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Showing posts from August, 2021

शराब-ए-इश्क़ से मयकश अगर मख़मूर हो जाए..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 शराब-ए-इश्क़ से मयकश अगर मख़मूर हो जाए तो फिर मयख़ाने से उसकी तबीयत दूर हो जाए पिला ऐसी मुझे साक़ी वो जल्वा देख लूँ मैं भी नज़र जिस पर डालूँ वो सरापा हूर हो जाए !! चला हूँ गुल मोहब्बत का लिए मैं बज़्म-ए-जानाँ में ख़ुदावंदा, ये नज़राना उन्हें मंज़ूर हो जाए !! कि जीने का मज़ा सारा तो है जी हाथ में उसके वो चाहे तो हमारा दुख ही सारा दूर हो जाए !! अगर हम भाई-भाई हैं तो फिर ये दुश्मनी कैसी सुनो ऐ दोस्तो, अब ये हिमाक़त दूर हो जाए !! यही कमबख़्त हर आफ़त का बाइस दिल दिवाना है पटख़ दूँ जी में आता है कि चकनाचूर हो जाए !! 'जेहद' करते हो क्यों इतनी ख़ुशामद उस परी-रू की कहीं ऐसा न हो वो और भी मग़रूर हो जाए !!               #जावेेद_जेेेहद   Mob_ 9772365964

जिस दिल में तुम हो और तुम्हारा ख़याल है..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 जिस दिल में तुम हो और तुम्हारा ख़याल है वो आदमी तो यार बड़ा मालामाल है !! कुछ तेरा ख़्याल है मुझे, कुछ अपना ख़्याल है हम तुमको क्या सुनाएं, जो दिल में सवाल है ! फूलों में, चाँद तारों में, घर और दयार में हर सू परी-जमाल, तिरा ही जमाल है !! ऐ गुलबदन, तू दस्त-ए-करम से सँवार दे इक फूल रहगुज़र में पड़ा पायमाल है !! बादा-कशों को दीजिए न मय ये पूछ के है किसको ये हराम, ये किसको हलाल है हर वक़्त मौज-मस्ती का, रक़्स-ओ-सुरूर का तुझको जो ख़ब्त है ये जवानी की चाल है ज़ुल्फ़ें तराश ली हैं अब उसने तो इस तरह कुछ भी उलझना उसमें बहुत ही मुहाल है ख़ुशहाल हो गया है जहाँ पहले से अगर हर शख़्स किस लिए यूँ परेशान हाल है ? फ़ितना-फ़साद, राहज़नी और छल-कपट लेने न देंगे चैन तो जीना मुहाल है !! आया न देखने कभी जो जीते जी 'जेहद' मरकद पे मेरे किस लिए वो पुर-मलाल है           #जावेेद_जेेेहद_सहसरामी   Mob_ 9772365964

इन पत्थरों से अपना भला दिल लगाए कौन..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इन पत्थरों से अपना भला दिल लगाए कौन इनके दिलों में फूल वफ़ा के खिलाए कौन ? आते नहीं गिरफ़्त में  ये तो असानी से इन दिलवरों को राह पे लाए तो लाए कौन माना बला की शोख़ी है  उनकी अदाओं में पर उस नदी की मौज में हरदम नहाए कौन जलती हुई मचलती शमा से लगा के दिल बैठे बिठाए मुफ़्त  जिया को जलाए कौन हम तो फ़िदा हैं उनके ही  हुस्न-ओ-जमाल पे इस रीत को ग़ज़ल में भला और निभाए कौन दो लड़कियों में एक ने  दिन का समय दिया इक ने कहा कि शब को पता मेरा पाए कौन तन्हाई, दर्द, आंसू, तड़प  और रतजगे इतने ग़म-ए-फ़िराक़ के सदमे उठाए कौन कितने अभी हैं छाए  ग़ज़ल के दयार में अब देखिए 'जेहद' यहाँ कबतक है छाए कौन              #जावेेद_जहद     Mob_ 9772365964

हो गया मालूम लाखों रंज-ओ-ग़म खाने के बाद..

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         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 हो गया मालूम लाखों रंज-ओ-ग़म खाने के बाद ज़ह्न-ओ-दिल होता है रौशन और जल जाने के बाद कैसी-कैसी आफ़तों का सामना करना पड़ा इक तिरे मिलने से पहले, एक मिल जाने के बाद तेरी उलफ़त का सिला मिलता है क्या ऐ शम्मा-रू ये बता देते हैं परवाने भी जल जाने के बाद !! हुस्न है दो-रोज़ा इसपे कर न तू इतना घमंड क़द्र गुल की ख़त्म हो जाती है मुरझाने के बाद दर्द का आलम भी है और मौत का सामान भी जल्दी क्या है, जाइए गा दम निकल जाने के बाद ज़िंदगी से मौत को बेहतर न समझूँ क्यों भला खाएंगी न सैकड़ों चिंताएं मर जाने के बाद !! परदे की चीज़ों को परदे में ही रहना चाहिए क़द्र घट जाती है उसकी परदा उठ जाने के बाद मुझको समझाते जो थे शेर-ओ-सुख़न का क़ायदा ख़ुद हुए हैरान वो तो मेरे समझाने के बाद !! उनपे मरना ठीक है लेकिन 'जेहद' ये सोच ले उम्र भर रोना पड़ेगा उनपे मर जाने के बाद !!                 #जावेेद_जेेेहद         Mob_ 7992365964

वो कौन था जो ले गया अपने नगर मुझे..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 वो कौन था जो ले गया  अपने नगर मुझे वो कौन था जो दे गया ज़ख़्म-ए-जिगर मुझे दे कर ग़म-ए-जुदाई अबस उम्र भर मुझे दीवाना कर गया कोई  दीवाना-गर मुझे आवारगी-ए-शौक़ कहाँ और किधर मुझे क्यों ले चली है राह वहाँ  पुर-ख़तर मुझे दिल और दिमाग़ आज ठिकाने पे है नहीं बेचैन कर गई है किसी की नज़र मुझे !! कहती है उनकी तेग़-ए-जफ़ा दिल में बार बार दें गे दुआएं कितनी ये ज़ख़्म-ए-जिगर मुझे !! ऐ मेरे दिल के चैन ज़रा आके देखिए सहरा में चैन है न चमन में न घर मुझे मत आ ख़याल यार कि है वक़्त मौत का होने दे कुछ सुकून भी दम तोड़ कर मुझे उसने चली न चाल क़यामत की आजतक महशर का इंतजार हुआ  किस क़दर मुझे लिक्खा था साफ़ मैंने बुरा हाल है मिरा उसने दिया जवाब ज़हर भेज कर मुझे डूबा रहा 'जेहद' मैं  सुख़न में जो इस क़दर दुनिया में मिल ही जाएगी कुछ तो क़दर मुझे              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

ऐ दिल दिवाने देख दुखी दिलरुबा न हो..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 ऐ दिल दिवाने देख दुखी दिलरुबा न हो आँखें हैं फ़र्श-ए-राह वही आ रहा न हो ऐसा भी प्यार दोस्तो किस काम का भला मैं हूँ असीर और उन्हें कुछ भी पता न हो देखा है इश्तियाक़ से उनका जमाल आज उनको भी ऐसा शौक़ कभी तो हुआ न हो पीना है गर तो देखना यारो शराब में साक़ी के दिल जिगर का लहू भी मिला न हो मुझको भी है ये आरज़ू ऐ जान-ए-मयकदा पी लूँ तिरी शराब मैं, फिर और क्या न हो उठ जाऊँ मैं यहाँ से अगर यूँ ही क्या हुआ वो कौन है, यहाँ से जो ख़स्ता गया न हो अज़मत-मआब, फ़िक्र-ए-जहाँ आप ही करें मेरा है क्या कि अपना यहाँ कुछ हो या न हो धोना है पाप मुझको भी इक अपना दोस्तो इसके लिए कहाँ मुझे जाकर नहाना हो ? उसकी भी मेहनतें भला किस काम की 'जेहद' मक़बूल सारी दुनिया में जिसकी कला न हो !!             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

मेरी वफ़ा को देख के उसपर भी वो जफ़ा करे..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 मेरी वफ़ा को देख के उसपर भी वो जफ़ा करे ऐसे का कोई क्या करे,  दानिस्ता जो दग़ा करे उनके हिनाई हाथ से जिसको न गुल मिला करे ख़ामोश रह के वो सदा ख़ून-ए-जिगर पिया करे दो-चार दिन की बात हो तो करले कोई इंतज़ार मिलने के ऐतबार पर कबतक कोई जिया करे ढूंढा उसे है आँख ने, दिल ने उसे जगह दिया दोनों क़ुसूरवार हैं, दोनों की वो सज़ा करे !! चाहे सितम करे कोई, चाहे करम करे कोई लाज़िम है एक ही करे, जो भी करे सदा करे मरता हूँ तेरी चाह में, सुनके वो बोला नाज़ से मेरी बला को क्या ग़रज़, चाहे कोई मरा करे दुनिया का हर निज़ाम ही काफ़ी बिगड़ चुका 'जेहद' बर्बाद अब ये और हो, ऐसा न हो ख़ुदा करे !! मेरी ग़ज़ल को देख के शायद ये सोचते हों कुछ कब हो खिंचाई इसकी भी, बंदा ये कब ख़ता करे क़ातिल के रूबरू चला ये आरज़ू लिए 'जेहद' लौटे वो क़त्लगाह से, ऐसा न हो ख़ुदा करे !!              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

ज़ख़्म-ए-दिल छेड़ो न ये और परेशाँ होगा..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 ज़ख़्म-ए-दिल छेड़ो न ये और परेशाँ होगा दर्द उट्ठे गा तो फिर कोई न दरमाँ होगा !! लायक़-ए-फ़ख़्र वो अब कौन सा इंसाँ होगा किसके आने से ये आबाद गुलिस्ताँ होगा ? इश्क़ होता है जो ज़ाहिर तो उसे होने दो इश्क़ इक रोज़ तो बस यूँही नुमायाँ होगा अभी तो समझो कि आई है जवानी उनपे अभी तो और भी वो हश्र-बदामाँ होगा !! मानता हूँ न मिलेगी हमें जन्नत यूँ ही और जिसे मिल गई तो कितना वो हैराँ होगा वक़्त आने दो दिखा देंगे हक़ीक़त ये भी कौन इस देश पे जी-जान से क़ुरबाँ होगा मार सकता है भला कौन किसी को कैसे जब ख़ुदा ही न किसी मौत का ख़्वाहाँ होगा गर ख़ुदा की जो इबादत न करोगे कुछ भी रोज़-ए-महशर तिरा फिर कौन वाँ पुरसाँ होगा वस्ल का दिन है हुआ क़िस्सा भी ये ख़त्म 'जेहद' अब शुरू ये होगा भी तो शब-ए-हिज्राँ होगा !!              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

लड़ा के आँख वो मुझसे मिरे दिल में उतर जाएं..

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        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 लड़ा के आँख वो मुझसे मिरे दिल में उतर जाएं रहें हर वक़्त सीने में, मुझे दीवाना कर जाएं !! ठिकाना है न आबादी में जिनका और न सहरा में बताओ चाहने वाले वो तेरे फिर किधर जाएं ? रुका जब दर्द का नाला नहीं महफ़िल में वो बोले ख़लल होता है इशरत में इन्हें कह दो कि घर जाएं इशारा चश्म-ए-उलफ़त से नहीं अबतक हुआ साक़ी तिरी इस बज़्म से जाएं तो कैसे नौहा-गर जाएं ? बहुत बेताब हो जाता है जब तू ऐ दिल-ए-मुज़तर तो उस दम सोचते हैं ख़ूब है जीने से मर जाएं !! वो नादाँ आते ही मक़तल में बोला यूँ.नज़ाकत से जो मरने वाले हैं मुझपे वो जल्दी से सँवर जाएं !! किया है मुश्किलों से वस्ल का वादा 'जेहद' लेकिन लगा अंदेशा है दिल को वो फिर से न मुकर जाएं !!            जावेेद जहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

कब दिखाओगे सनम अपने गुले-रुख़्सार को..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कब दिखाओगे सनम अपने गुल-ए-रुख़्सार को देख कर सुनते हैं होती है शिफ़ा बीमार को !! क्या कहा जाए तुम्हारे अबरू-ए-ख़मदार को साथ अपने हर घड़ी रखते हो तुम तलवार को डाल कर अबरू पे बल लब जो दबाया आपने क़त्ल कर डाले हज़ारों आशिक़-ए-बीमार को लज़्ज़तें ऐसी मिलीं मुझको तो राह-ए-इश्क़ में प्यार अब करने लगे तलवे भी मेरे ख़ार को सोचता हूँ क्या कहूँ, होती अजब है कशमकश देखता हूँ जब भी मैं बिगड़े हुए संसार को !! मेरी तन्हाई के साथी फ़िक्र-ओ-फ़न, दर्द-ओ-चुभन दिल को बहलाने को रक्खे हैं इन्हीं दो-चार को !! नींद आती है न मुझको चैन आता है 'जेहद' जबसे आँखों में बसाया हमने अपने यार को             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

पीने का जब मज़ा है कि गर्दा उड़ा के पी..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 पीने का जब मज़ा है कि गर्दा उड़ा के पी मदहोश होके, झूम के और नाच-गा के पी साक़ी-ए-नाज़नीं को मुक़ाबिल बिठा के पी बांहों में बांहें डाल,  नज़र को मिला के पी जी भर के छेड़-छाड़, मोहब्बत लुटा के पी हँस-हँस के, खिलखिला के उन्हें गुदगुदा के पी घर में अगर मना हो तो बाहर में जा के पी बाहर में हो कड़ाई  तो घर में मँगा के पी ! सच कहता हूँ क़सम से बहुत आएगा मज़ा तू अपनी सारी फ़िक्र को ठोकर लगा के पी मुमकिन है छूट जाए  कोई दौर इस लिए शीशे को तोड़, मटका ही मुँह से लगा के पी छुप-छुप के क्या है पीना ज़माने के ख़ौफ़ से पीना ही है अगर तो सभी को दिखा के पी !! क्या-क्या न लोग खा गए, क्या-क्या न पी गए तू भी 'जेहद' बुरा-भला सब खा-चबा के पी !!              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

शर्मीला, ख़ूबसूरत, मस्ताना ढूंढता है..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 शर्मीला, ख़ूबसूरत, मस्ताना ढूंढता है कैसे हसीं को दिल ये दीवाना ढूंढता है चल मयकदे में साक़ी रुत है हसीन आई मस्ती में आज कोई  मयख़ाना ढूंढता है रहने दे बज़्म-ओ-महफ़िल ऐ शम्मा शोख़,चंचल दीवाना तेरा अक्सर वीराना ढूंढता है !! कल जो जहाँ रहा था मजनूँ की उलफ़तों का बस वैसा ही जहाँ हर दीवाना ढूंढता है !! गुम हो न जाए यूँही तेरा ये ग़म का मारा कबसे तिरी ख़ुशी का काशाना ढूंढता है कब कामयाब होगा मेरा 'जेहद' तसव्वुर ये जाने किस तरह का अफ़साना ढूंढता है              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

ना उनसे मोहब्बत का इज़हार किया होता..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 ना उनसे मोहब्बत का इज़हार किया होता ना उसने मिरा जीना  दुश्वार  किया  होता होता जो अगर उनको कुछ पास मोहब्बत का इस तर्ह मोहब्बत को ना ख़्वार  किया होता !! मालूम अगर होता  बदलें गी निगाहें तो इन शोख़ निगाहों को ना प्यार किया होता वो दिल में मिरे रहते  बुलबुल मिरी बनके तो इस ख़ाना-ए-दिल को भी गुलज़ार किया होता इक बार भी मिलने की मरज़ी जो तिरी होती इस जान के सदक़े मैं सौ बार किया होता !! इक यार की जब इतनी सर दर्द कहानी है क्या होता अगर मैंने  दो-चार किया होता  कुछ अच्छा नहीं होता  लगता है मुझे क्यों ये इस दिल को 'जेहद' गर ना बीमार किया होता           #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

कर दिया बर्बाद जितना ज़ोर टकराने में हम..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कर दिया बर्बाद जितना ज़ोर टकराने में हम काश उतना दम लगा देते भी मिल जाने में हम किस लिए महफ़िल में ढूंढें और वीराने में हम यार को पाते हैं हरदम दिल के काशाने में हम रात-दिन ऐ शम्मा-रू रहती है तेरी जुस्तुजू हो गए इस इश्क़ में तब्दील परवाने में हम कर लिया करना था जितना प्यार अब आओ सनम दिल दुखाने में रहो तुम और ग़म खाने में हम !! भूल ना जाएं कहीं हम अपनी सारी ही समझ रात-दिन रहते हैं यारो उनके समझाने में हम ! देख कर झगड़ा-लड़ाई ज़िंदा लोगों की 'जेहद' जी में आता है छुपा लें ख़ुद को बुतख़ाने में हम              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

ऐ तबीब अच्छी नहीं बेकार ये तदबीर है..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 ऐ तबीब अच्छी नहीं बेकार ये तदबीर है पास तेरे दर्द-ए-दुनिया की नहीं अकसीर है सुनते क्यों हो, छोड़ दो तन्हा ही उनको दोस्तो ज़ह्र से होती लबालब जिनकी भी तक़रीर है दिल को छलनी-छलनी कर देती हैं तेरी बोलियां तुम जिसे कहते हो भाषण, यार वो तो तीर है !! जितने हैं वासी यहाँ के सबका ही ये देश है ये कोई दो-चार लोगों की नहीं जागीर है !! उसपे इक भी नीच हरकत शोभा देती ही नहीं जिसकी शोहरत और इज़्ज़त यारो आलमगीर है आप कितने प्यार से मिलते हैं सबसे मरहबा मेरे मिलने के लिए तो आपकी शमशीर है !! क्या पता ये कितने लम्बे रास्तों को तय करे छोटे क़दमों से अभी ये चल रही तहरीर है !! इस जुनूँ में अल्ला-अल्ला ख़ब्त तो देखो ज़रा फिर रहा हूँ शान से जब ख़ाक दामनगीर है !! पर्स में, कॉपी में, दिल में, तकिया में रहती है ये तुमसे तो अच्छी तुम्हारी ये सनम तस्वीर है !! उलझी ज़ुल्फ़ों में 'जेहद' उलझा तो उलझा ही रहा ये असीरान-ए-मोहब्बत के लिए ज़ंजीर है !!             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

इक बुत को मैंने प्यार किया, हाए क्या किया..

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        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक बुत को मैंने प्यार किया, हाए क्या किया इस दिल को सोगवार किया, हाए क्या किया कुछ पथ को यूँही पार किया, हाए क्या किया कुछ वक़्त नष्ट यार किया, हाए क्या किया !! थीं मुश्किलें हज़ारों तिरी राह में सनम फिर भी तुम्हीं को प्यार किया, हाए क्या किया निकला न दम मिरा कभी ना आए तुम इधर मर-मर के इंतज़ार किया, हाए क्या किया !! किस से क़रार मांगें सिवा तेरे ऐ जुनूँ तूने ही बेक़रार किया, हाए क्या किया लाज़िम था ज़ब्त नाला-ए-दिल बज़्म-ए-ग़ैर में कब जाने आशकार किया, हाए क्या किया !! दिल से मिला के दिल इसे देकर हज़ारों ग़म दिल मेरा दाग़दार किया, हाए क्या किया !! आके कभी भी सामने लगने न दी हवा छुप-छुप के दिल शिकार किया, हाए क्या किया कितनी मुसीबतों को 'जेहद' ख़ुद से मोल के ख़ुद ही गले का हार किया, हाए क्या किया !            #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

आरज़ू है काट ले गर्दन नज़र के सामने..

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    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 आरज़ू है काट ले  गर्दन नज़र के सामने जान जाए ग़म नहीं रश्क-ए-क़मर के सामने अल्ला-अल्ला किस क़दर शौक़-ए-शहादत आज है सर झुका जाता है मेरा फ़ितनागर के सामने !! फूल ख़ुशबू चाँद तारे झील सागर और घटा सब धरे हैं एक जान-ए-मुख़्तसर के सामने हमने तो क्या-क्या न चाहा, तुम नहीं माने मगर कुछ नहीं चलती किसी की तेरे शर के सामने ! ऐ समंदर, तेरी लहरें मुझको तो भाती नहीं उनकी मस्तानी जवानी की लहर के सामने कोई दर भाता नहीं उनकी तो चौखट के सिवा लगता है हर दर ही फीका उनके दर के सामने जब ख़ुदा का क़हर नाज़िल होता है तो कोई भी टिक नहीं पाता है उसके उस क़हर के सामने !! सोचता हूँ मैं हमेशा ऐसा जो होता "अगर" पर नज़र तो और ही आता "मगर" के सामने छोटा पौधा हूँ 'जहद' रहता हूँ लेकिन शान से ऊँचे-ऊँचे, लम्बे-लम्बे इन शजर के सामने !!             #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

25O GHAZALS 💐💐

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  दोस्तो ! पेशे-ख़िदमत है मेरे इस साइट की ये "दो सौ पचासवीं ग़ज़ल"..यहाँ रचनाएं पेश करने का मक़सद केवल इतना है कि आप इन्हें इकट्ठे देख सकें..और ये मुश्किल काम बस आपलोगों के सहयोग व हौसलाअफ़ज़ाई के कारण हो पाया है... इसलिए इसका सारा श्रेय आपलोगों को दिली शुक्रिया के साथ 💐💐 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐     मेरे इस साधारण से साइट को अभी तक तीन-चार हज़ार लोगों ने देखा और सराहा..ये मेरी ख़ुशनसीबी है.. अगर मैं किताबें निकालता तो शायद इतने लोगों तक नहीं पहुंच पाती..लेकिन किताब का अलग महत्व है.. इंशाअल्लाह इस काम को भी जल्द अंजाम दिया जाएगा !!         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 देखें तो आज हमसे  निगाहें लड़ाए कौन किसके जिगर पे तीर चले, चोट खाए कौन हाज़िर हैं मेरे जिस्म-ओ-जिगर वार के लिए तेरे सितम की ज़द में भला और आए कौन वो आइने में देख के कहते हैं अक्स से ये हुस्न दिलफ़रेब भला और पाए कौन जी चाहता है जान  हलाकत में डाल दें इतने शब-ए-फ़िराक़ के सदमे उठाए कौन कब आएगा वो जाएगी जब ये हमारी जान यारब, ये इंतज़ार की घड़ियां मिटाए कौन ? तेरे सितम की तेग़ सनम दिल पे चल गई रब की क़सम जी और करे...