25O GHAZALS 💐💐
दोस्तो ! पेशे-ख़िदमत है मेरे इस साइट की ये "दो सौ पचासवीं ग़ज़ल"..यहाँ रचनाएं पेश करने का मक़सद केवल इतना है कि आप इन्हें इकट्ठे देख सकें..और ये मुश्किल काम बस आपलोगों के सहयोग व हौसलाअफ़ज़ाई के कारण हो पाया है... इसलिए इसका सारा श्रेय आपलोगों को दिली शुक्रिया के साथ 💐💐 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 मेरे इस साधारण से साइट को अभी तक तीन-चार हज़ार लोगों ने देखा और सराहा..ये मेरी ख़ुशनसीबी है.. अगर मैं किताबें निकालता तो शायद इतने लोगों तक नहीं पहुंच पाती..लेकिन किताब का अलग महत्व है.. इंशाअल्लाह इस काम को भी जल्द अंजाम दिया जाएगा !! #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 देखें तो आज हमसे निगाहें लड़ाए कौन किसके जिगर पे तीर चले, चोट खाए कौन हाज़िर हैं मेरे जिस्म-ओ-जिगर वार के लिए तेरे सितम की ज़द में भला और आए कौन वो आइने में देख के कहते हैं अक्स से ये हुस्न दिलफ़रेब भला और पाए कौन जी चाहता है जान हलाकत में डाल दें इतने शब-ए-फ़िराक़ के सदमे उठाए कौन कब आएगा वो जाएगी जब ये हमारी जान यारब, ये इंतज़ार की घड़ियां मिटाए कौन ? तेरे सितम की तेग़ सनम दिल पे चल गई रब की क़सम जी और करे...