किसी को खेत, किसी को मकां ज़ियादा है..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 किसी को खेत, किसी को मकां ज़ियादा है किसी के वास्ते बस आसमां ज़ियादा है !! कोई शरीफ़, कोई नेक है, कोई सीधा किसी को आन, किसी को गुमां ज़ियादा है कोई भी बात छुपाने से छुप नहीं सकती ज़माना पहले से अब राज़दां ज़ियादा है ज़रूर उसको भी लूटा है उसके अपनों ने कि उसके लब पे तो आह-ओ-फ़ुग़ां ज़ियादा है मिरे लिए तो सिवा साक़ी के वो कुछ भी नहीं मगर वो मुझपे तो कुछ मेहरबां ज़ियादा है !! जिधर को मिलती हैं बेचैनियां बहुत ज़्यादा ज़माना आज उधर ही रवां ज़ियादा है !! घना ये शह्र है, चारों तरफ़ यहाँ तो 'जहद' हवा में ज़ह्र भरा सा धुआं ज़ियादा है !! ~जावेद जहद