सँभल-सँभल के बहुत ही कलाम करता हूँ..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
सँभल-सँभल के बहुत ही कलाम करता हूँ
मैं हर किसी का बड़ा एहतिराम करता हूँ
सुबह मैं उठते ही पहला ये काम करता हूँ
कि नेक रूहों को दिल से सलाम करता हूँ
समेट लेता हूँ दुनिया के दर्द को दिल में
सुकून दिल का मैं दुनिया के नाम करता हूँ
उसी घड़ी मिरा एहसास जाग उठता है
मैं जब कभी भी ग़लत कोई काम करता हूँ
मिरे सुख़नवरो, मुझपे भी ग़ौर फ़रमाना
कि तेरी दुनिया में मैं भी क़याम करता हूँ
मिरे भी शेरों पे होने लगी हैं तंक़ीदें
चलो जी मैं भी अब अपना भी नाम करता हूँ
मिरे क़दम तो कभी भी बहक नहीं सकते
मैं अपने दिल को जो हर पल लगाम करता हूँ
सब अपनी राह चले, महफ़िलें तमाम हुईं
चलो 'जेहद' कोई अब मैं भी काम करता हूँ
~ जावेद जहद
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