दो ग़ज़ल--हर तरफ़ ही भर गए... फ़तह मेरी..
1.. ग़ज़ल 💐 हर तरफ़ ही भर गए देखिए जफ़ा परस्त ख़्वाब बन के उड़ गए मानिए वफ़ा परस्त बेहया वो हो गए जिनकी शान थी हया अब किसे बताएं हम दोस्तो हया परस्त वो भी खेलने लगे अब लहू की होलियाँ दस्त जो कि थे बहुत मानिए हिना परस्त जाने किस ख़ुदा का ये हुक्म है कि लड़ मरो जाने किस ख़ुदा को ये मानते ख़ुदा परस्त कुछ मिरी ख़ताओं ने सर मिरा झुका दिया वर्ना मैं भी था ग़ज़ब का कभी अना परस्त मैं वफ़ा-शिआर था फंस गया सो जाल में बच गया वो इसलिए, वो तो था दग़ा परस्त बात जो भी आती है दिल में बोल देता है वर्ना ये 'जेहद' ज़रा भी नहीं गिला परस्त 2.. ग़ज़ल 💐 फ़तह मेरी कभी उसकी हैं सारी ही ख़ुशी वक़्ती मज़ा कोई नहीं अबकी लदे हैं फल झुकी टहनी हसीं बातें हैं सब उनकी सियासत है वही बिगड़ी ये दुनिया है ग़ज़ब रब की 'जेहद' मुश्किल बहर छोटी !! #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार