इश्क़ की मस्ती मिरी दुनिया-ओ-महफ़िल से गई..
ताज़ा ग़ज़ल 💐 इश्क़ की मस्ती मिरी दुनिया-ओ-महफ़िल से गई चाँद आँखों से गया, चाँदनी इस दिल से गई !! प्यार की कश्ती जिसे पार लगाना था हमें डूबने लह्र में वो छूट के साहिल से गई !! कितने ही जिस्म निगल जाती हैं ये मौत-ओ-बला जान अपनी तो मगर प्यार के क़ातिल से गई !! जागता ही रहा कल रात मैं तो सुब्ह तलक याद आई जो तिरी फिर बड़ी मुश्किल से गई ज़िंदगी अब तो भटकती है किसी सहरा में सारी ख़ुशियाँ ही मिरी लेके वो महफ़िल से गई मैंने सोचा था बड़े चैन से मैं जी लूँगा अम्न और आशती पर सब मिरे शामिल से गई मिट गई अब तो 'जेहद' हर ख़ुशी की सारी चमक ज़िंदगी धुंध में होते हुए झिलमिल से गई !! ~जावेद जेहद