चाँद हो तुम तो मेरी बला से..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 चाँद हो तुम तो मेरी बला से कम नहीं मैं भी मस्त घटा से सुर्ख़ हो तुम जो हुस्न-ओ-अदा से सब्ज़ हूँ मैं भी इश्क़-ओ-वफ़ा से डरते हो क्यों तुम काली घटा से मेरी पनाह में ठंडी हवा से !! आओ चलो तारों में चलें हम इश्क़ को अपने सजाने ज़या से तेरा बदन जो छू कर गुज़रे ख़ूब लगे वो हवा तो सबा से इश्क़ की दुनिया अब न रही वो पूछ लो अपनी-अपनी वफ़ा से मरना है फिर तो 'जहद' क्या डरना ज़ुल्म-ओ-सितम से, जौर-ओ-जफ़ा से ~ जावेद जहद