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Showing posts with the label #गीत #ग़ज़ल #दोहा #माहिया #कविता #छंद #रेख़्ता

लगा हुआ है सभी को वो वरग़लाने में..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 लगा हुआ है सभी को वो वरग़लाने में ज़रूर आग लगा देगा वो ज़माने में !! पड़े हो तुम जो हमें ख़ाक में मिलाने में लगे हैं हम भी तुम्हें अर्श पे उठाने में !! बस एक झटके में दुनिया तबाह कर डालो ये जान देते हो क्यों छोटे बम गिराने में ? अगर वो पहले से महफ़ूज़ हैं तो फिर अक्सर ये चीख़ उठती है क्यों उनके आशियाने में ? अजब उदासी का आलम है चाहे देखो जिधर ख़ुशी, ये क्या हुआ है तेरे कारख़ाने में ? ये ज़िंदगी तो है लाखों जतन का गहवारा क़ज़ा का क्या है, चली आती है बहाने में मिरा तो ख़ुद ही तड़पता है दिल सभी के लिए मज़ा मिलेगा मुझे किसका दिल दुखाने में ? हमें दहाड़ रहे हैं 'जेहद' वही अब तो दबे जो रहते थे हमसे किसी ज़माने में न फेरो उनके इरादों पे तुम 'जेहद' पानी समझते हैं जो भलाई ही डूब जाने में !!            जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

किसी से लड़ी जो नज़र पहले पहले..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 किसी से लड़ी जो नज़र पहले पहले किया उसने छलनी जिगर पहले पहले उसी पर वफ़ाओं के बदले जफ़ा हो जो देता है नज़राना सर पहले पहले ये क्यों ना तबाही मचाएंगे यारो ये आए हैं ज़ालिम इधर पहले पहले बहुत तेज़ है एक चैनल अजब सा जो लेता है मेरी ख़बर पहले पहले ये अबरू, ये मिज़गाँ, ये तिरछी निगाहें किया सबने ज़ख़्मी जिगर पहले पहले बिगड़ के शब-ए-वस्ल उसने दुआ की इलाही मिरी हो सहर पहले पहले !! ये मर-मर के रचना गढ़ी है जो इतनी बता कौन होगी अमर पहले पहले ? वही है ज़माने में असली फ़सादी जो छेड़े है झगड़ा बशर पहले पहले न जाने मोहब्बत का दुनिया में यारो लगाया था किसने शजर पहले पहले ज़रा ग़म न करना 'जेहद' प्यार में तू लगे चोट दिल पर अगर पहले पहले             जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

साक़ी है नया, ख़ुम नई, मयख़ाना नया है..

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         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 साक़ी है नया, ख़ुम नई, मयख़ाना नया है मयकश नए तो हाथ में पैमाना नया है !! आज अपना भी अंदाज़ ये रिंदाना नया है हर घोंट में क्या सजदा-ए-शुकराना नया है होने को तो होती है हमेशा ही तजल्ली पर आज तो इक जलवा जुदागाना नया है संभलेगा दिवाना भला क्या जोश-ए-जुनूँ में ज़ंजीर नई है न ये ज़िंदाना नया है !! है ख़ौफ़ न हो जाए कहीं सुनके वो पागल इतना ही भयानक मिरा अफ़साना नया है हर वक़्त मगन रहता है वो इसलिए उसमें है उसकी परस्तिश नई, बुतख़ाना नया है कहते हैं मुझे देख के वो प्यार से यारो हट जाओ नहीं ख़ैर कि दीवाना नया है उनकी भी 'जहद' है जो अगर बोर कहानी तो इनका भी कुछ भी नहीं अफ़साना नया है              #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

चुपके-चुपके कोई तुझको देखता महफ़िल में है..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 चुपके-चुपके कोई तुझको देखता महफ़िल में है देख ले तू भी उसे गर प्यार तेरे दिल में है !! राज़ के मानिंद पिन्हा है तुम्हारी आरज़ू जिससे घायल होगा तू वो तीर मेरे दिल में है हो गया अपना मुक़द्दर देखो तो कितना बुलंद चांद पे सूरत जो थी वो आज मेरे दिल में है !! फेर दे खंजर गले पर, करदे दो टुकड़े मुझे ज़ब्त की ताक़त न दम भर अब तिरे बिसमिल में है जी में आता है कि रखलें बस जिगर में घोंप के देख कर ख़ंजर को जो ख़ंजर कफ़-ए-क़ातिल में है कर दिया ज़ुल्फ़-ए-परेशां ने भी ये कैसा ग़ज़ब दिल मिरा ज़ुल्फ़ों में है और ज़ुल्फ़ मेरे दिल में है दर्द-ए-सर, दर्द-ए-जिगर और दर्द-ए-दिल है आजकल दिल लगा के ये 'जहद' तो हाए किस मुश्किल में है !!            जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

उसकी तो कभी हो सकती नहीं गिनती अच्छे रहबर में..

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          #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 उसकी तो कभी हो सकती नहीं गिनती अच्छे रहबर में ख़ून लगा हो मज़लूमों का यारो जिसके ख़ंजर में !! अच्छे दिन लाने वाले कितने आए और चले गए फिर भी ख़ुशहाली न आई अबतक यारो घर-घर में राजा हो या रंक जहाँ में जब सारे ही बराबर हैं तो किसको छोटा-बड़ा कहें हम, कौन नहीं है हमसर में कितने लश्कर से ऊपर उठ जाते हैं उठते-उठते और कितने गुम हो जाते हैं गिरते-गिरते लश्कर में सारे ही इंसान को जो ख़ुशहाल बना दे पूरी तरह ख़ूबी ये जाने क्यों न आई अबतक कोई रहबर में बाहर से क्या समझ सकोगे किसी की तुम मक्कारी को सबका ही तो फ़रेब छुपा रहता है उसके अंदर में !! कितने पड़े रहते हैं ठंडे कितने-कितने सालों तक आग लगी रहती है हरपल और कितने ही बिस्तर तुम लड़कियों के पीछे ज़्यादा कभी न भागा करो 'जेहद' जान चली जाती है कितनी अक्सर उनके चक्कर में !!               #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार

सारी दुनिया का ग़म लिया शायर..

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   ताज़ा ग़ज़ल 💐 सारी दुनिया का ग़म लिया शायर और तूने भी क्या किया शायर ? कोई जीता रहा हक़ीक़त को कोई ख़्यालों में बस जिया शायर किस शहर में हुए बहुत पैदा किसने कितना बड़ा दिया शायर ? जाने किस किस पे और कितनों के संग शायरी की, सुख़न किया शायर !! फाड़ डाला किसी को शेरों से और किसी को कभी सिया शायर कितना तू इस्तेमाल करता है दिल-जिगर, जिस्म-ओ-जाँ, जिया शायर आज हिलने लगा है वो ख़ुद ही जिसने था जग हिला दिया शायर और कोई किया कि बस तूने  शायरी का नशा किया शायर ? धूल क्यों फांकती रहीं तेरी क्या किताबों में भर दिया शायर ? बन गया था सदाएं जो सब की ख़ुद वो आवाज़ खो दिया शायर कोई जागा न जब जगाने से ख़ुद भी ख़ामोश हो लिया शायर है वही तो 'जहद' बड़ा नामी पार सरहद को जो किया शायर          जावेेद जहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

दो ग़ज़ल #कोविड_19 #लॉक्डाउन 2020 की..

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"दो ग़ज़ल #कोविड_19 #लॉक्डाउन 2020 की"       1..ग़ज़ल 💐 अभी प्यार चुप है,  वयापार चुप है अभी तो ये सारा ही संसार चुप है कि जनता तो जनता अभी इस वबा में बहुत बोलने वाली सरकार चुप है !! ख़ज़ाना है ख़ाली चले काम कैसे मज़ा देने वाली तो झंकार चुप है कोई मर रहा है, कोई जान देता मगर फिर भी सारा ही संसार चुप है अभी जिस मदद की ज़रूरत है सबको उसी पर ये सारा ही संसार चुप है !! मुसलसल जो चिल्लाता रहता था बंदा इधर कुछ दिनों से लगातार चुप है !! अभी मैंने कुछ भी कहा ही नहीं है अभी तो ये समझो ग़ज़लकार चुप है सुलह हो गई है ये दोनों में कैसी वफ़ादार चुप है, जफ़ाकार चुप है यूँ लगता है गूंगी हुई फ़िल्म सारी कि छोटा बड़ा हर अदाकार चुप है ख़ता की है उसने इक ऐसी कि अब तो खिंचाई पे अपनी ख़तावार चुप है !! 'जेहद' शाम का हो या चाहे सुबह का अभी हर तरह का ही बाज़ार चुप है !! ****************************     2..ग़ज़ल 💐 शहर छुट्टी, नगर छुट्टी जिधर देखो उधर छुट्टी कभी देखी नहीं होगी बड़ी इतनी समर छुट्टी अभी अपनी मियादों से बड़ी है बेख़बर छुट्टी !! हुआ कुछ फ़ायदा इससे रही या बे-असर छुट्टी ? तुझे भी घेर कर करदी त...

दो ग़ज़ल #कोविड-19 #लॉक्डाउन की..

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      "दो ग़ज़ल 2020 लॉक्डाउन की" 1..ग़ज़ल 💐 हालत बहुत बुरी है जी घर में पड़े पड़े पूंजी सरक गई है जी घर में पड़े पड़े ! होने लगी है सुस्त तबीयत भी अब मिरी बस नींद आरही है जी घर में पड़े पड़े !! लगता है हमसे काम न अब तो हो पाएगा आदत बिगड़ गई है जी घर में पड़े पड़े !! कितनी ग़ज़ल बनाई है हमने जहाँ-तहाँ लेकिन ये तो बनी है जी घर में पड़े पड़े बरसात भी कटे न कहीं अब इसी तरह गर्मी जो ये कटी है जी घर में पड़े पड़े ! और कुछ मिला या न मिला हमको तो काम से राहत बहुत मिली है जी घर में पड़े पड़े !! दिन-रात जो लगे हैं बचाने में लोगों को उनको दुआएं दी है जी घर में पड़े पड़े अच्छा न लग रहा है मुझे कुछ भी इसलिए कुछ ही ग़ज़ल कही है जी घर में पड़े पड़े निर्भर है रहना ख़ुद पे 'जेहद' अब तो सोच लो दौलत किसे मिली है जी घर में पड़े पड़े !! **********************************       2..ग़ज़ल 💐 फिर आई है सबको सताने ग़रीबी ये जाएगी कैसे न जाने ग़रीबी !! अभी कितना ख़ुशहाल है ये ज़माना ये आई है सबको बताने ग़रीबी !! बहुत ज़्यादा तकलीफ़ में लोग थे सब तभी ये लगी यूँ भगाने ग़रीबी !! मुसलसल दो पैसा एल आई सी के साथ लगी बात ये क्य...

200 GHAZALS 💐💐

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दोस्तो.. आदाब ! पेश है अपने इस साइट की ये दो सौवीं ग़ज़ल. अभी तक मैंने यहाँ जितनी भी ग़ज़लें पब्लिश की हैं, सब के सब ग़ज़ल की ऑरीजनल बहर में हैं और हर तरह से चेक की हुई हैं. फिर भी मुमकिन है इस कोरोना काल में दिमाग़ी उलझन के चलते कहीं कोई कमी या कोई शेर कमज़ोर रह गया हो तो इसके लिए क्षमा चाहता हूँ !    इस साइट को पसंद करने के लिए मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ.. और साथ में तमाम सोशल मीडिया व Google को भी Thanks 💐💐💐💐💐💐           ताज़ा ग़ज़ल 💐 ख़ुश जिसे पाके होना है यारो फिर उसे खोके  रोना है यारो ऐसी बहकी हुई हवाओं में सबको पागल तो होना है यारो इश्क़ में साथ उनके उड़ जाना ख़्वाब ये तो सलोना है यारो !! चाह कर भी जिसे झटक न सकें बोझ वो फिर तो ढोना है यारो !! प्यार के धागे से परे हैं जो गुल कब उन्हें भी पिरोना है यारो ? चाहे कांटा ही वो निकल जाए हमको गुल ही तो बोना है यारो रोज़ जगते हैं कितने सोते हैं कभी सबको ही सोना है यारो जिसको चाहेंं न दुनिया वाले तो आओ अपना ये कोना है यारो ! वो दिखाए गए थे ख़्वाब हसीं ख़्वाब ये भी सलोना है यारो ये ग़ज़ल अच्छी है 'जेह...

शिकस्ता दिल और मगन में है जी..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐 शिकस्ता दिल और मगन में है जी ये कैसा दिल इस बदन में  है  जी लपकता उनपे ये दिल कभी था अब अपनी ही ये शरण में  है जी उन्हें है पाना बस एक धुन थी ये दिल कईं अब लगन में है जी हैं जाँद कितने तो कैसे कह दूँ कि चाँद बस इक गगन में है जी वो कैसा है जो लुटा के सबकुछ क़रार-ओ-चैन-ओ-अमन में है जी किसी भी शायर की कामयाबी बस उसके मश्क़-ए-सुख़न में है जी ये कैसा उड़ने का शौक़ जागा हर एक पंछी गगन में है जी ! उसे न तुम दो नज़र से देखो जो अपने ही इस वतन में है जी किसी भी तहज़ीब मेंं न होगी जो बात गंग-ओ-जमन में है जी 'जेहद' न जानो सहल इसे तुम बड़ा परिश्रम सुख़न में है जी ।      ~जावेद जेहद

ये सारे जग से ख़ुशनुमा, ये सारे जग से शादमाँ..

         ताज़ा ग़ज़ल 💐 ये सारे जग से ख़ुशनुमा, ये सारे जग से शादमाँ ये हर तरह के फूलों का हसीं-हसीं है गुलसिताँ यहाँ की दिलकशी अलग, फ़ज़ा अलग, समाँ अलग ये अपने ही तो रंग में भला लगे है हाँ जी हाँ ।। बहुत ही दूर-दूर से यहाँ पे आते लोग हैं कि जैसे आते पंछियाँ, यहाँ पे करने मस्तियाँ ये देवी, देवताओं की पसंद की जगह रही हैं कितने ख़ुशनसीब हम कि पैदा हम हुए यहाँ हमें ये जब अज़ीज़ है, हमारी जब ये जान है तो लूटो न इसे कभी, लुटाओ बल्कि इसपे जाँ हो बात करते अम्न की, वतनपरस्तियों की तुम तो बेहयाई से करो न गंदी राजनीतियाँ ।। हमीं उजाड़ें गर इसे, बुरी ये कितनी बात है हमीं तो हैं सुहाने से ये गुलसितां के बाग़बाँ यहाँ कहीं हवाएँ हैं कि जितनी साफ़-सुथरी सी यहाँ, वहाँ भी वैसी हो, जहाँ भरा है बस धुआं ख़ुदा तिरा है लाख-लाख शुक्रिया हाँ शुक्रिया रहा है जैसे इसपे तू , हमेशा रहना मेहरबां !! हक़ीक़तों से तर ब तर यहाँ के सारे फ़न 'जहद' हाँ सारी ही कलाओं का ये क़ुदरती है आशियाँ          ~जावेद जहद