कब दिखाओगे सनम अपने गुले-रुख़्सार को..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कब दिखाओगे सनम अपने गुल-ए-रुख़्सार को देख कर सुनते हैं होती है शिफ़ा बीमार को !! क्या कहा जाए तुम्हारे अबरू-ए-ख़मदार को साथ अपने हर घड़ी रखते हो तुम तलवार को डाल कर अबरू पे बल लब जो दबाया आपने क़त्ल कर डाले हज़ारों आशिक़-ए-बीमार को लज़्ज़तें ऐसी मिलीं मुझको तो राह-ए-इश्क़ में प्यार अब करने लगे तलवे भी मेरे ख़ार को सोचता हूँ क्या कहूँ, होती अजब है कशमकश देखता हूँ जब भी मैं बिगड़े हुए संसार को !! मेरी तन्हाई के साथी फ़िक्र-ओ-फ़न, दर्द-ओ-चुभन दिल को बहलाने को रक्खे हैं इन्हीं दो-चार को !! नींद आती है न मुझको चैन आता है 'जेहद' जबसे आँखों में बसाया हमने अपने यार को #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया