जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..
1..ग़ज़ल 💐 ग़ज़ल की दुनिया में भी अब बहार है कि नहीं सभी को कल की तरह इससे प्यार है कि नहीं मैं शायरी तो बहुत उम्दा करता हूँ लेकिन मिरा भी शायरों में कुछ शुमार है कि नहीं कि मैं भी कर सकूँ जिससे कि मार दुनिया में मिरी भी शायरी में ऐसी धार है कि नहीं !! करम किया जो मुझे तूने दिल दिया लेकिन मिरी भी तुम पे सनम जाँ निसार है कि नहीं वो बेपनाह मोहब्बत में डूबे रहने का नशा तो टूट चुका, अब ख़ुमार है कि नहीं क़रार दिल को मिलेगा ज़रूर ऐ यारो हाँ पहले देख तो लो बेक़रार है कि नहीं जो सारी दुनिया को करदे दुखों से दूर 'जहद' किसी को इतना बड़ा इख़्तियार है कि नहीं ! ********************************* 2..ग़ज़ल 💐 दिल-ए-बेदार कोई अहले-नज़र है कि नहीं किस से पूछें कि कोई ऐसा बशर है कि नहीं छल-कपट, राहज़नी, ज़ुल्म-ओ-सितम, ख़ूँरेज़ी ये भी दो-रंगीं सियासत का समर है कि नहीं जिस तरफ़ देखिए बाज़ार-ए-हवस है यारो और ईसार-ओ-वफ़ा हममें सिफ़र है कि नहीं अम्न-ओ-इंसाफ़ की लुटती हुई दुनिया से उदास आज इस देश का इक एक बशर है कि नहीं !! अपना चेहरा भी बदल जाए तो हैरत कैसी आज बदली हुई दुनिया की नज़र...