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अंधी ग़ज़ल, बहरी ग़ज़ल, लूली ग़ज़ल, लँगड़ी ग़ज़ल..

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          ताज़ा ग़ज़ल अंधी ग़ज़ल, बहरी ग़ज़ल, लूली ग़ज़ल, लँगड़ी ग़ज़ल इस दौर में बनने लगी अब हर तरह की ही ग़ज़ल !! इतनी तरह की बन चुकी हैं ग़ज़लें अबतक दोस्तो जैसी ज़मीं में भी कहो लगती है वो तरही ग़ज़ल !! वो जैसे उस रक़्क़ासा के थी नाम लिक्खी जा चुकी हर शाम उसके साथ में लहरा के वो थिरकी ग़ज़ल वैसी ही कहता है वो जिसका होता है जैसा मिज़ाज कोई कहे संजीदा और कोई कहे बहकी ग़ज़ल !! मैं जैसा था वैसा रहा कितने ही सालों-साल तक पर ग़ज़लों को करता रहा छोटी कभी लम्बी ग़ज़ल अच्छा कहा दुख-दर्द को, ख़ुशियों-बहारों को बुरा समझो कि मैं कहता रहा बस उल्टी-सीधी ही ग़ज़ल जबसे वो फ़िल्मों में गया जाने उसे क्या हो गया पहले वो अदबी कहता था, अब लिखता है फ़िल्मी ग़ज़ल अबतक ये जितने दौर से गुज़री तो गुज़री शान से सागर की लहरों की तरह लहराती ये लहरी ग़ज़ल ख़ून-ए-जिगर से लिखते हैं सारे सुख़नवर ही इसे अल्ल करे मक़बूल हो बे-इंतिहा सब की ग़ज़ल ! कितनी उड़ानेंं भरके तो बनती ग़ज़ल है इक 'जहद' पर वो पड़ी रहती कहीं, वो भी कहीं उड़ती ग़ज़ल !!                  जावेेद जहद

उनकी आँखें मय भरी और मिरा दीवाना दिल..

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            ताज़ा ग़ज़ल उनकी आँखें मय भरी और मिरा दीवाना दिल पीते-पीते पी गया  सारा ही  मयख़ाना दिल !! उनसे मिलते ही नज़र हाए ये दीवाना दिल मुझसे ही लो हो गया  मेरा ये बेगाना दिल  महफ़िलों में आज फिर कैफ़-ओ-मस्ती के लिए ढूँढता है आँखों से  पीने का पैमाना दिल !! मस्ती में लहराता था , गीत गाता था बहुत दुख लगा तो भूल बैठा  ये सारा गाना दिल काम अपना आँखों से  कर गुज़रता है ये तो सोचो क्या-क्या जाने है ये भी तो कर जाना दिल देखने में छोटा सा  ये तो लगता है 'जहद' है हक़ीक़त में मगर इक बड़ा तहख़ाना दिल                   जावेेद जहद