वफ़ा में भी उनकी तो मक्कारियाँ हैं..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 वफ़ा में भी उनकी तो मक्कारियाँ हैं अनोखी, निराली ये अय्यारियाँ हैं किसी ज़ुल्फ़ ने दिल हज़ारों के जकड़े ख़ुदाया ये कैसी गिरफ़्तारियाँ हैं हुआ ज़ब्त जब दर्द दिल का न उनसे तो अब जान देने की तैयारियां हैं वफ़ा करते होंगे वो अब जाने किस से बहुत ही मुझे ये तो बेज़ारियाँ हैं अगर चे किसी को न भाए तो समझो तुम्हारी अधूरी सी फ़नकारियाँ हैं है इतना बड़ा वो तो मक्कार यारो कि उसमें भरी सारी मक्कारियाँ हैं हमें दोस्त, दुश्मन वो दोनों समझते बड़ी ही अनोखी ये अय्यारियाँ हैं 'जेहद' शायरी को न आसान समझो कि इसमें बहुत सारी दुश्वारियां हैं !! #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार