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तुम्हारी क्या वफ़ा है, हम नहीं समझे..

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        ताज़ा ग़ज़ल तुम्हारी क्या वफ़ा है, हम नहीं समझे लहर,आंधी है क्या है, हम नहीं समझे ये सब कैसी अदा है, हम नहीं समझे मिलन में लब सिला है, हम नहीं समझे तुम्हारे भेद तो हैं  सारे ही न्यारे तुम्हारा रूप क्या है, हम नहीं समझे हमारी क्या लगन है, जानते हो तुम तुम्हारी चाह क्या है, हम नहीं समझे तड़पता है तुम्हारा दिल मिलन को जब क़दम फिर क्यों रुका है, हम नहीं समझे तुम्हें हम भूलना तो  चाहते हैं पर तुम्हीँ में दिल लगा है, हम नहीं समझे बहुत नज़दीक से देखा मगर फिर भी मोहब्बत क्या बला है हम नहीं समझे ये कैसा है सियासत का जहाँ यारो कि इसका धर्म क्या है, हम नहीं समझे किसी की लूट कर इज़्ज़त 'जहद' आख़िर किसी को क्या मिला है, हम नहीं समझे !!                   जावेेद जहद सहसरामी

मोहब्बत अब दिलों में इस तरह कम होती जाती है..

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          ताज़ा ग़ज़ल मोहब्बत अब दिलों में इस तरह कम होती जाती है  कि जैसे  धूप में ये ख़ुश्क  शबनम  होती  जाती  है ये कैसी  छिड़ गई है  हर तरफ़ ही  जंग दुनिया में बिछी जाती हैं लाशें, आँख पुर-नम होती जाती है तुम्हारे चाँद, सूरज  और सितारे  बुझते जाते हैं तिरी दुनिया भी क्या ग़म का ही आलम होती जाती है हमारी शक्ल से तुम जितनी नफ़रत करते जाते हो हमें उतनी मोहब्बत तुमसे जानम होती जाती है !! बस इक बचपन का मौसम होता है जी शादमानी का उमर बढ़ती है ज्यों ज्यों दफ़्तर-ए-ग़म होती जाती है  कोई आराम से  करता है शायर  शायरी कैसे यहाँ तो कुछ न कुछ तख़्लीक़ हरदम होती जाती है तरक़्क़ी करती जाती है 'जहद' ये देखिए जितनी ये दुनिया और भी जैसे जहन्नम होती जाती है !!                    #जावेेद_जहद

दिल-जिगर, जिस्म-ओ-जाँ, जबीं मासूम..

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             ताज़ा ग़ज़ल दिल-जिगर, जिस्म-ओ-जाँ, जबीं मासूम तुम हो जानाँ बड़ी हसीं मासूम !! चाँद, तारे, परिंदे, झील, कँवल कोई तुमसा लगे नहीं मासूम ! शोख़, चंचल, शरीर, ढीठ कहीं और नज़र आती हो कहीं मासूम तुमको मिलती जहाँ है मासूमी आओ चलते हैं हम वहीं मासूम ग़ुस्से में इन लबों को मत भींचो खेलती है हँसी  यहीं मासूम !! वो बड़ा ही नसीब वाला है जिसका दिलवर हो दिलनशीं मासूम आज ऐसे 'जहद' ये बदला रूप जैसे ये था कभी नहीं मासूम !!                  #जावेेद_जहद

यहाँ, वहाँ दिल-नज़र का मंज़र..

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              ताज़ा ग़ज़ल यहाँ, वहाँ दिल-नज़र का मंज़र मोहब्बतों के सेहर का मंज़र !! तिरी अदा तो है जैसे जानम क़दम-क़दम पे लहर का मंज़र हसीन ये भी लगे है कितना ख़िज़ाँ-रसीदा शजर का मंज़र नगर-नगर में, शहर-शहर में डगर-डगर में ग़दर का मंज़र तरह-तरह के ख़ुदा ये तेरे अजब-ग़ज़ब से बशर का मंज़र सँवर गया है या और यारो बिगड़ गया इस दहर का मंज़र शजर में अपने सजा रहा हूँ हसीं-हसीं से शजर का मंज़र छुपा-छुपा कुछ, अयाँ-अयाँ कुछ अजब है मेरे सफ़र का मंज़र !! बशर-बशर में 'जहद' अदावत नज़र-नज़र में शरर का मंज़र              जावेेद जहद

इश्क़ में डूबी नज़र का मंज़र..

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            ताज़ा ग़ज़ल इश्क़ में डूबी नज़र का मंज़र मस्त है ये तो सेहर का मंज़र रौशनी बिन ही चमकते तारे ख़ूब ये रब के हुनर का मंज़र रक़्स में ये तो है जाने कब से शाम-ओ-शब और सहर का मंज़र कितना वो प्यारा, सुहाना कितना भूले-बिसरे से सफ़र का मंज़र !! अपने तो फ़न में नज़र आता है मीठे-मीठे से समर का मंज़र !! सुर्ख़ हैं उनके कली, गुल, बूटे सब्ज़ है जिनके शजर का मंज़र आज है ऐसा तो कल क्या होगा फ़िक्र में डूबे बशर का मंज़र !! आज ये हाल 'जहद' है जग का चारों ही सिम्त शरर का मंज़र !!                जावेेद जहद

एक दिन मेरी ऐसी चढ़ी तेवरी..

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            ताज़ा ग़ज़ल एक दिन मेरी ऐसी चढ़ी तेवरी इक बनाई ग़ज़ल तो बनी "तेवरी" यूँ तो थी दिलनशीं सर से वो पैर तक पर मुझे उसकी अच्छी लगी तेवरी !! कल तलक तेवरों से भरे जो भी थे आज उनकी भी ठंडी पड़ी तेवरी ! लोग सारे ज़माने को कर देते ठीक पर न अबतक सही से चढ़ी तेवरी जिनकी रहती है ठंडी सितम के ख़िलाफ़ वो रहेगी  मरी की  मरी  तेवरी !! एक हीरो मरा तो हुआ क्या नहीं लोग भूखे मरे न चढ़ी तेवरी !! तुम न पूछो मिरी शायरी का मिज़ाज जाने कैसी है मेरी अभी तेवरी !! "तेवरी" जब लिखो तो रहे ये ख़याल हो विरोधों के रस से भरी  "तेवरी" ये ज़रूरी नहीं दिलनशीं हो 'जहद' चाँद-तारों से उनकी भरी तेवरी !!                जावेेद जहद

मत पूछिए ग़ज़ल से क्या-क्या बना लिया..

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            #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 मत पूछिए ग़ज़ल से क्या-क्या बना लिया इस फ़न से हर नज़र को अपना बना लिया मुश्किल सुख़न से होती हैं सबको उलझनें आसान इस लिए ही लहजा बना लिया !! सच बात लब पे आए अब कैसे दोस्तो दिल में तो झूट ने है डेरा बना लिया !! तुम भी तो हो गए हो इक हुक्म के ग़ुलाम हमने भी इक सदा को आक़ा बना लिया ! आपस के मस्अलों में ग़ैरों का दख़्ल क्यों ऐ दोस्त तूने ये क्या धंधा बना लिया ?? कुछ ऐसे शौक़ में अब लोगों ने डूब कर ख़ुद को है इक तरह से तन्हा बना लिया देते ही जा रहे हैं दुनिया को दर्द-ओ-ग़म दुनिया ने कैसा-कैसा नेता बना लिया !! छोड़ा 'जहद' किसी को तो छोड़ ही दिया रिश्ता बना लिया तो रिश्ता बना लिया !!                 जावेेद जहद

हम सेहतयाब न अब कोई दवा से होंगे..

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           #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 हम सेहतयाब न अब कोई दवा से होंगे अपने दुख दूर तो ग़ज़लों की ग़िज़ा से होंगे अब कोई साज़ भी हमको तो नहीं भाएगा हम तो पागल तिरी पायल की सदा से होंगे उनके पहलू की जगह होगी मिरा बाग़ हसीं और गेसू घने मुझपे तो घटा से होंगे !! तू अगर तोड़ गया प्यार भरा दिल तो बता हम ख़फ़ा तुझसे या तेरी वो जफ़ा से होंगे क्या कहें इश्क़ की वो पहली हवा कैसी लगी आप तो मिल ही चुके बाद-ए-सबा से होंगे !! हम तिरे पास तो रह कर भी सनम प्यासे हैं तुझसे हैं दूर जो कितने वो पियासे होंगे !! इस जहाँ से ये 'जहद' भर गया जो दिल मेरा फिर तो रिश्ते मिरे सारे ही ख़ुदा से होंगे !!               जावेेद जहद