दो ग़ज़ल #कोविड_19 #लॉक्डाउन 2020 की..
"दो ग़ज़ल #कोविड_19 #लॉक्डाउन 2020 की" 1..ग़ज़ल 💐 अभी प्यार चुप है, वयापार चुप है अभी तो ये सारा ही संसार चुप है कि जनता तो जनता अभी इस वबा में बहुत बोलने वाली सरकार चुप है !! ख़ज़ाना है ख़ाली चले काम कैसे मज़ा देने वाली तो झंकार चुप है कोई मर रहा है, कोई जान देता मगर फिर भी सारा ही संसार चुप है अभी जिस मदद की ज़रूरत है सबको उसी पर ये सारा ही संसार चुप है !! मुसलसल जो चिल्लाता रहता था बंदा इधर कुछ दिनों से लगातार चुप है !! अभी मैंने कुछ भी कहा ही नहीं है अभी तो ये समझो ग़ज़लकार चुप है सुलह हो गई है ये दोनों में कैसी वफ़ादार चुप है, जफ़ाकार चुप है यूँ लगता है गूंगी हुई फ़िल्म सारी कि छोटा बड़ा हर अदाकार चुप है ख़ता की है उसने इक ऐसी कि अब तो खिंचाई पे अपनी ख़तावार चुप है !! 'जेहद' शाम का हो या चाहे सुबह का अभी हर तरह का ही बाज़ार चुप है !! **************************** 2..ग़ज़ल 💐 शहर छुट्टी, नगर छुट्टी जिधर देखो उधर छुट्टी कभी देखी नहीं होगी बड़ी इतनी समर छुट्टी अभी अपनी मियादों से बड़ी है बेख़बर छुट्टी !! हुआ कुछ फ़ायदा इससे रही या बे-असर छुट्टी ? तुझे भी घेर कर करदी त...