तिरछी-तिरछी तिरी निगाह रहे..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 तिरछी-तिरछी तिरी निगाह रहे मेरी हरदम ज़बां पे आह रहे ! ग़ैर मुमकिन है उसको आए तरस चाहे हालत मिरी तबाह रहे !! दिल में ठहरा है तेरा ग़म ऐसे जैसे सर पे कोई गुनाह रहे !! तू मिरा फ़िक्र मंद हो जाए दिल मिरा तेरा ख़ैर ख़्वाह रहे आज ऐसी पिला मुझे साक़ी फिर न पीने की कोई चाह रहे मैं भी शायर हूँ शानदार बहुत सारा आलम मिरा गवाह रहे वक़्त ऐसा भी आए जीवन में दिल को अपने न कोई चाह रहे काश ऐसा हो मेरा दिल न जले तेरी दुनिया भी ना तबाह रहे !! लाख दुख हो हमारे जीवन में ज़िंदगी से सदा निबाह रहे !! हर तरफ़ ही हमारे शेरों की हर घड़ी ख़ूब वाह-वाह रहे इस जहाँ से ख़ुदाया जाते वक़्त इस जहाँ की न कोई चाह रहे ! ज़िंदगी का मज़ा तो तब है 'जेहद' साथ जब कोई रश्क-ए-माह रहे ! #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया