100 Ghazals 💐
दोस्तो, आदाब ! पेशे-ख़िदमत है अपनी ये सौवीं ग़ज़ल.. अभी आपलोगों को यहाँ मेरी काफ़ी रचनाएं देखने को मिलेंगी.. एक पूरा दीवान मिलेगा इंशाअल्लाह ! मेरी पहली रचना (कहानी) उर्दू की मशहूर पत्रिका "बीसवीं सदी" में "गुमनाम जज़्बे" जमशेद अख़्तर नाम से (जून 2000 ई ) में छपी थी..फिर मेरे इसी नाम से "शायर" "सरिता" "पालिका समाचार" "फ़िल्मी दुनिया" "उर्दू चैनल" "सरस सलिल" "गुलाबी किरन" जैसी पत्र-पत्रिकाओं में मेरी ग़ज़लें और कहानियां आती रहीं.. मेरा ये अदबी सफ़र बहुत सुस्त और लापरवाही भरा रहा और रुक रुक के चलता रहा... ग़ज़ल का फ़न काफ़ी मुश्किल है.. इसे बड़ी बारीकी से चेक करना पड़ता है और इसके बहर-वज़न, काफ़िया-रदीफ़, मानी-मतलब, पाई-बिंदु, एक एक शब्द पर ग़ौर करना पड़ता है.. और फिर उसे अपनी पसंदीदा जगहों पर पहुंचाना, ये भी तेढ़ा काम है.. जो हमें ख़ुद से ही करना पड़ता है... आज बहुत सारे लोग सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय हैं, और सफ़ल हैं.. सभी की मेहनतों को सलाम.. शुभकामनाएं.. मैं फ़िल्हाल उतना सक्रिय नहीं हूँ.. आगे इंशाअल्लाह ते...