न अच्छी कोई उदासी, न कोई डर अच्छा..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 न अच्छी कोई उदासी, न कोई डर अच्छा हो अज़्म दिल में तो होता है हर सफ़र अच्छा वो जिसकी राह में चलती हो सिर्फ़ मक्कारी सफ़र ही अच्छा है उसका न हमसफ़र अच्छा वहाँ है दहशत-ओ-नफ़रत, यहाँ मोहब्बत है कि तेरे शह्र से है मेरा ये नगर अच्छा !! कोई तो अच्छा सा एज़ाज़ भी मिले उसको कि वाक़ई में जो रखता है इक हुनर अच्छा सुधार थोड़ा कहीं पे ये करके क्या होगा करो कुछ और भी तो रोग तुम दिगर अच्छा दुआ, दवाओं से, हिकमत से एक काम बना समझ में आए न किसका हुआ असर अच्छा न अच्छा हुस्न, न इख़लाक़ और न ख़सलत थी अजब वो शख़्स था, जो बन गया मगर अच्छा वो आँख खुलते ही झटके से जैसे टूट गया जो ख़्वाब देखा था कल मैंने रात भर अच्छा तुम्हारे साथ भी अच्छा करेगी ये दुनिया करोगे दुनिया का तुम जो 'जहद' अगर अच्छा #जावेद_जहद