर चे शादमानी से !! कभी जी चाहता है सौंप दूँ उनको 'जेहद' सबकुछ कभी डरता हूँ जाने क्यों मैं ऐसी मेहरबानी से !! #जावेेद_जेेेहद करन सराए, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया