कहाँ-कहाँ का जी इसमें बयां नहीं मिलता..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐

कहाँ-कहाँ का जी इसमें बयां नहीं मिलता
किसी भी  दुनिया में ऐसा क़ुरांं नहीं मिलता !

यहाँ जो मिलती है नेमत, वहाँ नहीं मिलती
वहाँ जो मिलता है मेवा, यहाँ नहीं मिलता !

जो साथ है उसे ही साथ लेके चलते चलो
बिछड़ जो जाता है वो कारवां नहीं मिलता

सुकून-ओ-चैन की उम्मीद मत रखो कोई
ये शहर-ए-ग़म है, यहाँ तो अमां नहीं मिलता

वहाँ भी, जो है जगह मस्तियों की मौजों की
हर इक घड़ी तो ख़ुशी का समां नहीं मिलता

वो कैसी गुप्त जगह है, जहाँ से बरसों से
किसी का कोई भी राज़-ए-निहां नहीं मिलता

हवा में ज़ह्र यहाँ है 'जहद' वहाँ पे चलो
जहां पे गर्द-ओ-ग़ुबार-ओ-धुआं नहीं मिलता

        ~ जावेद जहद

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