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अब फ़स्ल-ए-गुल क्या आएगी, बर्बाद गुलिस्तां कर बैठे..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 अब फ़स्ल-ए-गुल क्या आएगी, बर्बाद गुलिस्तां कर बैठे मजबूर थे अपनी फ़ितरत से  सो काम ये शैतां कर बैठे कुछ ऐसे भी आशिक़ होते हैं जो उनके वस्ल की चाहत में कुछ हो न सका जब उनसे तो ख़ुद चाक गिरेबां कर बैठे ऐ महू-ए-हैरत देख ज़रा, दीवार ने दर ख़ुद खोल दिया तुम कितने बहादुर बनते थे, फिर आज क्यों ज़िंदां कर बैठे ? ये रस्म-ए-मोहब्बत ख़ूब रही, ग़ैरों से मिले और हमसे छुपे अब लौट के वो क्या आएंगे, जब कूच का सामां कर बैठे है वादी-ए-उलफ़त ख़ूब हसीं, ये उनके हुस्न का जादू है वो जब भी आए बन-ठन के, हर सम्त बहारां कर बैठे ये हैरानी की दुनिया है, हर वक़्त यहाँ हैरानी है हम उनसे कभी हैरान हुए, कभी उनको हैरां कर बैठे हर शै की क़ीमत बढ़ने लगी, कोई बात नहीं लेकिन अफ़सोस अनमोल थीं जितनी भी चीज़ें, हम उनको अरज़ां कर बैठे कितने ही बड़े उस्तादों ने तो कर दिया रौशन शेर-ओ-सुख़न पर हम भी 'जेहद' इस दुनिया में कुछ और चराग़ां कर बैठे !!              #जावेेद_जेेेहद करन सराए, सासाराम, बिहार

अगर वो मिले ना तो मर जाएंगे..

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      #ताज़ा-_ग़ज़ल 💐 अगर वो मिले ना तो मर जाएंगे मगर बुज़दिली ये न कर जाएंगे यही आरज़ू है, यही जुस्तजू जिधर जाओगे तुम, उधर जाएंगे ज़रा छेड़ के हमको देखे कोई बुरे से बुरा हम भी कर जाएंगे अभी वो हैं बिगड़े मगर देखना कभी ना कभी तो सुधर जाएंगे समझ में न आया उन्हें लफ़्ज़ जो तो समझाने ज़ेर-ओ-ज़बर जाएंगे वो लौटेंगे मिलके अगर झूमते तो मस्ती में हम भी तो घर जाएंगे पिलाया न हमको जो तूने 'जेहद' तो जाम-ए-नज़़र आह भर जाएंगे             जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

कौन तेरी बेवफ़ाई से हुआ घायल नहीं..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कौन तेरी बेवफ़ाई से हुआ घायल नहीं तू बता इस क़त्ल-गह में कौन है बिसमिल नहीं जा छुपी जैसे तुम्हारे साथ मेरी हर ख़ुशी तू नहीं तो ज़िंदगी भी ये रही झिलमिल नहीं पुर-कशिश हो, पुर-जवाँ, ऐ जान-ए-मन तुम इस क़दर आएगा फिर कैसे जानम तुमपे किसका दिल नहीं ? हमने माना आपका मिलना बहुत दुश्वार है मौत के मिलने कि तो तदबीर कुछ मुश्किल नहीं बे-दिल-ओ-बेजान, बेदम, बेवतन, बेघर हुए तेरी उलफ़त में सनम क्या-क्या हुआ हासिल नहीं गोरे-काले, लम्बे-नाटे, अंधे-बहरे, नेक-बद कौन तेरी चाहतों में है सनम शामिल नहीं बे-मरव्वत, बेवफ़ा, बेदर्द से हो तुम 'जहद' फिर भी तुम पर ना मरे ऐसा तो कोई दिल नहीं             जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार

इक दिल है वो भी तेरी है दुनिया लिए हुए..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक दिल है वो भी तेरी है दुनिया लिए हुए मैं जी रहा हूँ क्या यहाँ  अपना  लिए  हुए ये चाँद तारे झील नदी जाम, लड़कियाँ जीती हैं कैसे बोझ ये  इतना लिए हुए वो लौट आएं न कहीं फिर से मिरी तरफ़ मुश्किल से थोड़ी बीती है रस्ता लिए हुए कैसे मिरा भी बन गया इक कारवाँ यहाँ मैं भी चला था ख़ुद को तो तन्हा लिए हुए हर जा तुम्हें तो साथ में न रक्खा जाएगा कैसे फिरूँगा मैं तुम्हें  इतना लिए हुए ? जो हो रहा है होने दो बस देखते रहो उड़ जाएगा इसे भी ज़माना लिए हुए कैसे मिरा भी बुझ गया चेहरा ये फूल सा मैं तो वहाँ से आया था खिलता लिए हुए बरहक़ 'जेहद' है मौत मगर जब भी आए ये तो आए साथ चैन का लम्हा लिए हुए !!              जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

आने वाले का दौर आना है..

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   ताज़ा ग़ज़ल 💐 आने वाले का दौर आना है जाने वाले का दौर जाना है पाने वाले को और पाना है लुटने वाले को लुटते जाना है गीत ख़ुशियों का तो सुनाना है गीत ग़म के भी गाते जाना है जिसने माना है मुझको दिल से बहुत मेरे दिल ने भी उसको माना है !! कैसे हैं अम्न के ये मतवाले काम इनका तो बस लड़ाना है काफ़ी कुछ तो डुबा चुके हो मियाँ और क्या-क्या अभी डुबाना है ? मौत ही मौत है जिधर देखो ये बहुत ही बुरा ज़माना है ! मूरतें वो बनाता फिरता है वो है राजा या फिर दिवाना है समझो कितने बड़े हो बन सकते बेहया ख़ुद को बस बनाना है !! जाने वाले को किसने रोका है हो गया वक़्त फिर तो जाना है दिल में ख़ुशियाँ नहीं किसी के भी कहाँ आया भला ज़माना है ? ग़म के मारों पे ज़ुल्म ढाते हो ऐसी भी सख़्ती क्या दिखाना है शायरी है हमारी ठीक 'जेहद' पर इसे और भी सजाना है !!           जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार