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Showing posts from July, 2021

चश्म-ए-गिर्या से तो दामन को भिगोना होगा..

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        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 चश्म-ए-गिर्या से तो दामन को भिगोना होगा अपने आमाल ही ऐसे हैं कि  रोना होगा !! बिखरे जाते हैं बशर नफ़रतों की आँधी में फिर इन्हें प्यार के धागे में पिरोना होगा !! भर गई बदनुमा दाग़ों से ये दुनिया इतनी सबको ही मिलके इसे ख़ूब ही धोना होगा ख़ुशनुमा चाहते हो देखना गर दुनिया को ख़्वाब कुछ ख़ुशनुमा आँखों में संजोना होगा क्या तलातुम है मोहब्बत के समंदर में सनम पार होगी मिरी कश्ती कि डुबोना होगा ? उस करम को भला मैं कैसे भुला पाऊंगा जो करम तेरी निगाहों का सलोना होगा ! चाहता हूँ कि हर इक चीज़ यहीं मिल जाए सोचता हूँ कि मगर सब यहीं खोना होगा ! फ़िक्र क्या करते हो हर वक़्त ज़माने वालो बस वही होगा जो तक़दीर में होना होगा ! दिन ये कहता है कि बस भागते ही जाओ 'जेहद' रात कहती है कि ऐ जान तुझे सोना होगा !!             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

दिल मस्ती में लहराए, लहराने को क्या कहिए..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 दिल मस्ती में लहराए, लहराने को क्या कहिए और ये कभी घबराए,  घबराने को क्या कहिए नागिन सी नहीं हैं जो, नागिन की तरह वो भी हैं राहों में बलखाएं,  बलखाने को क्या कहिए दिन-रात तड़पते हैं  वो बांहों में आने को आ जाएं तो शर्माएं,  शर्माने को क्या कहिए छुप-छुप के लुभाते हैं जो दूर खड़े मुझको गर पास वो आजाएं, आजाने को क्या कहिए वो हुस्न पे अपने ही, अपनी ही निगाहों को हैं डाल के इतराएं, इतराने को क्या कहिए माशूक़ के कूचे में गर वस्ल न हो मुमकिन तो और कहीं लग जाएं, लग जाने को क्या कहिए मुझको मिरी जानाँ ने  जाते हुए समझाया ये दर्द-ए-जफ़ा सहना, सह जाने को क्या कहिए जीवन की हिकायत में ख़ुशियों की शिकायत क्या ग़म खाना ही बेहतर है, ग़म खाने को क्या कहिए देखा न कभी तूने  बीमार-ए-मोहब्बत को मरता है 'जेहद' तेरा, मर जाने को क्या कहिए             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

उनकी नज़र का जाम पिए जा रहा हूँ मैं..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 उनकी नज़र का जाम पिए जा रहा हूँ मैं कितना बड़ा ये काम किए जा रहा हूँ मैं छलकी हुई शराब को कैसे मैं छोड़ दूँ पीने की चीज़ है तो पिए जा रहा हूँ मैं सबकुछ लुटा के इश्क़ की लज़्ज़त उठाइये जैसे कि मुस्कुरा के लिए जा रहा हूँ मैं !! इतना है उनसे इश्क़ कि दामन को वो मिरे बस चाक कर रहे हैं सिए जा रहा हूँ मैं !! दिल में भरा है मेरे तो बस एक ही का इश्क़ सजदा भी एक ही को किए जा रहा हूँ मैं !! दुनिया मुझे चलाएगी क्या अपनी राह पर दुनिया को अपनी राह लिए जा रहा हूँ मैं कुछ साफ़ जब नहीं हैं सवालात उनके तो क्यों उनका फिर जवाब दिए जा रहा हूँ मैं दुनिया से क़िस्से लेके उन्हें शेर में सजा दुनिया को फिर से सौंप दिए जा रहा हूँ मैं अपनी तो शायरी से 'जेहद' मुतमइन हैं सब हैरां भी हर किसी को किए जा रहा हूँ मैं !!             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

साक़ी मुझे दिखा दे मयख़ाना ज़िंदगी का..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 साक़ी मुझे दिखा दे मयख़ाना ज़िंदगी का होने लगा है ख़ाली  पयमाना ज़िंदगी का मय वस्ल की इनायत में देर कर न इतनी यूँ ही छलक न जाए पयमाना ज़िंदगी का कैसा ये दौर आया,  कैसा ये ग़म है छाया क्यों सोज़ में है डूबा अफ़साना ज़िंदगी का मुझको तू देखकर अब ऐ जान यूँही मत जा तुझ पे ही मर मिटा है दीवाना ज़िंदगी का !! किसको नहीं है उलफ़त इस ज़िंदगी से यारो सब को ही देखता हूँ मस्ताना ज़िंदगी का !! सजदे हज़ार हों या लाखों करें 'जेहद' हम होगा अदा न हरगिज़ शुकराना ज़िंदगी का                जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

गली में आपकी किस रोज़ इज़्दिहाम नहीं..

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        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 गली में आपकी किस रोज़ इज़्दिहाम नहीं बताओ किस की नज़र है जो सू-ए-बाम नहीं तुम्हीं कहो कि किया किसने एहतराम नहीं या कौन आया तुम्हारे कोई भी काम नहीं ? तुम्हारे वास्ते क्या-क्या लुटा दिया मैंने मगर कभी भी लिया तूने मेरा नाम नहीं कहूँ मैं क्या कि मुझे हो गया वहीं सकता हुआ जो घर में बुला के वो हम-कलाम नहीं जहाँ भी चाहा वहीं तुझको पा लिया मैंने ये माना हमने कि यकजा तिरा क़याम नहीं हुआ जो रुख़ का तिरे और ज़ुल्फ़ का पागल फिर उसकी सुब्ह नहीं और उसकी शाम नहीं कहो जो कहना है मौक़ा मिला है तुमको 'जेहद' कि आज तुमसे है ना-ख़ुश ये ख़ुश-ख़िराम नहीं           जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

तेरे वादे पे ऐतबार किया..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 तेरे वादे पे ऐतबार किया और कुछ भी न तूने यार किया सब तो वैसा है जैसा था पहले कम कहाँ तूने ख़ल्फ़िशार किया तुम हमें प्यार भी नहीं देते हमने तो तुमपे सब निसार किया हम तो तन्हा थे चैन से लेकिन तेरी उल्फ़त ने बेक़रार किया वस्ल ने तेरी आँखों की मय दी हिज्र ने तेरे बादा-ख़्वार किया मैं तो ज़र्रा हूँ जानते हो 'जेहद' फिर सितारों में क्यों शुमार किया            जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

लगा हुआ है सभी को वो वरग़लाने में..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 लगा हुआ है सभी को वो वरग़लाने में ज़रूर आग लगा देगा वो ज़माने में !! पड़े हो तुम जो हमें ख़ाक में मिलाने में लगे हैं हम भी तुम्हें अर्श पे उठाने में !! बस एक झटके में दुनिया तबाह कर डालो ये जान देते हो क्यों छोटे बम गिराने में ? अगर वो पहले से महफ़ूज़ हैं तो फिर अक्सर ये चीख़ उठती है क्यों उनके आशियाने में ? अजब उदासी का आलम है चाहे देखो जिधर ख़ुशी, ये क्या हुआ है तेरे कारख़ाने में ? ये ज़िंदगी तो है लाखों जतन का गहवारा क़ज़ा का क्या है, चली आती है बहाने में मिरा तो ख़ुद ही तड़पता है दिल सभी के लिए मज़ा मिलेगा मुझे किसका दिल दुखाने में ? हमें दहाड़ रहे हैं 'जेहद' वही अब तो दबे जो रहते थे हमसे किसी ज़माने में न फेरो उनके इरादों पे तुम 'जेहद' पानी समझते हैं जो भलाई ही डूब जाने में !!            जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

किया जिस वक़्त मैंने हाल-ए-दिल उनसे बयां अपना..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 किया जिस वक़्त मैंने हाल-ए-दिल उनसे बयां अपना तो हँस के बोले वो होता नहीं इस पर  गुमां अपना !! यक़ीं मानो इसे तुम मेरा या मानो गुमां अपना मैं जाते-जाते दे दूँगा तुम्हें सारा बयां अपना !! ये धरती सारी अपनी है, ये सारा आसमां अपना न पूछो ऐ जहाँ वालो, ठिकाना है कहाँ अपना !! सितम होगा लगाना उस बुत-ए-बेपीर से दिल का कभी वो दुश्मन-ए-ईमां न होगा मेहरबां अपना !! कहीं पर जाके क्या बस जाएं अब हम सारे ही यारो यहाँ अब छिन रहा है रोज़ ही चैन-ओ-अमां अपना किधर जाएं तिरा दर छोड़ के मेरे ख़ुदावंदा ज़मीनें मुझसे रूठी हैं, ख़फ़ा है आसमां अपना हमारी शायरी अपनी है, अपनी ही ज़मीं की है यही अपनी निशानी है, यही है अब निशां अपना 'जेहद' भर जाएंगी दुनिया में इतनी नफ़रतें इक दिन न था इस बात पर हरगिज़ यक़ीं अपना गुमां अपना              जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

जो देखूँ रुख़-ए-दिलरुबा चुपके चुपके..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 जो देखूँ रुख़-ए-दिलरुबा चुपके चुपके तो चुपके से कहदूँ कि आ चुपके चुपके मिरा मुद्दआ सुनके अफ़सोस ज़ालिम अदू से करे मश्विरा चुपके चुपके !! नक़ाब उनके रुख़ से न जाने हटे कब न जाने छटे कब घटा चुपके चुपके !! कि गुल होते नाज़ुक हैं पहली खिलन के ज़रा छेड़ बाद-ए-सबा चुपके चुपके !! जवानी ने उनकी, अदाओं ने उनकी किया एक महशर बपा चुपके चुपके अभी तो मोहब्बत का आग़ाज़ है ये अभी तो जपो दिलरुबा चुपके चुपके किया शोर कोई न कोई तमाशा 'जेहद' मैं तो शायर बना चुपके चुपके            जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

सियासत में क्या-क्या न मक्कारियाँ हैं..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 सियासत में क्या-क्या न मक्कारियाँ हैं भरी इसमें सारी ही अय्यारियाँ हैं !! किसी शख़्स ने दिल करोड़ों के जकड़े ख़ुदाया ये कैसी गिरफ़्तारियाँ हैं !! हुआ कुछ भला जब न लोगों का उनसे तो अब जान देने की तैयारियाँँ हैं !! न जाने ज़माना अब आएगा कैसा बहुत ही मुझे ये तो बेज़ारियाँ हैं !! मुझे पूछते हैं वो बज़्म-ए-अदू में छुपी इसमें उनकी तो मक्कारियाँ हैं 'जहद' अब कहीं भी सुकूँ न मिलेगा कि चारों तरफ़ अब तो दुश्वारियां हैं अभी कुछ हैं सोए, अभी कुछ हैं जागे अभी तो अधूरी सी बेदारियाँ हैं !! अगर लुत्फ़ आता नहीं है तो समझो कि आधी-अधूरी सी फ़नकारियाँ हैं हमारी ग़ज़ल में भरा क्या नहीं है नदी चाँद सूरज, शजर झाड़ियाँ हैं बहादुर समझते हैं ख़ुद को बहुत जो 'जेहद' कुछ तो उनकी भी लाचारियाँ हैं            जावेेद जहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

किसी से लड़ी जो नज़र पहले पहले..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 किसी से लड़ी जो नज़र पहले पहले किया उसने छलनी जिगर पहले पहले उसी पर वफ़ाओं के बदले जफ़ा हो जो देता है नज़राना सर पहले पहले ये क्यों ना तबाही मचाएंगे यारो ये आए हैं ज़ालिम इधर पहले पहले बहुत तेज़ है एक चैनल अजब सा जो लेता है मेरी ख़बर पहले पहले ये अबरू, ये मिज़गाँ, ये तिरछी निगाहें किया सबने ज़ख़्मी जिगर पहले पहले बिगड़ के शब-ए-वस्ल उसने दुआ की इलाही मिरी हो सहर पहले पहले !! ये मर-मर के रचना गढ़ी है जो इतनी बता कौन होगी अमर पहले पहले ? वही है ज़माने में असली फ़सादी जो छेड़े है झगड़ा बशर पहले पहले न जाने मोहब्बत का दुनिया में यारो लगाया था किसने शजर पहले पहले ज़रा ग़म न करना 'जेहद' प्यार में तू लगे चोट दिल पर अगर पहले पहले             जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

न आए तंग क्यों कोई जी ऐसी ज़िंदगानी से..

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         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 न आए तंग क्यों कोई जी ऐसी ज़िंदगानी से कि फैली हर तरफ़ बेचैनी है बढ़ती गिरानी से कभी शायद ही आई हो ये इतनी तेज़ बाज़ारी हुई जाती है ख़ाली जेब पैसों की रवानी से !! सियासत ख़ाक में सारे ज़माने को मिला बैठी अजब क्या बैर करलें लोग ऐसी हुक्मरानी से हुजूम-ए-शह्र ने ख़ुद को दिवाना कर लिया ऐसा नहीं है ख़ौफ़ कुछ उनको बला-ए-नागहानी से ! ख़ुदाया मैं भी क्या उलफ़त करूँ ये आज के जैसी न आएं हाथ वो मेरे अगर चे शादमानी से !! कभी जी चाहता है सौंप दूँ उनको 'जेहद' सबकुछ कभी डरता हूँ जाने क्यों मैं ऐसी मेहरबानी से !!                #जावेेद_जेेेहद करन सराए, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

तिरछी-तिरछी तिरी निगाह रहे..

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    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 तिरछी-तिरछी तिरी निगाह रहे मेरी हरदम ज़बां पे आह रहे ! ग़ैर मुमकिन है उसको आए तरस चाहे हालत मिरी तबाह रहे !! दिल में ठहरा है तेरा ग़म ऐसे जैसे सर पे कोई गुनाह रहे !! तू मिरा फ़िक्र मंद हो जाए दिल मिरा तेरा ख़ैर ख़्वाह रहे आज ऐसी पिला मुझे साक़ी फिर न पीने की कोई चाह रहे मैं भी शायर हूँ शानदार बहुत सारा आलम मिरा गवाह रहे वक़्त ऐसा भी आए जीवन में दिल को अपने न कोई चाह रहे काश ऐसा हो मेरा दिल न जले तेरी दुनिया भी ना तबाह रहे !! लाख दुख हो हमारे जीवन में ज़िंदगी से सदा निबाह रहे !! हर तरफ़ ही हमारे शेरों की हर घड़ी ख़ूब वाह-वाह रहे इस जहाँ से ख़ुदाया जाते वक़्त इस जहाँ की न कोई चाह रहे ! ज़िंदगी का मज़ा तो तब है 'जेहद' साथ जब कोई रश्क-ए-माह रहे !              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

अब फ़स्ल-ए-गुल क्या आएगी, बर्बाद गुलिस्तां कर बैठे..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 अब फ़स्ल-ए-गुल क्या आएगी, बर्बाद गुलिस्तां कर बैठे मजबूर थे अपनी फ़ितरत से  सो काम ये शैतां कर बैठे कुछ ऐसे भी आशिक़ होते हैं जो उनके वस्ल की चाहत में कुछ हो न सका जब उनसे तो ख़ुद चाक गिरेबां कर बैठे ऐ महू-ए-हैरत देख ज़रा, दीवार ने दर ख़ुद खोल दिया तुम कितने बहादुर बनते थे, फिर आज क्यों ज़िंदां कर बैठे ? ये रस्म-ए-मोहब्बत ख़ूब रही, ग़ैरों से मिले और हमसे छुपे अब लौट के वो क्या आएंगे, जब कूच का सामां कर बैठे है वादी-ए-उलफ़त ख़ूब हसीं, ये उनके हुस्न का जादू है वो जब भी आए बन-ठन के, हर सम्त बहारां कर बैठे ये हैरानी की दुनिया है, हर वक़्त यहाँ हैरानी है हम उनसे कभी हैरान हुए, कभी उनको हैरां कर बैठे हर शै की क़ीमत बढ़ने लगी, कोई बात नहीं लेकिन अफ़सोस अनमोल थीं जितनी भी चीज़ें, हम उनको अरज़ां कर बैठे कितने ही बड़े उस्तादों ने तो कर दिया रौशन शेर-ओ-सुख़न पर हम भी 'जेहद' इस दुनिया में कुछ और चराग़ां कर बैठे !!              #जावेेद_जेेेहद करन सराए, सासाराम, बिहार

अपनी दुनिया जाम में है और न मयख़ाने में है..

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     # ताज़ा_ग़ज़ल 💐 अपनी दुनिया जाम में है और न मयख़ाने में है नफ़्स मतलब हर घड़ी ही अपने समझाने में है  चैन आशिक़ को न सहरा में न वीराने मेंं है कुछ सुकूँ है भी अगर तो उसको मयख़ाने में है भूल तू इसको न साक़ी कर 'जेहद' पर भी नज़र आज ये भी आ गया लो प्यासा मयख़ाने में है !! सेल्फ़ी लेकर क्या दिखाते हो मुझे तस्वीर तुम तेरी तो तस्वीर मेरे दिल के काशाने में है !! इश्क़ के दरबार में मिलते हैं ऐसे ही ख़िताब इसलिए तो क़ैस भी मशहूर दीवाने में है !! फ़स्ल-ए-गुल आएगी फिर से गर ख़िज़ाँ है दोस्तो ये चमन बदला नहीं जो अब भी वीराने में है !! मश्ग़ला गर ढूंढते हो दिल को बहलाने का तो तुम मिरा क़िस्सा सुनो, हर रंग अफ़साने में है ख़ुश्क सी ये तेरी ग़ज़लें किसको भाएंंगी 'जेहद' दुनिया तो इस वक़्त सारी नाचने-गाने में है !!             जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

अच्छे नहीं हैं आपके मुझपे करम अभी..

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         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 अच्छे नहीं हैं आपके मुझपे करम अभी दिल मेंं भरे हुए हैं जी ज़ुल्म-ओ-सितम अभी तुमने दिखाई हैंं जो अदाएं सनम अभी लाखों निसार होंगे ख़ुदा की क़सम अभी समझेगा किस तरह वो कि होता है प्यार क्या रक्खा है राह-ए-इश्क़ में उसने क़दम अभी !! लगता है कितना अच्छा ये कहना भी यार का छेड़ा जो तूने हम भी करेंगे सितम अभी !! मुझको जगा-जगा के वो कहते हैं बार-बार क्या होगा और में जी, जो मुझमें है दम अभी लगता है प्यार करने के अब आए मेरे दिन लेकिन वो जाने है कहाँ मेरा सनम अभी !! आते ही तुम तो लौट गए अपने देश में इतनी भी जल्दी क्या थी ये मेरे सनम अभी महफ़िल से हो सके तो 'जेहद' दूर ही रहो होता नहीं है सब पे वहाँ तो करम अभी !!           जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

कबतक छुपाने से ये छुपेगी नज़र की चोट..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कब तक छुपाने से ये छुपेगी नज़र की चोट हो जाएगी कभी तो अयाँ इस जिगर की चोट लहरा रही है ज़िंदगी मस्ती में रात-दिन जिस दिन से हमने खाई है तिरछी नज़र की चोट हाए रे महजबीन ये बिगड़ें तो सर चढ़ें सहमें तो मुस्कुरा के लगाएं गुहर की चोट मस्ती में जब भी याद मुझे उनकी आ गई घबरा के घर से निकले लगी संग-ए-दर की चोट अर्ज़-ए-तमन्ना सुनके वो ऐसे भड़क उठे जैसे कि दे उक़ाब कोई बाल-ओ-पर की चोट फेंका जो फूल सम्त-ए-अदू उसने नाज़ से आके इधर लगी मुझे हाए उधर की चोट ! सच है कि हो ही जाता है मज़बूत वो बहुत खा लेता है जो शख़्स यहाँ दुनिया भर की चोट लेने न देगी चैन उमर भर ये क्या हमें रह-रह के उठ रही है 'जेहद' क्यों जिगर की चोट            जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

अगर वो मिले ना तो मर जाएंगे..

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      #ताज़ा-_ग़ज़ल 💐 अगर वो मिले ना तो मर जाएंगे मगर बुज़दिली ये न कर जाएंगे यही आरज़ू है, यही जुस्तजू जिधर जाओगे तुम, उधर जाएंगे ज़रा छेड़ के हमको देखे कोई बुरे से बुरा हम भी कर जाएंगे अभी वो हैं बिगड़े मगर देखना कभी ना कभी तो सुधर जाएंगे समझ में न आया उन्हें लफ़्ज़ जो तो समझाने ज़ेर-ओ-ज़बर जाएंगे वो लौटेंगे मिलके अगर झूमते तो मस्ती में हम भी तो घर जाएंगे पिलाया न हमको जो तूने 'जेहद' तो जाम-ए-नज़़र आह भर जाएंगे             जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

साक़ी है नया, ख़ुम नई, मयख़ाना नया है..

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         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 साक़ी है नया, ख़ुम नई, मयख़ाना नया है मयकश नए तो हाथ में पैमाना नया है !! आज अपना भी अंदाज़ ये रिंदाना नया है हर घोंट में क्या सजदा-ए-शुकराना नया है होने को तो होती है हमेशा ही तजल्ली पर आज तो इक जलवा जुदागाना नया है संभलेगा दिवाना भला क्या जोश-ए-जुनूँ में ज़ंजीर नई है न ये ज़िंदाना नया है !! है ख़ौफ़ न हो जाए कहीं सुनके वो पागल इतना ही भयानक मिरा अफ़साना नया है हर वक़्त मगन रहता है वो इसलिए उसमें है उसकी परस्तिश नई, बुतख़ाना नया है कहते हैं मुझे देख के वो प्यार से यारो हट जाओ नहीं ख़ैर कि दीवाना नया है उनकी भी 'जहद' है जो अगर बोर कहानी तो इनका भी कुछ भी नहीं अफ़साना नया है              #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

फ़िज़ा में रंग भरे, नज़र में रंग भरे..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 फ़िज़ा में रंग भरे, नज़र में रंग भरे तिरा ही रंग-ए-सेहर जिगर में रंग भरे तुझे जो देख सनम नज़र जिधर भी करे तो आए बाग़ नज़र उधर में रंग भरे !! ख़ुदाया दंग करे तिरी कमाल सिफ़त ग़ज़ब तू बर्ग-ओ-समर, शजर में रंग भरे मैं हर्फ़-हर्फ़ कहूँ रुबाई, गीत, ग़ज़ल तो हर्फ़-हर्फ़ मिरी सतर में रंग भरे ! यही तो आदमी का असल में हुस्न है जी कि अपने प्यार का बस दिगर में रंग भरे  कि भर तो देते हैं सब ग़ज़ल में रंग कई पर उसके कैसे कोई असर में रंग भरे ? ये दिल की रंगिनी भी रहेगी कितने दिनों चुभेंगे ढंग कभी नज़र में रंग भरे !! असल में हुक्मरां तो वही ही अच्छा 'जेहद' फ़ज़ा-ए-अम्न का जो दहर में रंग भरे !!             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

सच अगर सारा ख़्वाब हो जाए..

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    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 सच अगर सारा ख़्वाब हो जाए ज़िंदगी लाजवाब हो जाए !! मुश्किलों में अगर हो आसानी काम फिर क्यों ख़राब हो जाए शोला-शोला है इस क़दर ही वो शोला छूले तो आब हो जाए !! दिल बहुत रोज़ से नहीं बहका चलो थोड़ी शराब हो जाए !! मय जो हो जाए सारी पानी तो और अगर जल शराब हो जाए आप जिस ख़्वाब में चले आएं कितना अच्छा वो ख़्वाब हो जाए इस क़दर याद अब न आओ तुम दिल को ना इज़्तिराब हो जाए ! जब ये सारा जहान सोया है कैसे फिर इंक़लाब हो जाए नेक हो जाए ये जहाँ सारा या तो फिर सब ख़राब हो जाए अब सभी को वो चाहिए जिससे जवाँ फिर से शबाब हो जाए !! क्या यही अस्र-ए-नव की है मंशा जीना-मरना अज़ाब हो जाए !! कुछ है मेरी भी शायरी उम्दा कुछ मिरा भी निसाब हो जाए काम ऐसा करो 'जेहद' कोई आप अपना जवाब हो जाए               जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

जिसे तुम दर्द समझे, हम उसे दिल की दवा समझे..

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        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 जिसे तुम दर्द समझे, हम उसे दिल की दवा समझे ग़लत कहता हूँ तो मुझसे अभी मेरा ख़ुदा समझे न समझा दिल ने मेरे इश्क़ का अंजाम क्या होगा कोई समझाए तो कहता है ये मेरी बला समझे !! वो कर के बेवफ़ाई कहते हैं जब बा-वफ़ा हैं हम ज़रा बतलाए कोई ख़ुद को फिर क्या बा-वफ़ा समझे बहुत दिन बाद उनकी याद आई है हमें फिर भी न जाएंगे, वहाँ जाकर ख़ुदा जाने वो क्या समझे वो मेरा कौन है, किस नाम से उसको पुकारूं मैं समझ कर भी न जो भी मेरे दिल का मुद्दआ समझे तुम्हारी नफ़रतों से ये परेशां हो गई इतनी कि तेरे प्यार को भी अब तो दुनिया इक दग़ा समझे अमीरी में भी जिसको चैन न आए 'जेहद' तो फिर वो धन पे ख़ाक डाले और फिर ख़ुद को रिहा समझे            जावेेद जेेेहद करन सराए, सासाराम, बिहार

मोहब्बत की दुनिया बसाई गई है..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 मोहब्बत की दुनिया बसाई गई है मगर आग उसमें लगाई गई है !! सियासत कभी भी न सुधरेगी यारो सियासत ही ऐसी बनाई गई है !! सभी रो रहे हैं न जाने ये कैसी मुसर्रत की दुनिया बसाई गई है सुलाया गया है कहीं हसरतों को कहीं सोई क़िस्मत जगाई गई है न इतराओ इतना किसी बात पर भी हर इक शय ही फ़ानी बताई गई है ! उसे देखने से मुझे क्या मिलेगा ? जिसे देखने को ख़ुदाई गई है !! मुझे भी पिला दे ज़रा सी वो साक़ी जो कल प्यार से मय बनाई गई है कि उनके नशे का तो आलम न पूछो निगाहों से जिनको पिलाई गई है !! सरेआम क्यों लड़खड़ाता है ज़ाहिद कहीं मुफ़्त मय क्या पिलाई गई है ? मुझे भी सुनाओ 'जेहद' बात रंगीं बता कैसे मस्ती मनाई गई है ??              जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

दिल-जिगर से और जिस्म-ओ-जान से..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 दिल-जिगर से और जिस्म-ओ-जान से चाहता हूँ मैं तुझे ईमान से ।। ज़िंदगी जीना था चाहा जिसके साथ मार डाला उसने मुझको जान से ।। यूँ छलकती मय है उनकी बज़्म में हम हुए जाते हैं वाँ बेजान से ।। ऐसी कुछ है परदे वाली बात जी हम जिसे कहते नहीं नादान से । सर्द-मुहरी देख कर तूफ़ान की रह गए हम तो बहुत हैरान से । कब दशा बदले गी मेरे देश की पूछता हूँ मैं सियासतदान से ? भूल जाते क्यों हो अपना वादा तुम ये ख़ता हो जाती है या जान से ? इससे बढ़कर कोई भी पूजा नहीं प्यार और उलफ़त करो इंसान से फड़फड़ाता है 'जेहद' क्यों दिल मिरा फिर ये मिलने जाएगा क्या जान से ?            जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

फ़स्ल-ए-गुल है, मौसम-ए-बरसात है..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 फ़स्ल-ए-गुल है, मौसम-ए-बरसात है दौर में साग़र भी है, क्या बात है ।। मेरा हमदम मेरे ही जो साथ है ये तो बेहद हैरतों की बात है । हिज्र है, मैं हूँ, अँधेरी रात है ये भी तो जी क़िस्मतों की बात है मय पियो तो बारिशों में भीग के अच्छी ये बरसात की सौग़ात है दर्द-ए-आशिक़ पे हँसे जाते हो क्यों आपके हँसने की भी क्या बात है । जिस जगह चाहो लड़ाओ इश्क़ तुम ये भी क्या चोरी-छुपे की बात है ।। लूट लो नवख़ेज़ी में सारा मज़ा दिन मज़े का है मज़े की रात है कौन रोकेगा किसी को इससे अब नाच-गानों की तो अब बरसात है लाख मैं कंगाल हूँ तो क्या हुआ पास मेरे दौलत-ए-ख़्यालात है । बू-ए-ज़ुल्फ़-ए-अम्बरी का है असर दर्द-ए-सर जो अब 'जेहद' दिन-रात है              जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार