पीने का जब मज़ा है कि गर्दा उड़ा के पी..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 पीने का जब मज़ा है कि गर्दा उड़ा के पी मदहोश होके, झूम के और नाच-गा के पी साक़ी-ए-नाज़नीं को मुक़ाबिल बिठा के पी बांहों में बांहें डाल, नज़र को मिला के पी जी भर के छेड़-छाड़, मोहब्बत लुटा के पी हँस-हँस के, खिलखिला के उन्हें गुदगुदा के पी घर में अगर मना हो तो बाहर में जा के पी बाहर में हो कड़ाई तो घर में मँगा के पी ! सच कहता हूँ क़सम से बहुत आएगा मज़ा तू अपनी सारी फ़िक्र को ठोकर लगा के पी मुमकिन है छूट जाए कोई दौर इस लिए शीशे को तोड़, मटका ही मुँह से लगा के पी छुप-छुप के क्या है पीना ज़माने के ख़ौफ़ से पीना ही है अगर तो सभी को दिखा के पी !! क्या-क्या न लोग खा गए, क्या-क्या न पी गए तू भी 'जेहद' बुरा-भला सब खा-चबा के पी !! #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया