कब कहो मिलने की ठानी जाएगी..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कब कहो मिलने की ठानी जाएगी या सनम यूँ ही जवानी जाएगी ? वस्ल में भी हाल होगा कुछ बुरा बात ये उनसे न मानी जाएगी !! उनकी आँखों से जो छलकेगी शराब मेरे ही दामन में छानी जाएगी !! पूछते हैं दिल मिरा वो तोड़ के ख़ाक किस कूचे की छानी जाएगी दर्द-ओ-ग़म का आख़िरी होगा हुजूम जिस घड़ी मरने की ठानी जाएगी !! आते-आते आएगा उनको यक़ीं जाते-जाते बदगुमानी जाएगी !! आएगी अच्छी सी कोई रुत कभी या जो है ये भी सुहानी जाएगी ? कितनों का दुनिया में होगा आगमन और कितनों की कहानी जाएगी !! कब हमारी दोस्ती होगी बहाल कब मियां रंजिश पुरानी जाएगी गर पिलाओगे नहीं तुम साक़िया फिर तो इस मय की कहानी जाएगी लगता है अब पासबानों के लिए करने ख़िलकत पासबानी जाएगी ख़ाक में मिल जाएगा सारा जहाँ जब ये दुनिया की कहानी जाएगी साथ क्या ले जाओगे सोचो ज़रा जब तुम्हारी ज़िंदगानी जाएगी ? गर यूँ ही मिलती रही ये साक़िया कैसे फिर मय की कहानी जाएगी एक दिन आई थी ये जैसे 'जेहद' वैसे ही ये ज़िंदगानी जाएगी !! जावेेद जहद करन सराय, सासाराम, बिहार