Posts

Showing posts with the label #ताज़ा_ग़ज़ल #जावेद_जहद_सहसरामी #रेख़्ता

बेख़ुदी जिस्म-ओ-जाँ में ढल आई..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 बेख़ुदी जिस्म-ओ-जाँ में ढल आई याद भूली सी इक ग़ज़ल आई ।। नए फ़ैशन में होके मस्त--मगन अधखुली घर से वो निकल आई देख के रंगीं शाम "जूहू" की जान मेरी भी कुछ मचल आई बिजली चमकी तो डर के मारे ही मेरी बांहों में वो उछल आई ।। मैं सहज था तो मेरे ज़ेहनों में जो भी आई ग़ज़ल सरल आई दर्द सहते रहे ख़ुशी से हम राह ख़ुशियों की यूँ निकल आई दिल में तूफ़ान अब नहीं कोई ज़िंदगी लुट के भी सँभल आई इस बदलते हुए ज़माने में ये ग़ज़ल भी शकल बदल आई वो बहारें भी गुल खिला न सकीं ये भी आई तो बे-अमल आई ।। जाने कब जाएगी ये दूर 'जहद' शाम-ए-ग़म है जो आजकल आई      ~जावेद जहद

बस दौरे पे जो जाए तो लगता है कि तुम हो..

          ताज़ा ग़ज़ल 💐 बस दौरे पे जो जाए तो लगता है कि तुम हो दौलत जो लुटा आए तो लगता है कि तुम हो खींचे रहे सन्नाटा कभी और कभी ख़ूब पागल सा जो चिल्लाए तो लगता है कि तुम हो साधू की तरह बनके सियासत की गली में इक आँख जो मटकाए तो लगता है कि तुम हो जो काम ज़रूरी है वही सत्ता में आके जो शख़्स न कर पाए तो लगता है कि तुम हो करता रहे ग़लती जो, डुबाता रहे नइया फिर भी नहीं पछताए तो लगता है कि तुम हो पानी में मचलती हुई मछली जो हवा में लहरा के उछल जाए तो लगता है कि तुम हो उल्फ़त की कहानी में किसी पल जो अचानक मौसम सा बदल जाए तो लगता है कि तुम हो पैमाना शराबों से भरा ख़ूब लबालब आपस में जो टकराए तो लगता है कि तुम हो जो कहना नहीं चाहिए वो सब भी ग़ज़ल में जो कहता चला जाए तो लगता है कि तुम हो बकबक करे हर वक़्त 'जहद' फिर भी मगर जो कुछ बात छुपा जाए तो लगता है कि तुम हो ।।          ~जावेद जहद

करो या ना करो जानम कोई सिंगार होली में..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 करो या ना करो जानम कोई सिंगार होली में लगा के रंग हो जाना हसीं तुम यार होली में ये रंगों का परब है जी कि इसके बिन मज़ा कैसा उड़ा के रंग कर दो सारा जग गुलज़ार होली में । ग़ज़ल होली पे कहनी हो तो उसमें रखना बस ये ख़्याल कि पूरा होली जैसा हो ग़ज़ल का सार होली में ।। ग़ज़ल क्या सुनते हो होली में यारो फीकी-फीकी सी बजाओ गाना देवर-भौजी  का झंकार होली में ।। मनाओ मौज-मस्ती, झूमो-नाचो चाहे जितना भी करो पीकर किसी से तुम न लेकिन मार होली में लड़ें तो लड़ने दो आँखें, चढ़ें तो चढ़ने दो आँखें जिगर के पार हो आँखों की ये तलवार होली में 'जहद' घूमो-फिरो, सबसे मिलो तुम आज हँस-हँस के रहो घर में पड़े तुम ऐसे ना बीमार होली में ।।           ~जावेद जहद

बड़े हो गर तो बनो भी आला..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 बड़े हो गर तो बनो भी आला कि काम सारा करो भी आला ये बेतुके बोल छोड़ो यारो कहो भी आला, सुनो भी आला तुम्हारी इज़्ज़त हैं करते सारे हुज़ूर-ए-आला, रहो भी आला बड़े जो बनते हो दर्द वाले तो दर्द फिर तुम सहो भी आला जो चाहते हो बड़ा ख़ज़ाना तो यार माला जपो भी आला हो आला लेखक समझते ख़ुद को तो सारी रचना रचो भी आला ।। जो चाहते हो उड़ान ऊंची तो पंख अपने करो भी आला अगर समझते हो ख़ुद को अद्भुत करिश्मा कोई करो भी आला ।। अगर चे सच में न चाहते हो तो सारी क़दरें ढहो भी आला 'जहद' जो बन्ना हो अच्छा शायर पढ़ो भी आला, लिखो भी आला      ~जावेद जहद

कि दिल में मिरे जो भी घर कर गया..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐 बहरे मुतकारिब मुसम्मन मक़सूर फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़अल 122  122  122  12 कि दिल में मिरे जो भी घर कर गया समझिए कि मुझको वो सर कर गया रसीला था इतना ही उसका वजूद कि छूते ही मुझको वो तर कर गया ये कैसे बताएं कि इक मेहरबां हमारी वो क्या-क्या नज़र कर गया वो आया था दिल को बिछाए मगर गया तो वो तेढ़ी नज़र कर गया ।। जहाँ से कभी भी मैं गुज़रा न ख़ुद वहाँ भी वो मुझ में गुज़र कर गया वफ़ा, प्यार, उल्फ़त के वो साथ ही मुलाक़ात भी मुख़्तसर कर गया । भला इश्क़ जितना है उतना बुरा मुझे उनका ग़म ये ख़बर कर गया वो कैसा था इंसाफ़ वाला भी जो इधर की अमानत उधर कर गया 'जहद' अब यहाँ तो हैं बैचैनियाँ कि अच्छा है जो भी सफ़र कर गया      ~जावेद जहद