हो जाती उल्टी है सभी हिकमत कभी कभी..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 हो जाती उल्टी है सभी हिकमत कभी कभी चाहो ख़ुशी तो मिलती मुसीबत कभी कभी !! जिनसे वफ़ा की आस हो उनकी ही ओर से होती है दर्द-ओ-ग़म की इनायत कभी कभी कितनों की सोई सोई जगाने से दोस्तो सो जाती है ये और भी क़िस्मत कभी कभी जाहिल तो करते रहते हैं ना-ज़ेबा हरकतें क़ाबिल भी करने लगते जहालत कभी कभी अच्छाइयों की आस में बदकारियों में ही लगती है होने ख़ूब ही बरकत कभी कभी अक्सर दिखाते रहते हैं वो तुमको अपना बल तुम भी दिखा दिया करो ताक़त कभी कभी !! धरती-अकाश, पानी-हवा मिलके एक साथ लोगों पे ख़ूब ढाते हैं आफ़त कभी कभी !! हो जाती सारी दुनिया है जैसे तहस-नहस ऐसा भी क़ह्र ढाती है क़ुदरत कभी कभी ! क़िस्मत ख़राब हो तो बिगड़ता है सारा काम कुछ भी न काम आती है मेहनत कभी कभी ऐसा भी दौर आता है नफ़रत लिए हुए रह जाती है ये नाम की मिल्लत कभी कभी क़ानून-ओ-क़ायदे को 'जहद' रखके ताक़ पर होती है ख़ूब गंदी सियासत कभी कभी !! जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार