शाम-सवेरे आकर्षण..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
शाम-सवेरे आकर्षण
रूप का तेरे आकर्षण
चाहे जहाँ भी मैं जाऊँ
तेरा ही घेरे आकर्षण !
तेरी हल्की अदा में भी
कितने घनेरे आकर्षण
सारे ही जग के तुझमें तो
आन बसे रे आकर्षण !!
भाते हैं सबको ही तेरे
सांप-सपेरे आकर्षण !
दिन में कुछ और रातों को
रैन बसेरे आकर्षण !!
कैसे न बहके 'जेहद' ये, जब
तेरा ले फेरे आकर्षण !!
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