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किसी को खेत, किसी को मकां ज़ियादा है..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 किसी को खेत, किसी को मकां ज़ियादा है किसी के वास्ते बस आसमां ज़ियादा है !! कोई शरीफ़, कोई नेक है, कोई सीधा किसी को आन, किसी को गुमां ज़ियादा है कोई भी बात छुपाने से छुप नहीं सकती ज़माना पहले से अब राज़दां ज़ियादा है ज़रूर उसको भी लूटा है उसके अपनों ने कि उसके लब पे तो आह-ओ-फ़ुग़ां ज़ियादा है मिरे लिए तो सिवा साक़ी के वो कुछ भी नहीं मगर वो मुझपे तो कुछ मेहरबां ज़ियादा है !! जिधर को मिलती हैं बेचैनियां बहुत ज़्यादा ज़माना आज उधर ही रवां ज़ियादा है !! घना ये शह्र है, चारों तरफ़ यहाँ तो 'जहद' हवा में ज़ह्र भरा सा धुआं ज़ियादा है !!       ~जावेद जहद

नशा था,जल्वा-ए-दिलदार था, कल शब जहाँ मैं था..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 नशा था, जल्वा-ए-दिलदार था, कल शब जहाँ मैं था मिरी बाँहों में मेरा यार था, कल शब जहाँ मैं था !! दहकते थे ज़मीन-ओ-आसमां, वो आतिशी शब थी अजब वो शह्र शोलाबार था, कल शब जहाँ मैं था ! कली, ख़ुश्बू, हिना, फल, फूल उसके पास थे सबकुछ वो जैसे इक हसीं गुलज़ार था, कल शब जहाँ मैं था !! था आँखों से अयां कुछ भी, न होंठों से बयां कुछ भी कोई इंकार न इक़रार था, कल शब जहाँ मैं था !! जिगर घायल, नज़र पागल, ये मेरा दिल भी बेकल था अजब वो दो निगह का वार था, कल शब जहाँ मैं था जिसे मैंने कभी सपने में भी देखा नहीं यारो वहाँ वो हुस्न का बाज़ार था, कल शब जहाँ मैं था झपटता था वहाँ हर मर्द ज़न पे कुछ 'जहद' ऐसे क़यामत होने का आसार था, कल शब जहाँ मैं था          ~जावेद जहद