नफ़रत से है क्या मिले, मिले प्यार से प्यार..
ताज़ा ग़ज़ल नफ़रत से है क्या मिले, मिले प्यार से प्यार आओ लग जाओ गले, मिले प्यार से प्यार नफ़रत से नफ़रत बढ़े, लगे आग हर ओर उलफ़त से हर दिल खिले, मिले प्यार से प्यार झगड़े से झगड़ा बढ़े, अमन-चैन खो जाए झगड़े से फिर क्या मिले, मिले प्यार से प्यार हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, हर जाति के लोग छोड़ो सब शिकवे, गिले, मिले प्यार से प्यार !! हमदर्दी, ख़िदमत के हों, या चाहत के जीवन में रुक न पाएं सिलसिले, मिले प्यार से प्यार !! मंदिर-मस्जिद के लिए तो लड़ना है बेकार ओ पागल, ओ बावले, मिले प्यार से प्यार जितने भी हैं ज़ुल्म के, जहाँ में 'जहद' आज ढह दो सारे ही क़िले, मिले प्यार से प्यार !! ~ जावेद जहद