फिर चलो हम सफ़र करें..

   ताज़ा ग़ज़ल 💐

फिर चलो हम सफ़र करें
हिज्र को मुख़्तसर करें !

अपनी-अपनी मोहब्बतें
हम सभी की नज़र करें

शाम-ए-ग़म को मिटाके हम
ख़ुशनुमा इक सहर करें !!

माल-ओ-ज़र इक अज़ाब है
ज़्यादा की न फ़िकर करें !!

शोला-शोला सी राह को
गुल भरी रहगुज़र करें !!

मैल धोकर दिलों की हम
साफ़-सुथरी नज़र करें !!

शान से ज़िंदगी कटे
ख़ौफ़ में न बसर करें

ग़म है करना मना 'जेहद'
ग़म कभी कुछ मगर करें

   ~ जावेद जहद

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