गली में आपकी किस रोज़ इज़्दिहाम नहीं..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 गली में आपकी किस रोज़ इज़्दिहाम नहीं बताओ किस की नज़र है जो सू-ए-बाम नहीं तुम्हीं कहो कि किया किसने एहतराम नहीं या कौन आया तुम्हारे कोई भी काम नहीं ? तुम्हारे वास्ते क्या-क्या लुटा दिया मैंने मगर कभी भी लिया तूने मेरा नाम नहीं कहूँ मैं क्या कि मुझे हो गया वहीं सकता हुआ जो घर में बुला के वो हम-कलाम नहीं जहाँ भी चाहा वहीं तुझको पा लिया मैंने ये माना हमने कि यकजा तिरा क़याम नहीं हुआ जो रुख़ का तिरे और ज़ुल्फ़ का पागल फिर उसकी सुब्ह नहीं और उसकी शाम नहीं कहो जो कहना है मौक़ा मिला है तुमको 'जेहद' कि आज तुमसे है ना-ख़ुश ये ख़ुश-ख़िराम नहीं जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया