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मेहर-ओ-वफ़ा की बात कहाँ अब..

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   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 मेहरो-वफ़ा की बात कहाँ अब प्यार की वो बरसात कहाँ अब दिन में है जब डर का डेरा चैन भरी फिर रात कहाँ अब प्यार की बैठे बात करें हम हैं ऐसे हालात कहाँ अब दिन तो कट गया उनसे मिलके गुज़रे गी ये रात कहाँ अब तुमसे मिलूँ मैं खुलके जानम इतनी मिरी औक़ात कहाँ अब दुनिया में शायर हैं अब भी अच्छे उनमें मगर वो बात कहाँ अब जिनका दिवाला निकल चुका है वो देंगे ख़ैरात कहाँ अब सब जिसकी इज़्ज़त करते हों ऐसी कोई भी ज़ात कहाँ अब बातें बहुत होती हैं लेकिन असली मुद्दे की बात कहाँ अब बस ज़ह्र उगलते रहते हैं उनमें भले कलमात कहाँ अब आज के ग़म में दिल है उलझा यादों की बारात कहाँ अब सब जिस पे भरोसा करते रहे वो भी सबके साथ कहाँ अब सच पूछो तो दुनिया में 'जहद' बस है मौत, हयात कहाँ अब           #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

तू बेवफ़ा न हो जाए..

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  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 तू बेवफ़ा न हो जाए मुझसे जुदा न हो जाए चाहत सनम ये अपनी भी बे-रास्ता न हो जाए !! ये चाँदनी जो फैली है काली घटा न हो जाए इतना पिला न आँखों से मुझको नशा न हो जाए शहरे-वफ़ा को बचाओ तुम शहरे-जफ़ा न हो जाए !! इसमें न घोलिए ज़हर क़ातिल फ़ज़ा न हो जाए आजा कि तेरे आने में जीवन फ़ना न हो जाए इतना तुझे जो पूजूँगा तू भी ख़ुदा न हो जाए शोहरत मिली है जिसको भी सनकी हवा न हो जाए !! मुझको 'जेहद' सताओ ना चाहत हवा न हो जाए !!           #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

प्यास धरती बुझाती रही रात भर..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 प्यास धरती बुझाती रही रात भर बारिशों में नहाती  रही  रात  भर एक मुद्दत से था उसको तो इंतेज़ार वो मोहब्बत लुटाती रही रात भर !! रक़्स होता रहा, जाम चलते रहे जान महफ़िल सजाती रही रात भर लम्बी होती रही, बनती जाती रही इक ग़ज़ल तो जगाती रही रात भर थी ख़ुशी-ग़म की ऐसी कहानी लिए वो हँसाती-रुलाती रही रात भर !! दिन में उसको तो रहता नहीं कुछ ख़याल ख़ुद को अक्सर सजाती रही रात भर !! ऐसा लगता वो छोड़ेगी करके ख़तम यूँ फ़साना सुनाती रही रात भर !! सुब्ह होते ही जाने कहाँ छुप गई रौशनी जो कि आती रही रात भर रात ही के लिए वो बनी थी 'जेहद' फ़स्ल जो लहलहाती रही रात भर             #जावेेद_जेेेहद Mob_ 9772365964

इतने बरस से कैसे हो तुम..

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  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इतने बरस से कैसे हो तुम ? अब भी भूखे-नंगे हो तुम ! पहले किसी ने बेचा तुमको अब तो ख़ुद ही बिकते हो तुम तुम में अगर ईमान नहीं तो समझो ऐसे-वैसे हो तुम !! तुम न कोई पीर, पयम्बर और न इंसाँ जैसे हो तुम इक रोज़ वसूले जाओगे समझो किसी के पैसे हो तुम हैवाँ जैसे बनते क्यूँ हो ? जब कि इंसाँ जैसे हो तुम तुम्हें कितना जगाया जाता है पर कभी न जागे समय से हो तुम वो जैसे चाहें तुमको नचाएं उनके आगे तो बच्चे हो तुम कितना अच्छा लिखते थे पहले अब उलटे-सीधे लिखते हो तुम करते हो शरारत फिर भी 'जेहद' बड़े ही प्यारे लगते हो तुम !!            #जावेेद_जेेेहद Mob_ 9772365964

इन पत्थरों से अपना भला दिल लगाए कौन..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इन पत्थरों से अपना भला दिल लगाए कौन इनके दिलों में फूल वफ़ा के खिलाए कौन ? आते नहीं गिरफ़्त में  ये तो असानी से इन दिलवरों को राह पे लाए तो लाए कौन माना बला की शोख़ी है  उनकी अदाओं में पर उस नदी की मौज में हरदम नहाए कौन जलती हुई मचलती शमा से लगा के दिल बैठे बिठाए मुफ़्त  जिया को जलाए कौन हम तो फ़िदा हैं उनके ही  हुस्न-ओ-जमाल पे इस रीत को ग़ज़ल में भला और निभाए कौन दो लड़कियों में एक ने  दिन का समय दिया इक ने कहा कि शब को पता मेरा पाए कौन तन्हाई, दर्द, आंसू, तड़प  और रतजगे इतने ग़म-ए-फ़िराक़ के सदमे उठाए कौन कितने अभी हैं छाए  ग़ज़ल के दयार में अब देखिए 'जेहद' यहाँ कबतक है छाए कौन              #जावेेद_जहद     Mob_ 9772365964

आरज़ू है काट ले गर्दन नज़र के सामने..

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    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 आरज़ू है काट ले  गर्दन नज़र के सामने जान जाए ग़म नहीं रश्क-ए-क़मर के सामने अल्ला-अल्ला किस क़दर शौक़-ए-शहादत आज है सर झुका जाता है मेरा फ़ितनागर के सामने !! फूल ख़ुशबू चाँद तारे झील सागर और घटा सब धरे हैं एक जान-ए-मुख़्तसर के सामने हमने तो क्या-क्या न चाहा, तुम नहीं माने मगर कुछ नहीं चलती किसी की तेरे शर के सामने ! ऐ समंदर, तेरी लहरें मुझको तो भाती नहीं उनकी मस्तानी जवानी की लहर के सामने कोई दर भाता नहीं उनकी तो चौखट के सिवा लगता है हर दर ही फीका उनके दर के सामने जब ख़ुदा का क़हर नाज़िल होता है तो कोई भी टिक नहीं पाता है उसके उस क़हर के सामने !! सोचता हूँ मैं हमेशा ऐसा जो होता "अगर" पर नज़र तो और ही आता "मगर" के सामने छोटा पौधा हूँ 'जहद' रहता हूँ लेकिन शान से ऊँचे-ऊँचे, लम्बे-लम्बे इन शजर के सामने !!             #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

साक़ी मुझे दिखा दे मयख़ाना ज़िंदगी का..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 साक़ी मुझे दिखा दे मयख़ाना ज़िंदगी का होने लगा है ख़ाली  पयमाना ज़िंदगी का मय वस्ल की इनायत में देर कर न इतनी यूँ ही छलक न जाए पयमाना ज़िंदगी का कैसा ये दौर आया,  कैसा ये ग़म है छाया क्यों सोज़ में है डूबा अफ़साना ज़िंदगी का मुझको तू देखकर अब ऐ जान यूँही मत जा तुझ पे ही मर मिटा है दीवाना ज़िंदगी का !! किसको नहीं है उलफ़त इस ज़िंदगी से यारो सब को ही देखता हूँ मस्ताना ज़िंदगी का !! सजदे हज़ार हों या लाखों करें 'जेहद' हम होगा अदा न हरगिज़ शुकराना ज़िंदगी का                जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया