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बड़ी ही मुश्किलों से गुज़रे हैं..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐 बड़ी ही मुश्किलों से गुज़रे हैं वो जो भी मंज़िलों से गुज़रे हैं उन्हीं की मुश्किलें आसाँ हुईं जो पूरे हौसलों से गुज़रे हैं !! वो दिलवर क्या चलेंगे शोलों पर जो हर दम मख़मलों से गुज़रे हैं पड़ा जब ख़ार पे चलना उन्हें वो मुड़ के रास्तों से गुज़रे हैं !! डरेंगे छोटे वो झटकों से क्या बड़े जो ज़लज़लों से गुज़रे हैं हमारे पास है ऐसा हुनर कि हम सबके दिलों से गुज़रे हैं ये नंगे नाच-गाने तो 'जेहद' न पहले महफ़िलों से गुज़रे हैं     ~ जावेद जहद