जो देखूँ रुख़-ए-दिलरुबा चुपके चुपके..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 जो देखूँ रुख़-ए-दिलरुबा चुपके चुपके तो चुपके से कहदूँ कि आ चुपके चुपके मिरा मुद्दआ सुनके अफ़सोस ज़ालिम अदू से करे मश्विरा चुपके चुपके !! नक़ाब उनके रुख़ से न जाने हटे कब न जाने छटे कब घटा चुपके चुपके !! कि गुल होते नाज़ुक हैं पहली खिलन के ज़रा छेड़ बाद-ए-सबा चुपके चुपके !! जवानी ने उनकी, अदाओं ने उनकी किया एक महशर बपा चुपके चुपके अभी तो मोहब्बत का आग़ाज़ है ये अभी तो जपो दिलरुबा चुपके चुपके किया शोर कोई न कोई तमाशा 'जेहद' मैं तो शायर बना चुपके चुपके जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार