हम कभी भी हो न पाए तेरी यादों से बरी..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 हम कभी भी हो न पाए तेरी यादों से बरी मेरे दिलवर कैसी है ज़ालिम ये तेरी दिलवरी ना-उमीदी कुफ़्र है तो अब ये मेरे साथ है तोड़ दी है क्यों कि तूने सारी उम्मीदें मिरी बेवफ़ाई से तो तेरी बस मिरा ये दिल जला तेरा क्या होगा जो करलूँ तुमसे मैं धोखाधड़ी जादू-टोना भी कभी तो उलटे ही आलगता है इसलिए तू छोड़ दे अब अपनी ये जादूगरी !! मेरे ग़म के आगे तो तेरा ये ग़म कुछ भी नहीं एक क़िस्सा ही कहाँ और दास्ताँ ही दुखभरी दौलत-ए-दुनिया से इतना दिल लगाना क्या 'जहद' हम चले जाएंगे और रह जाएगी ये तो धरी !! ~ जावेद जहद