Posts

Showing posts from September, 2021

इक कासे में उठ आया दरिया का सारा पानी था..

Image
        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक कासे में उठ आया दरिया का सारा पानी था बेशक वो इशारा उनका कितना ही रूहानी था अजीब था वो लेखक भी, अजीब था वो पाठक भी पढ़ता था वो शेर बहुत और लिखता ख़ूब कहानी था बेहिस था जब तक वो हर ग़म से ही आज़ाद रहा होते ही हस्सास मगर वो हर उलझन का ज्ञानी था जितना धन लुटाता था वो लूट भी लेता था उतना फिर भी ख़ुश थे लोग उससे वो भी कैसा दानी था उसने ही तो पाठ पढ़ाया दुनिया को मोहब्बत का रस्म-ए-वफ़ा में आज न कलतक कोई उसका सानी था जब तक मुझसे दूर था वो मिलने को बेताब रहा आते ही बांहों में लेकिन शर्म से पानी-पानी था ! अक्सर उसकी बातों में मैं गुम हो जाता था 'जेहद' लहजा ही उस ज़ालिम का इतना ही रूमानी था !!            #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

उसके दिल में नाचे है बस हिंदू-मुस्लिम..

Image
      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 उसके दिल में नाचे है बस हिंदू-मुस्लिम वो सीखे सिखलाये है बस हिन्दू-मुस्लिम उसकी फिर बकवास सुने है क्यों ये दुनिया हर पल जब वो अलापे है बस हिंदू-मुस्लिम टुकड़े-टुकड़े देश को करके छोड़ेगा वो क़दम-क़दम पे बांटे है बस हिंदू-मुस्लिम लगता है दुनिया में और कोई धरम नहीं है हर सू क़यामत ढाए है बस हिंदू-मुस्लिम !! सारे मुद्दों को छोड़ के अब तो सियासत में इक मुद्दा ही छाए है बस हिंदू-मुस्लिम !! सारे धर्मों को जैसे कर के नज़र अंदाज़ आपस में टकराए है बस हिंदू-मुस्लिम ! ज़ह्न में मेरे कभी-कभी ये आता है 'जेहद' कितने ज़ेहन में दौड़े है बस हिंदू-मुस्लिम           #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

रावण सा बना फिरता है आदमी..

Image
   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 रावण सा बना फिरता है आदमी आदमी पे सितम करता है आदमी मस्अले भी हल करता है आदमी और उलझनें भी धरता है आदमी रखता है ये हद में ख़ुद को तो कभी हद से भी कभी गुज़रता है आदमी छूना चाहता है ये तो बुलंदियां और गिरने से भी डरता है आदमी छुक्के छुड़ाता है कभी तो दुश्मनों के कभी दोस्तों से ही डरता है आदमी !! आदमी ही पाता है सारी दौलतें ख़ाक भी छाना करता है आदमी काम की ये बात तो करता ही है फ़ालतू बात भी करता है आदमी आती है मौत तो एक बार ही कई बार भी कभी मरता है आदमी दुनिया में वो 'जेहद' क्या कर नहीं सकता हौसलों से जो गुज़रता है आदमी !!           #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

सबको धमकी देकर वो धमकाया करता है..

Image
    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 सबको धमकी देकर वो धमकाया करता है दुनिया की धड़कन को वो बढ़वाया करता है कैसा है वो, जिसको दोस्त बनाया करता है दुश्मन कह कर फिर उसको पिटवाया करता है दुनिया पर इल्ज़ाम तो वो लगवाया करता है लेकिन अपना जुर्म कहाँ दिखलाया करता है ऊपर से तो गीत मिलन के गाता फिरता है अंदर से लेकिन सबको लड़वाया करता है पागल लोगों के लड़ने पर हैरत कभी न करना पागल ही तो पागल से टकराया करता है !!  फ़ौजी ताक़त भी है ज़रूरी क्यों कि ज़माने में जंग लड़ने का दिन भी कभी तो आया करता है शोला शबनम, बिजली बारिश, आंधी और तूफ़ान मौसम भी क्या रंग हमें दिखलाया करता है !! अच्छा कुछ होते-होते और बुरा हो जाता है देखो ऐसा दिन भी कभी तो आया करता है वो बुल्डोजर भी और बिल्डर भी है वही 'जेहद' जिसको चाहे उजाड़ के वो बसवाया करता है !            #जावेेद_जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

कुछ ऐसा करो जनाब..

Image
  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कुछ ऐसा करो जनाब गुलशन हो शादाब !! किसी में आग नहीं कोई है बे-आब !! नैनों से पी लो गर न मिले शराब हर पल रहता है शायर दिल बेताब इक जाए तो दूजा फिर ले आए अज़ाब दहशत की दुनिया कब जाने हो ग़रक़ाब मस्ती में कोहराम उलझन में आदाब तू मेरी मैना मैं तेरा सुर्ख़ाब कब आएगा अपने क़दमों में महताब कुछ ऐसा लिखो 'जेहद' हो जाए जो नायाब !!           #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

पल में हँसता-रोता हूँ..

Image
   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 पल में हँसता-रोता हूँ मैं भी जैसे बच्चा हूँ सुर-तालों पे खिलता हूँ मैं भी तो इक नग़मा हूँ मेरा लिखा या मुझको पढ़ मैं भी तो इक क़िस्सा हूँ उर्दू-हिंदी अपनी है मैं दोनों का अपना हूँ नींद उड़ी है बरसों से मैं जागा सा रहता हूँ प्यार की वादी से होके फिर घूम आया सहरा हूँ सुख-दुख और मोहब्बत का मिला-जुला इक नग़मा हूँ मुझको कौन डराएगा मैं तो रब से डरता हूँ सस्ती ख़ुशी है मेरी 'जेहद' ग़म का लेकिन मँहगा हूँ             #जावेेद_जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

मेहर-ओ-वफ़ा की बात कहाँ अब..

Image
   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 मेहरो-वफ़ा की बात कहाँ अब प्यार की वो बरसात कहाँ अब दिन में है जब डर का डेरा चैन भरी फिर रात कहाँ अब प्यार की बैठे बात करें हम हैं ऐसे हालात कहाँ अब दिन तो कट गया उनसे मिलके गुज़रे गी ये रात कहाँ अब तुमसे मिलूँ मैं खुलके जानम इतनी मिरी औक़ात कहाँ अब दुनिया में शायर हैं अब भी अच्छे उनमें मगर वो बात कहाँ अब जिनका दिवाला निकल चुका है वो देंगे ख़ैरात कहाँ अब सब जिसकी इज़्ज़त करते हों ऐसी कोई भी ज़ात कहाँ अब बातें बहुत होती हैं लेकिन असली मुद्दे की बात कहाँ अब बस ज़ह्र उगलते रहते हैं उनमें भले कलमात कहाँ अब आज के ग़म में दिल है उलझा यादों की बारात कहाँ अब सब जिस पे भरोसा करते रहे वो भी सबके साथ कहाँ अब सच पूछो तो दुनिया में 'जहद' बस है मौत, हयात कहाँ अब           #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

तू बेवफ़ा न हो जाए..

Image
  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 तू बेवफ़ा न हो जाए मुझसे जुदा न हो जाए चाहत सनम ये अपनी भी बे-रास्ता न हो जाए !! ये चाँदनी जो फैली है काली घटा न हो जाए इतना पिला न आँखों से मुझको नशा न हो जाए शहरे-वफ़ा को बचाओ तुम शहरे-जफ़ा न हो जाए !! इसमें न घोलिए ज़हर क़ातिल फ़ज़ा न हो जाए आजा कि तेरे आने में जीवन फ़ना न हो जाए इतना तुझे जो पूजूँगा तू भी ख़ुदा न हो जाए शोहरत मिली है जिसको भी सनकी हवा न हो जाए !! मुझको 'जेहद' सताओ ना चाहत हवा न हो जाए !!           #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

प्यार के मीठे बोल सुनाकर..

Image
    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 प्यार के मीठे बोल सुना कर सबको तू मदहोश किया कर दुनिया की तस्वीर बना कर अम्न-ओ-अमाँ के रंग भरा कर मेरी ग़ज़ल को लब पे ला कर जब जी चाहे मुझसे मिला कर प्यार-वफ़ा की सारी बातें बैठ गए हम लोग भुला कर कल तेरा भी अंत तो होगा घर-घर के सब दीप बुझा कर शायद मैं भी रोता फिरता रख लिया लेकिन दर्द दबा कर तेरी ही आग न तुझ तक पंहुचे ये भी दुआ में मांग लिया कर ! माना जीना भूल चुकी है दुनिया मगर तू हँसके जिया कर उसके ग़म को मैंने भुलाया अपने ग़म में शिद्दत ला कर अपनी ग़ज़ल में 'जेहद' हमेशा मीठा सा संगीत भरा कर !!            #जावेेद_जेेेहद  करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

ये दौर-ए-क़यामत, लानत है..

Image
   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 ये दौर-ए-क़यामत, लानत है ये क़त्ल-ओ-ग़ारत, लानत है जिसमें भरे हों  चोर-लुटेरे ऐसी तो हुकूमत, लानत है बर्बाद जहाँ को  करने वाले शस्त्रों की तिजारत, लानत है जनता से ताक़त  पाकर जो करे उनपे ही कसरत, लानत है ये इल्म-ओ-हुनर के ज़माने में ये बढ़ती जहालत, लानत है ! इक ही तो मोहब्बत की थी बस उसमें भी फ़ुर्क़त, लानत है !! माँ, बेटी, बहन, मासूमों की जो लूटे इज़्ज़त, लानत है ! जो ज़ालिम हो, हत्यारा हो फिर उसकी इज़्ज़त, लानत है सेवा तो इबादत है लेकिन सेवा में रिश्वत, लानत है ! जिस फ़न से कुछ न हासिल हो उसमें तो महारत, लानत है !! जब शायर भूखे मरते हों तो ऐसी शोहरत, लानत है प्यार की दौलत लुटती जाए नफ़रत में बरकत, लानत है दुनिया में आग लगाने वाली ये गंदी सियासत, लानत है अल्ला ने जिसे अशरफ़ माना उसमें ही बदअत, लानत है !! जिस देश में भूखे-नंगे 'जेहद' उस देश की दौलत, लानत है             #जावेेद_जहद Mob_ 9772365964

चमन, झील, सागर, भँवर देख लेना..

Image
   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 चमन, झील, सागर, भँवर देख लेना मोहब्बत है क्या चीज़ कर देख लेना बुरा क्या है उनका इधर देख लेना हाँ अच्छा नहीं है उधर देख लेना ! कभी हमने देखा था हसरत से तुमको मगर अब ज़रा तुम इधर देख लेना !! मोहब्बत में पहला क़दम तुमने देखा मिरा आख़िरी भी सफ़र देख लेना !! मिरी रूह रहती है इक जैसे बेकल मिरी जान इक बेख़बर देख लेना ! मिरी हर ग़ज़ल पे हैं सब दाद देते मिरी हर ग़ज़ल बा-असर देख लेना समझ आगया है ये फ़न अब तो इतना सिखाएंगे अब ये हुनर देख लेना !! हमें तो यक़ीं है 'जेहद' मेहनतों पर ख़ुशी इससे पाएंगे हर देख लेना !!           #जावेेद_जहद (जमशेद अख़्तर) Mob_ 9772365964

दिल हो न जाए तेरा बेक़रार देखना..

Image
   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 दिल हो न जाए तेरा बेक़रार देखना हम मिल रहे हैं आज बार बार देखना लुट जाते कितने लोग हैं हुसूल-ए-इश्क़ में पड़ता है दामनों को तार तार देखना !! मौसम बदलता रहता है जहाँ में रोज़ ही हर वक़्त मिलता है किसे बहार देखना ? कितनी हसीन यादें मेरी खो गईंं कहीं क्या-क्या बने है अब जी यादगार देखना बर्बाद कर रहे हैं इस की ख़ूबसूरती इस मुल्क से है कितना किसको प्यार देखना अब क्या है कहना सुनना सारा राज़ खुल गया अब देखना है जो भी ख़ुद ही यार देखना !! मंज़िल कोई भी मिलती है यूँ ही नहीं 'जेहद' पड़ता है राह में बहुत ग़ुबार देखना !!            #जावेेद_जेेेहद (जमशेद अख़्तर)

अब न होगा किसी से प्यार मुझे..

Image
   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 अब न होगा किसी से प्यार मुझे डस गया ऐसा एक यार मुझे !! अब न महफ़िल में तू पुकार मुझे अब है तन्हाइयों से प्यार मुझे !! मेरा दिन भी है रात तेरे बिना इस अँधेरे से तू उबार मुझे !! मैं अगर न करूँ तुम्हारी क़दर करदे फिर तू भी दरकिनार मुझे मैं तिरे दिल-जिगर पे छा ही चुका अब ज़रा रूह में उतार मुझे !! फ़िक्र दुनिया की भर गई मुझमें अब कहाँ है कोई क़रार मुझे !! छा गया अब तो मैं भी अम्बर पे इस बुलंदी से तू उतार मुझे !! मैं निकल आया तुझसे दूर बहुत अब 'जेहद' बैठ के पुकार मुझे !             #जावेेद_जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

प्यास धरती बुझाती रही रात भर..

Image
     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 प्यास धरती बुझाती रही रात भर बारिशों में नहाती  रही  रात  भर एक मुद्दत से था उसको तो इंतेज़ार वो मोहब्बत लुटाती रही रात भर !! रक़्स होता रहा, जाम चलते रहे जान महफ़िल सजाती रही रात भर लम्बी होती रही, बनती जाती रही इक ग़ज़ल तो जगाती रही रात भर थी ख़ुशी-ग़म की ऐसी कहानी लिए वो हँसाती-रुलाती रही रात भर !! दिन में उसको तो रहता नहीं कुछ ख़याल ख़ुद को अक्सर सजाती रही रात भर !! ऐसा लगता वो छोड़ेगी करके ख़तम यूँ फ़साना सुनाती रही रात भर !! सुब्ह होते ही जाने कहाँ छुप गई रौशनी जो कि आती रही रात भर रात ही के लिए वो बनी थी 'जेहद' फ़स्ल जो लहलहाती रही रात भर             #जावेेद_जेेेहद Mob_ 9772365964

इतने बरस से कैसे हो तुम..

Image
  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इतने बरस से कैसे हो तुम ? अब भी भूखे-नंगे हो तुम ! पहले किसी ने बेचा तुमको अब तो ख़ुद ही बिकते हो तुम तुम में अगर ईमान नहीं तो समझो ऐसे-वैसे हो तुम !! तुम न कोई पीर, पयम्बर और न इंसाँ जैसे हो तुम इक रोज़ वसूले जाओगे समझो किसी के पैसे हो तुम हैवाँ जैसे बनते क्यूँ हो ? जब कि इंसाँ जैसे हो तुम तुम्हें कितना जगाया जाता है पर कभी न जागे समय से हो तुम वो जैसे चाहें तुमको नचाएं उनके आगे तो बच्चे हो तुम कितना अच्छा लिखते थे पहले अब उलटे-सीधे लिखते हो तुम करते हो शरारत फिर भी 'जेहद' बड़े ही प्यारे लगते हो तुम !!            #जावेेद_जेेेहद Mob_ 9772365964

दिल को लगे हैं छलने लोग..

Image
  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 दिल को लगे हैं छलने लोग पराए जैसे अपने लोग !! उसने तरक़्क़ी ख़ुद पाई और लगे सब जलने लोग सुनके उसकी तक़रीरें  लगते हैं ख़ूब बहकने लोग चोर, लुटेरे, हत्यारे अब तो लगे हैं बनने लोग इन ऊँचे क़द वालों में कैसे-कैसे बौने लोग हरगिज़ ज़ेब नहीं देते अच्छे पद पे गंदे लोग मीठी बातें करते-करते लगते हैं आग उगलने लोग अक्सर तब आता है तरस लगते हैं जब मरने लोग !! आए थे यहाँ क्या करने और लगे क्या करने लोग 'जेहद' किसी का कोई नहीं और किसी के कितने लोग              #जावेेद_जेेेहद Mob_ 9772365964

इक शम्मा और परवाने दो..

Image
  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक शम्मा और परवाने दो ! तब तो एक को जल जाने दो  बहुतों को मारा है उसने अब उसको भी मर जाने दो सरहद को पंछी क्या जानें बिन रोके आने-जाने दो !! बहुत दिनों की प्यास है साक़ी पैमाने पर पैमाने दो !! सर बहुत चढ़ाया है उनको अब दुश्मन को इतराने दो तुम बाद में दूरी कर लेना ज़रा पहले पास तो आने दो जो जिनकी यारी चाहे हैं उन्हें उनके ही याराने दो जो बर्बादी के सामाँ हैं अब नष्ट उन्हें हो जाने दो लग जाएंगे होश ठिकाने ज़रा पहले होश तो आने दो हम सबका स्वागत करते हैं जो आता है उसे आने दो !! दिल जिसको चाहे ख़ूब 'जेहद' उसपे ही इसे लुट जाने दो !!             #जावेेद_जेेेहद Mob_ 9772365964

शाम-सवेरे आकर्षण..

Image
  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 शाम-सवेरे आकर्षण रूप का तेरे आकर्षण चाहे जहाँ भी मैं जाऊँ तेरा ही घेरे आकर्षण ! तेरी हल्की अदा में भी कितने घनेरे आकर्षण सारे ही जग के तुझमें तो आन बसे रे आकर्षण !! भाते हैं सबको ही तेरे सांप-सपेरे आकर्षण ! दिन में कुछ और रातों को रैन बसेरे आकर्षण !! कैसे न बहके 'जेहद' ये, जब तेरा ले फेरे आकर्षण !!            #जावेेद_जेेेहद Mob_ 9772365964

आँख जब उनसे लड़ी तो बोला मेरा दिल मुझे..

Image
       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 आँख जब उनसे लड़ी तो बोला मेरा दिल मुझे शक्ल बचने की नज़र आती है अब मुश्किल मुझे हाए ये ताख़ीर क्यों है, किस लिए है ये झिझक अच्छे तीर अंदाज़ हो, पल में करो घायल मुझे देख कर मुझको तिरा ये मुस्कुराना है ग़ज़ब खींचने लगता है तेरी ओर फिर ये दिल मुझे आबरू रह जाए मौला बारगाह-ए-इश्क़ में आज चाहत ले चली है रूबरू क़ातिल मुझे अब ख़ुदा जाने वहाँ भी चैन आए या नहीं ले चला है सू-ए-सहरा इज़्तिराब-ए-दिल मुझे जी में आता है कि सारी दुनिया को ही छोड़ दें मुस्कुरा कहता है जब वो चल 'जेहद' ले चल मुझे              #जावेेद_जेेेहद    Mob_ 9772365964

इस दिल का लपकना देख ज़रा कुछ तुझसे किनारा हो न सका..

Image
           #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इस दिल का लपकना देख ज़रा कुछ तुझसे किनारा हो न सका अब कैसे कहूँ मैं ऐ हमदम कि तू तो हमारा हो न सका !! सोचा था हमारे जीवन में जो तुम न मिले तो और सही अफ़सोस तुम्हारे बाद मगर कोई और हमारा हो न सका तू ने तो कहा था हम न मिले तो मर जाएंगे हम हमदम वो कैसा था तिरा मरना कि जो तुझको गवारा हो न सका हरे-भरे इक पेड़ से लिपटी, इक बेल दिवानी रहती थी पर आई ख़िज़ाँ जब उसपे तो फिर उसका गुज़ारा हो न सका खा-खा के थपेड़ा मौजों का ग़रक़ाब हुए हम बिल-आख़िर मँझधार ही वो कुछ ऐसी थी कम मौज का धारा हो न सका ये कैसी है तेरी जंग 'जेहद', ये कैसी तेरी लड़ाई है कि इतने बरस से बहता लहू क्यों ठंडा तुम्हारा हो न सका                #जावेेद_जेेेहद     Mob_ 9772365964