अपनी ही इस क़दर तू न बस देख-भाल कर..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 अपनी ही इस क़दर तू न बस देख-भाल कर औरों की भी ख़ुशी का तो फ़िक्र-ओ-ख़्याल कर जाती है गर तो जाए ख़ुशी न मलाल कर मिलता है ग़म जो रख ले उसी को सँभाल कर थोड़े में ख़ुश हो और तू कम में कमाल कर बच-बच के एक-एक क़दम इस्तेमाल कर ! नफ़रत से कोई आए तो तू रौंद दे उसे उलफ़त करे तो दे-दे कलेजा निकाल कर कुछ भी न मिल सके तुझे इंकार के सिवा न भूल से भी ऐसा किसी से सवाल कर ! जश्न-ए-बहार को भी तू कर दे कभी उदास और तू कभी ख़िज़ाँ में मुसर्रत बहाल कर ! शोहरत जो चाहिए तुझे दौलत लुटा 'जहद' अब कुछ न मिल सकेगा चवन्नी उछाल कर ~ जावेद जहद