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इक कली फिर खिल उठी बोसे लिए..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 इक कली फिर खिल उठी बोसे लिए और गुल सी   बन गई बोसे लिए !! एक बोसे  के लिए हम  सोचते उसने झटके में  कई बोसे लिए रख दिया क्या हमने उसपे प्यार से वो जबीं  सोई  रही बोसे लिए !! बोसा लेते ही वो सपनों की परी लाज से फिर उड़ गई बोसे लिए इस क़दर बोसों से उसको प्यार था वो बिदा जब भी हुई बोसे लिए !! क्या मुसीबत है वो सोई बोसे से और उठी भी तो उठी बोसे लिए गालों पर क्यों छाप लेकर आते हो फिरता है  ऐसे कोई बोसे लिए ? मीठे-मीठे लग रहे हो तुम बड़े आ रहे हो क्या अभी बोसे लिए साथ हम तो  झूमे-नाचे  प्यार में और कभी झगड़े, कभी बोसे लिए दुनिया वालों ने लब-ओ-रुख़सार क्या कितने ही क़दमों के भी बोसे लिए !! नाज़ुकी को देख कर उसकी 'जहद' जब लिए तो मख़मली बोसे लिए !!        ~जावेद जहद

आप दिल अपना मुझको बना लीजिए..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐 आप दिल अपना मुझको बना लीजिए अपने सीने में मुझको  छुपा  लीजिए । आपके प्यार का मैं ही तो ख़्वाब हूँ अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिए आप हँस दें तो फ़स्ल-ए-बहाराँ हँसे ज़ेर-ए-लब ही सही मुस्कुरा लीजिए मेरे अश्आर हैं आप ही के लिए इनको अपने लबों पे सजा लीजिए कुछ हसीनों की है मुझपे क़ातिल नज़र अपनी पलकों में मुझको छुपा लीजिए मुझको दे दीजिए अपने रंज-ओ-अलम और चैन-ओ-सुकूँ सब मिरा लीजिए ।। मिलना चाहें जो मुझसे कभी आप तो मेरी ग़ज़लों से मेरा पता लीजिए ।। दिल हमारा दुखाने से क्या फ़ायदा हम ग़रीबों के दिल की दुआ लीजिए अब तो आज़ाद पंछी हैं हम देश के बेजा सब बंदिशों को हटा लीजिए । ये ग़ज़ल मेरी क्या देगी तुमको 'जहद' आप पढ़के इसे बस मज़ा लीजिए ।।       ~जावेद जहद

ख़बर आई है इक ऐसी बहुत बेकार होली में..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 बहरे हज़ज मुसम्मन सालिम मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन 1222  1222  1222  1222 ख़बर आई है इक ऐसी बहुत बेकार होली में जिसे सुन हो गया सारा जहाँ बीमार होली में लहर ये दूसरी तो पहले से भी ज़्यादा घातक है ज़रा तुम बचके रहना दोस्तो इस बार होली में हुई बेरंग ये दुनिया, लगेगा क्या परब अच्छा कि चाहे लाख करलो रंगों की बौछार होली में यहाँ सब मर रहे हैं फ़िक्र से दिन-रात घुट घुट के वहाँ वो कर रहे बस अपना ही प्रचार होली में था पहले ही से सन्नाटा, ये अब तो और गहराया कभी देखा नहीं इतना बुरा बाज़ार होली में ।। मनाते हैं इसे अच्छे से सारे ही तो अच्छे लोग मचाते हैं बड़ा कोहराम पर बदकार होली में बड़ा दिलकश नज़ारा होता है वो तो मोहब्बत का लगा के रंग होता है शुरू जो प्यार होली में ।। 'जहद' इस आपदा का कुछ तो हल्का होगा दर्द-ओ-ग़म कि दारू, भांग, गांजा जम के ले तू मार होली में ।।        ~जावेद जहद

ये सच है तू ही सनम मुझपे मरने वाला है..

        ताज़ा ग़ज़ल 💐 बहरे मुजतस मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन 1212  1122  1212  22 ये सच है तू ही सनम मुझपे मरने वाला है मिरी वफ़ा को मगर तूने मार डाला है !! ये दिल दिवाना तिरे ग़म में कबका मर जाता बहुत मनाया है इसको, बहुत सँभाला है !! बड़ी ही तल्ख़ी है मीठा सा कुछ उछालो इधर हवा में देखो न मैंने भी कुछ उछाला है !! दिया है यार ने मेरे जो दिल को दाग़-ए-सितम अजीब रंग है वो, नीला है न काला है !! कहो तो  याद में तेरी  गुज़ार दें  यूँ ही मगर यूँ जीने सी भी कुछ न होने वाला है तू होके दूर भी  मुझसे  तो पास है मेरे कि मेरे दिल में तिरी यादों का उजाला है सभी को भाता है जो ख़ूब अपनी ग़ज़लों में मोहब्बतों का वही रास्ता निकाला है !! ये दौर अच्छा बुरा है या चाहे जैसा भी कि इस अँधेरे में भी फैला कुछ उजाला है अजीब हाल है दुनिया का कुछ भी होश नहीं न जाने हश्र 'जहद' कैसा होने वाला है !!        ~जावेद जहद

कितना हसीन-ओ-दिलकश ये देश है हमारा..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐 221 2122 221 2122 कितना हसीन-ओ-दिलकश ये देश है हमारा आए न गर्दिशों में इसका कभी सितारा ।। जंगल पहाड़ सागर, क्या कुछ यहाँ नहीं है क़ुदरत ने इसको जैसे फ़ुर्सत में है सँवारा हिंदू हों सिख इसाई, या जाट या मराठा हो जाता है यहाँ पर सबका ही तो गुज़ारा लड़ जाते हैं कभी हम आपस में यूँ तो यारो लेकिन बहुत है हम में सचमुच में भाईचारा इतना है प्यार हमको इस सरज़मीं से यारो इसके लिए हमें तो मरना भी है गवारा ।। अशरफ़ बना के हमको भेजा है जब ख़ुदा ने अब ख़ुद बनें बुरे तो है ये बड़ा ख़सारा ।। हो जाए कोई ग़लती और उसका दिल में दुख हो कोशिश रहे कि वैसा न हो कभी दुबारा ।। दिल और दिमाग़ रौशन करके 'जहद' ये अपना बन जाओ तुम भी कोई आकाश का सितारा ।     ~जावेद जहद