जो अपनी मोहब्बत पे क़ुर्बान नहीं होगा..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 बहरे हज़ज मुसम्मन अख़रब मक़फ़ूफ़ मक़फ़ूफ़ मुख़न्नक सालिम मफ़ऊल मुफ़ाईलुन मफ़ऊल मुफ़ाईलुन 221 1222 221 1222 जो अपनी मोहब्बत पे क़ुर्बान नहीं होगा वो शख़्स कभी भी तो कमरान नहीं होगा जो राह-ए-मोहब्बत में डर जाए क़दम रखते वो होगा कोई बुज़दिल, बलवान नहीं होगा । कुछ ऐसी दिवारें हैं इक बार जो उठ जाएं फिर दिल का किसी सूरत मीलान नहीं होगा ऐ यार तिरी सूरत, सीरत न सेहत अच्छी जा तुझ पे कोई दिल से क़ुर्बान नहीं होगा फिर उसने मसल डाला इक फूल सी गुड़िया को हैवान कोई होगा, इंसान नहीं होगा !! ये काले घने बादल जो छाए हैं बरसों से इस रुत को बदलना तो आसान नहीं होगा क़ातिल सी निगाहों से देखा है 'जहद' उसने वो अपना कोई होगा, अंजान नहीं होगा ।। ~जावेद जहद