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Showing posts from June, 2021

कब कहो मिलने की ठानी जाएगी..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कब कहो मिलने की ठानी जाएगी या सनम यूँ ही जवानी जाएगी ? वस्ल में भी हाल होगा कुछ बुरा बात ये उनसे न मानी जाएगी !! उनकी आँखों से जो छलकेगी शराब मेरे ही दामन में छानी जाएगी !! पूछते हैं दिल मिरा वो तोड़ के ख़ाक किस कूचे की छानी जाएगी दर्द-ओ-ग़म का आख़िरी होगा हुजूम जिस घड़ी मरने की ठानी जाएगी !! आते-आते आएगा उनको यक़ीं जाते-जाते बदगुमानी जाएगी !! आएगी अच्छी सी कोई रुत कभी या जो है ये भी सुहानी जाएगी ? कितनों का दुनिया में होगा आगमन और कितनों की कहानी जाएगी !! कब हमारी दोस्ती होगी बहाल कब मियां रंजिश पुरानी जाएगी गर पिलाओगे नहीं तुम साक़िया फिर तो इस मय की कहानी जाएगी लगता है अब पासबानों के लिए करने ख़िलकत पासबानी जाएगी ख़ाक में मिल जाएगा सारा जहाँ जब ये दुनिया की कहानी जाएगी साथ क्या ले जाओगे सोचो ज़रा जब तुम्हारी ज़िंदगानी जाएगी ? गर यूँ ही मिलती रही ये साक़िया कैसे फिर मय की कहानी जाएगी एक दिन आई थी ये जैसे 'जेहद' वैसे ही ये ज़िंदगानी जाएगी !!            जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

चुपके-चुपके कोई तुझको देखता महफ़िल में है..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 चुपके-चुपके कोई तुझको देखता महफ़िल में है देख ले तू भी उसे गर प्यार तेरे दिल में है !! राज़ के मानिंद पिन्हा है तुम्हारी आरज़ू जिससे घायल होगा तू वो तीर मेरे दिल में है हो गया अपना मुक़द्दर देखो तो कितना बुलंद चांद पे सूरत जो थी वो आज मेरे दिल में है !! फेर दे खंजर गले पर, करदे दो टुकड़े मुझे ज़ब्त की ताक़त न दम भर अब तिरे बिसमिल में है जी में आता है कि रखलें बस जिगर में घोंप के देख कर ख़ंजर को जो ख़ंजर कफ़-ए-क़ातिल में है कर दिया ज़ुल्फ़-ए-परेशां ने भी ये कैसा ग़ज़ब दिल मिरा ज़ुल्फ़ों में है और ज़ुल्फ़ मेरे दिल में है दर्द-ए-सर, दर्द-ए-जिगर और दर्द-ए-दिल है आजकल दिल लगा के ये 'जहद' तो हाए किस मुश्किल में है !!            जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

कौन तेरी बेवफ़ाई से हुआ घायल नहीं..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कौन तेरी बेवफ़ाई से हुआ घायल नहीं तू बता इस क़त्ल-गह में कौन है बिसमिल नहीं जा छुपी जैसे तुम्हारे साथ मेरी हर ख़ुशी तू नहीं तो ज़िंदगी भी ये रही झिलमिल नहीं पुर-कशिश हो, पुर-जवाँ, ऐ जान-ए-मन तुम इस क़दर आएगा फिर कैसे जानम तुमपे किसका दिल नहीं ? हमने माना आपका मिलना बहुत दुश्वार है मौत के मिलने कि तो तदबीर कुछ मुश्किल नहीं बे-दिल-ओ-बेजान, बेदम, बेवतन, बेघर हुए तेरी उलफ़त में सनम क्या-क्या हुआ हासिल नहीं गोरे-काले, लम्बे-नाटे, अंधे-बहरे, नेक-बद कौन तेरी चाहतों में है सनम शामिल नहीं बे-मरव्वत, बेवफ़ा, बेदर्द से हो तुम 'जहद' फिर भी तुम पर ना मरे ऐसा तो कोई दिल नहीं             जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार

इक अदा-ए-हुस्न यूँ इतरा गई..

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   # ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक अदा-ए-हुस्न यूँ इतरा गई जैसे उसपे फिर जवानी छा गई ख़ुश्बू-ख़ुश्बू बनके वो लहरा गई सांस कितने शख़्स की महका गई उसकी आँखों से जो पीली मैंने भी मुझको भी तो वो कहीं बहका गई देख कर शोला-मिज़ाजी आप की जंगजूओं को भी हैरत आ गई !! ज़िंदगी से मैं तो करता प्यार था मौत क्यों कमबख्त़ मुझको खा गई शाम-ए-ग़म में आरज़ू-ए-लुत्फ़ क्या याद उनकी आते ही समझा गई !! देख कर आँखों की बारिश आपकी बादलों की बूंद भी शर्मा गई !! मैं तो उनके वस्ल का दीवाना था फिर जुदाई लेके क्यों सहरा गई ? फिर 'जेहद' के दिल को है सब्र-ओ-सुकूं क्या बला फिर मेरा रस्ता पा गई ?              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार

सितमगर सितम तो किए जारहे हैं..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 सितमगर सितम तो किए जारहे हैं मगर हम सितम को सहे  जारहे हैं नज़र से नज़र को लड़ाएंगे वो क्या जो आँखें चुराकर चले  जारहे हैं !! लगा कर हसीनों से दिल को इलाही मुसीबत में हम तो फंसे  जारहे हैं !! वो आए हैं मेरी अयादत को यूँ तो मगर मुझसे शिकवे किए जारहे हैं मिरी मयकशी का ये आलम न पूछो कि बेसुध ही हम तो पिए जारहे हैं ! किया है जिन्होंने हसीनों से उलफ़त वो दर्द-ए-मोहब्बत लिए जारहे हैं !! वो आए हैं गुलशन सजाने को यूँ तो मगर इसको वीराँ किए जारहे हैं !! बनाते नहीं हैं 'जेहद' हम कभी भी ये अश्आर ख़ुद ही बने जारहे हैं !               जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

हो गए बर्बाद हम जिनके लिए..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 हो गए बर्बाद  हम जिनके लिए हैं ज़मीं की ख़ाक अब उनके लिए इश्क़ में रोना पड़ेगा एक दिन दिल दिया था क्या इसी दिन के लिए ख़्वाब में भी अब नज़र आते नहीं कितनी नींदें खोई थीं जिनके लिए जाने किस दुनिया में जाकर छुप गए जी तरसता है मिरा जिनके लिए !! दिल मिरे अब तो तिरे दिन ना रहे आह क्यों भरता है कमसिन के लिए कोई भी आनंद लो तो बेहिसाब वो भला क्या लुत्फ़ जो गिनके लिए फिर से चहके गा चिड़ी का घोंसला फिर वो चिड़िया जारही तिनके लिए इश्क़ के मारे हैं जो बंदे 'जेहद' इस ग़ज़ल को गाइए उनके लिए               जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

इक दिल है वो भी तेरी है दुनिया लिए हुए..

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       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक दिल है वो भी तेरी है दुनिया लिए हुए मैं जी रहा हूँ क्या यहाँ  अपना  लिए  हुए ये चाँद तारे झील नदी जाम, लड़कियाँ जीती हैं कैसे बोझ ये  इतना लिए हुए वो लौट आएं न कहीं फिर से मिरी तरफ़ मुश्किल से थोड़ी बीती है रस्ता लिए हुए कैसे मिरा भी बन गया इक कारवाँ यहाँ मैं भी चला था ख़ुद को तो तन्हा लिए हुए हर जा तुम्हें तो साथ में न रक्खा जाएगा कैसे फिरूँगा मैं तुम्हें  इतना लिए हुए ? जो हो रहा है होने दो बस देखते रहो उड़ जाएगा इसे भी ज़माना लिए हुए कैसे मिरा भी बुझ गया चेहरा ये फूल सा मैं तो वहाँ से आया था खिलता लिए हुए बरहक़ 'जेहद' है मौत मगर जब भी आए ये तो आए साथ चैन का लम्हा लिए हुए !!              जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

उसकी तो कभी हो सकती नहीं गिनती अच्छे रहबर में..

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          #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 उसकी तो कभी हो सकती नहीं गिनती अच्छे रहबर में ख़ून लगा हो मज़लूमों का यारो जिसके ख़ंजर में !! अच्छे दिन लाने वाले कितने आए और चले गए फिर भी ख़ुशहाली न आई अबतक यारो घर-घर में राजा हो या रंक जहाँ में जब सारे ही बराबर हैं तो किसको छोटा-बड़ा कहें हम, कौन नहीं है हमसर में कितने लश्कर से ऊपर उठ जाते हैं उठते-उठते और कितने गुम हो जाते हैं गिरते-गिरते लश्कर में सारे ही इंसान को जो ख़ुशहाल बना दे पूरी तरह ख़ूबी ये जाने क्यों न आई अबतक कोई रहबर में बाहर से क्या समझ सकोगे किसी की तुम मक्कारी को सबका ही तो फ़रेब छुपा रहता है उसके अंदर में !! कितने पड़े रहते हैं ठंडे कितने-कितने सालों तक आग लगी रहती है हरपल और कितने ही बिस्तर तुम लड़कियों के पीछे ज़्यादा कभी न भागा करो 'जेहद' जान चली जाती है कितनी अक्सर उनके चक्कर में !!               #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार

कुछ भली आती है नज़र आशा..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कुछ भली आती है नज़र आशा कुछ बहुत ही बुरी  मगर आशा आज टूटी थी इक मिरी उम्मीद आज ही आई इक नज़र आशा लम्बी-लम्बी हैं कितनी दुनिया में और कितनी हैं मुख़्तसर आशा एक उम्मीद पर मैं जागा था साथ में जागी रात भर आशा चली आती है कितनी और कितनी रहगुज़र से गई गुज़र आशा !! हम बिछड़ तो गए हैं उनसे मगर कुछ इधर है तो कुछ उधर आशा क्या हुआ, दिल में फिर बसालो नई टूट जाए कोई अगर आशा !! क्यों चढ़ी जाती है बुलंदी पर गर नहीं तू सफ़ल उतर आशा कितनी उम्मीदें छोड़ दी मैंने दिल में तू मेरे फिर से भर आशा आशा तो उनकी भी है मेरी भी है मगर अपनी तो दिगर आशा मुद्दतों में भी जो न पूरी हो फिर तो जाएगी वो बिखर आशा इतने सालों से क्यों तू बिखरी है अब सँवर जा तू अब सँवर आशा जिनकी आशाएं हैं बहुत घातक या ख़ुदा, जाएं उनकी मर आशा ये तिरा हो गया दिवाना 'जेहद' कर दिया कैसा ये सेहर आशा             जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर)         करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

कर दिया है बड़ा विसफोट जो आते आते..

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        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कर दिया है बड़ा विसफोट जो आते आते सब मिला जाओगे क्या ख़ाक में जाते जाते सब तो लुट ही चुका पर जो भी बचा था यारो खा गया उसको भी शैतान वो खाते खाते !! अच्छा गाते हो तराने सभी मक्कारी के छुप कहाँ जाते हो लेकिन कभी गाते गाते कुछ भी पाना यहाँ आसान नहीं है यारो उम्र कट जाती है कुछ भी यहाँ पाते पाते एक बादल है ज़माने में सुधारों वाला जो कहीं लापता हो जाता है छाते छाते कर दिया मुर्दा हमें फेंक दिया गड्ढे में बन गया शेर सितम हमपे वो ढाते ढाते शायरी भी तो अचानक नही आजाती है ये भी आती है किसी को भी तो आते आते अच्छे दिन आएंगे, सारी ख़ुशी पाएंगे 'जहद' लापता तुम भी न हो जाना ये गाते गाते ।।               जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

जुर्म से जिनके ख़ूब नाते हैं..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 जुर्म से जिनके ख़ूब नाते हैं हम उन्हें किस लिए जिताते हैं चीख़ते, रोते-गाते हैं कुछ लोग और कुछ हँसके ग़म उठाते हैं क़ीमती वोट तो हैं बस उनके जो करोड़ों में बेचे जाते हैं !! अच्छा सोचो तो ज़ह्न में यारो बड़े अच्छे ख़याल आते हैं !! महफ़िलों में बड़े-बड़े शायर आते हैं जब तो छोटे जाते हैं दूर तक फ़िक्र जिनकी जाती है वो दूर की कौड़ी ख़ूब लाते हैं !! वो हैं महफ़िल के, हम किताबों के वो ग़ज़ल गाते, हम पढ़ाते हैं !! इतने परमाणु बम बने हैं जो देखिए कब तबाही लाते हैं ! जो नचाते रहे हमें अब तक चलो अब हम उन्हें नचाते हैं हम सुनाते हैं कितनी ही बातें बस ख़ुशी ग़म नहीं सुनाते हैं हम वो शायर हैं जो जहाँ में 'जहद' बड़ी मुश्किल से पाए जाते हैं !!              जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

सारे मुजरिम जो सज़ा जुर्म की पाते जाते..

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     ताज़ा ग़ज़ल 💐 सारे मुजरिम जो सज़ा जुर्म की पाते जाते तो न वो ख़ाक में दुनिया को मिलाते जाते लोग मर-मर के हैं सरकार बनाते जाते और वो हैं कि लगातार गिराते जाते !! सुर बदल जाते हैं अब प्यार के नग़मों के भी काश सब एक ही सुर में इसे गाते जाते !! आते हैं करके बड़े वादे वो जितने हम से क्या ग़ज़ब होता अगर वादे निभाते जाते आख़िरी वक़्त बहुत याद तुझे उसने किया दोस्त के नाते न दुश्मन के तो नाते जाते !! रचना लिख-लिख के छुपाने से मिला क्य तुमको चीज़ है ये तो लुटाने की लुटाते जाते !! कुछ हैं ऐसे भी ज़माने में जगाने वाले जो ज़माने को तो हैं और सुलाते जाते चाँद पर जाके जो बस जाने को बेचैन हैं वो अपनी धरती को भी गर चाँद बनाते जाते !! दिल न जलता मिरा न मेरी तमन्ना मरती वो मिरे प्यार की गर आग बुझाते जाते ! तब तुम्हें सबका मसीहा सही माना जाता जब 'जेहद' सबका ही तुम साथ निभाते जाते चोट लगते ही ज़माना तो सिसक उठता है सब यूँ ही कहते हैं, हम ग़म तो उठाते जाते दंगा होता न कहीं लाशें गिराई जातीं  सब जो नफ़रत की अगर आग बुझाते जाते ख़ुद भी हँसते थे, हमें भी जो हँसाते थे बहुत काश जाते हुए न हमको रुलाते जाते...

आने वाले का दौर आना है..

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   ताज़ा ग़ज़ल 💐 आने वाले का दौर आना है जाने वाले का दौर जाना है पाने वाले को और पाना है लुटने वाले को लुटते जाना है गीत ख़ुशियों का तो सुनाना है गीत ग़म के भी गाते जाना है जिसने माना है मुझको दिल से बहुत मेरे दिल ने भी उसको माना है !! कैसे हैं अम्न के ये मतवाले काम इनका तो बस लड़ाना है काफ़ी कुछ तो डुबा चुके हो मियाँ और क्या-क्या अभी डुबाना है ? मौत ही मौत है जिधर देखो ये बहुत ही बुरा ज़माना है ! मूरतें वो बनाता फिरता है वो है राजा या फिर दिवाना है समझो कितने बड़े हो बन सकते बेहया ख़ुद को बस बनाना है !! जाने वाले को किसने रोका है हो गया वक़्त फिर तो जाना है दिल में ख़ुशियाँ नहीं किसी के भी कहाँ आया भला ज़माना है ? ग़म के मारों पे ज़ुल्म ढाते हो ऐसी भी सख़्ती क्या दिखाना है शायरी है हमारी ठीक 'जेहद' पर इसे और भी सजाना है !!           जावेेद जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

जब बुरे दिन उमड़ने लगते हैं..

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    ताज़ा ग़ज़ल 💐 जब बुरे दिन उमड़ने लगते हैं काम सारे  बिगड़ने  लगते हैं कुछ न मिलता है जब उखाड़ने को गड़े मुर्दे  उखड़ने  लगते हैं !! घिर गया समझो वो मुसीबत में जिसके सब पीछे पड़ने लगते हैं ख़ुश रहें, बाल ही झड़े जिनके ग़म में तो लोग झड़ने लगते हैं अम्न हो कैसे, अब कहीं न कहीं रोज़ ही लोग लड़ने लगते हैं !! सड़े दाने से गर अलग न करें अच्छे दाने भी सड़ने लगते हैं मर गए कितने फिर भी उड़ न सके कितने आते ही उड़ने लगते हैं !! ख़ुश वो होते हैं दाद देने से हो खिंचाई बिगड़ने लगते हैं उनको हारा हुआ ही रहने दो जीत कर जो अकड़ने लगते हैं लोगों को क्या समझते हैं वो 'जेहद' बेवजह ही  पकड़ने लगते हैं !!               जावेद जेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

सारी दुनिया का ग़म लिया शायर..

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   ताज़ा ग़ज़ल 💐 सारी दुनिया का ग़म लिया शायर और तूने भी क्या किया शायर ? कोई जीता रहा हक़ीक़त को कोई ख़्यालों में बस जिया शायर किस शहर में हुए बहुत पैदा किसने कितना बड़ा दिया शायर ? जाने किस किस पे और कितनों के संग शायरी की, सुख़न किया शायर !! फाड़ डाला किसी को शेरों से और किसी को कभी सिया शायर कितना तू इस्तेमाल करता है दिल-जिगर, जिस्म-ओ-जाँ, जिया शायर आज हिलने लगा है वो ख़ुद ही जिसने था जग हिला दिया शायर और कोई किया कि बस तूने  शायरी का नशा किया शायर ? धूल क्यों फांकती रहीं तेरी क्या किताबों में भर दिया शायर ? बन गया था सदाएं जो सब की ख़ुद वो आवाज़ खो दिया शायर कोई जागा न जब जगाने से ख़ुद भी ख़ामोश हो लिया शायर है वही तो 'जहद' बड़ा नामी पार सरहद को जो किया शायर          जावेेद जहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया