रुख़ बदलती हुई हवाएं हैं..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
रुख़ बदलती हुई हवाएं हैं
हर तरफ़ अब नई फ़ज़ाएं हैं
गर्म से गर्म अफ़सराएं हैं
जिस्म पर नाम की क़बाएं हैं
रंग देसी है ढंग परदेसी
ये यहीं की न फ़ाख़ताएं हैं ?
लूट लो प्यार की सभी दौलत
इसकी मिलती नहीं सज़ाएं हैं
अम्न होता नहीं ज़माने में
बड़ी घंघोर ये घटाएं हैं !!
मिट रही है जहाँ से अच्छाई
इसलिए आरही बलाएं हैं !!
सारा संसार खो गया ख़ुद में
मिल गई अब सभी दिशाएं हैं
फिर यही रंग लाएंगी यारो
ये जो बेरंग सी वफ़ाएं हैं !
अक़्ल दे हर किसी को या अल्लाह
अब तो बस मेरी ये दुआएं हैं !!
कैसे होंगी ये माफ़ सोचो 'जहद'
हमने की जो बड़ी ख़ताएं हैं !!
~ जावेद जहद
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