दिल-जिगर, जिस्म-ओ-जाँ, जबीं मासूम..
ताज़ा ग़ज़ल दिल-जिगर, जिस्म-ओ-जाँ, जबीं मासूम तुम हो जानाँ बड़ी हसीं मासूम !! चाँद, तारे, परिंदे, झील, कँवल कोई तुमसा लगे नहीं मासूम ! शोख़, चंचल, शरीर, ढीठ कहीं और नज़र आती हो कहीं मासूम तुमको मिलती जहाँ है मासूमी आओ चलते हैं हम वहीं मासूम ग़ुस्से में इन लबों को मत भींचो खेलती है हँसी यहीं मासूम !! वो बड़ा ही नसीब वाला है जिसका दिलवर हो दिलनशीं मासूम आज ऐसे 'जहद' ये बदला रूप जैसे ये था कभी नहीं मासूम !! #जावेेद_जहद