जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..

       1..ग़ज़ल 💐

ग़ज़ल की दुनिया में भी अब बहार है कि नहीं
सभी को कल की तरह इससे प्यार है कि नहीं

मैं शायरी तो बहुत उम्दा करता हूँ लेकिन
मिरा भी शायरों में कुछ शुमार है कि नहीं

कि मैं भी कर सकूँ जिससे कि मार दुनिया में
मिरी भी शायरी में ऐसी धार है कि नहीं !!

करम किया जो मुझे तूने दिल दिया लेकिन
मिरी भी तुम पे सनम जाँ निसार है कि नहीं

वो बेपनाह मोहब्बत में डूबे रहने का
नशा तो टूट चुका, अब ख़ुमार है कि नहीं

क़रार दिल को मिलेगा ज़रूर ऐ यारो
हाँ पहले देख तो लो बेक़रार है कि नहीं

जो सारी दुनिया को करदे दुखों से दूर 'जहद'
किसी को इतना बड़ा इख़्तियार है कि नहीं !
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     2..ग़ज़ल 💐

दिल-ए-बेदार कोई अहले-नज़र है कि नहीं
किस से पूछें कि कोई ऐसा बशर है कि नहीं

छल-कपट, राहज़नी, ज़ुल्म-ओ-सितम, ख़ूँरेज़ी
ये भी दो-रंगीं सियासत का समर है कि नहीं

जिस तरफ़ देखिए बाज़ार-ए-हवस है यारो
और ईसार-ओ-वफ़ा हममें सिफ़र है कि नहीं

अम्न-ओ-इंसाफ़ की लुटती हुई दुनिया से उदास
आज इस देश का इक एक बशर है कि नहीं !!

अपना चेहरा भी बदल जाए तो हैरत कैसी
आज बदली हुई दुनिया की नज़र है कि नहीं

किसकी मंज़िल है कहाँ किसको पता है ये 'जहद'
सबके ही सामने इक अंधा सफ़र है कि नहीं !!
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        3..ग़ज़ल 💐

ग़ुंडागिरी, इस्मतदरी, धोखाधड़ी, आवारगी
क्या सब शराफ़त मिट गई और रह गई आवारगी

आला जो ओहदेदार हैं, बनते जो इज़्ज़तदार हैं
करने लगे हैं आजकल वो भी बड़ी आवारगी !!

कुछ भी किसी का बिगड़ा न ज़ाया किसी का कुछ हुआ
हमने तो यारो दुनिया में बस ऐसी की आवारगी !!

कुछ तो जगह है मौन की और कुछ जगह हंगामों की
लगती नहीं है हर जगह ये तो भली आवारगी !!

मैंने इसे जब छोड़ के ओढ़ी शराफ़त की रिदा
तो हुलिया मेरा देख के हँसने लगी आवारगी

ये कैसे-कैसे ख़्यालों में बस उड़ते रहना हर घड़ी
क्या इक तरह से है नहीं ये शायरी आवारगी ?

ये मस्तियाँ, मदहोशियाँ, गुस्ताख़ियाँ, शैतानियाँ
इनकी ही जैसे है 'जहद' ये भी कड़ी आवारगी
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          4..ग़ज़ल 💐

मिरा दिल मुझे हरदम तराना सुनाता है
मोहब्बत भरा उसमें  फ़साना सुनाता है

सुनाएंगे वो क्या महफ़िलों में हया वाले
कि ग़ज़लें तो ये मुझसा दिवाना सुनाता है

ग़ज़ल में सुनाता है हाँ क्या-क्या नहीं शायर
ग़ज़ल में वो बातों का ख़ज़ाना सुनाता है !!

रही न कोई इज़्ज़त, गिरे नामवर इतने
कि क्या-क्या नहीं उनको ज़माना सुनाता है

मगन रहता है इतना ये दिल तो मोहब्बत में
वो कहते हैं जब जाना तो आना सुनाता है

सुहाना-सुहाना हो ज़माना तो फिर सबकुछ
सुहाना-सुहाना ही सुहाना सुनाता है !!

'जहद' की कहानी को न समझो उसी की बस
ये क़िस्से तो यारो आलमाना सुनाता है !!
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       5..ग़ज़ल 💐

कभी आप भी मेरे घर आइए
मोहब्बत के प्यारे नगर आइए

मिरे प्यार का आपही ख़्वाब हैं
इन आँखों में मेरी उतर आइए

नज़र आने वाले मिरे ख़्वाब में
कभी सामने तो नज़र आइए !

मिलेगा वहाँ क्या ज़रा सोचिए
यहाँ प्यार है अब इधर आइए

किसी ख़ूबसूरत सफ़र पे चलें
है कश्ती वफ़ा की उतर आइए

सफ़र अब तो तन्हा ये कटता नहीं
मिरे प्यारे ऐ हमसफ़र आइए !!

मैं उड़ना सिखा दूँ उसी हाल में
अगर चाहे बे-बाल-ओ-पर आइए

बहुत सीधा-साधा है ये तो 'जहद'
मिरे पास तो बे-ख़तर आइए !!
            जावेेद जहद
करन सराय, सासाराम, बिहार

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