मैं रांझा वो अब मिरी हीर नहीं..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 मैं रांझा वो अब मिरी हीर नहीं आँखों में कोई तस्वीर नहीं !! तन उनसे मिला, मन उनसे मिला पर उनसे मिली तक़दीर नहीं !! मैं जो चाहूँ ख़्यालों में लाऊँ ख़्यालों पर मिरे ज़ंजीर नहीं न जाने किधर ये जाए जहाँ इस जहाँ का अब कोई मीर नहीं ये दिल ये जिगर सब उनका हुआ अब अपनी कोई जागीर नहीं !! हम उनको तो सर पे बिठाते हैं वो बदलते मगर तक़दीर नहीं ! अब चारों तरफ़ वो होने लगा जिसकी तो हसीं तस्वीर नहीं ऐ दुनिया को दुख देने वाले बहता है तिरा क्यों नीर नहीं इस फ़न में अकेला है एक 'जेहद' कोई पैदा भी होगा 'मीर' नहीं !! ~ जावेद जहद