प्यास धरती बुझाती रही रात भर..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
प्यास धरती बुझाती रही रात भर
बारिशों में नहाती रही रात भर
एक मुद्दत से था उसको तो इंतेज़ार
वो मोहब्बत लुटाती रही रात भर !!
रक़्स होता रहा, जाम चलते रहे
जान महफ़िल सजाती रही रात भर
लम्बी होती रही, बनती जाती रही
इक ग़ज़ल तो जगाती रही रात भर
थी ख़ुशी-ग़म की ऐसी कहानी लिए
वो हँसाती-रुलाती रही रात भर !!
दिन में उसको तो रहता नहीं कुछ ख़याल
ख़ुद को अक्सर सजाती रही रात भर !!
ऐसा लगता वो छोड़ेगी करके ख़तम
यूँ फ़साना सुनाती रही रात भर !!
सुब्ह होते ही जाने कहाँ छुप गई
रौशनी जो कि आती रही रात भर
रात ही के लिए वो बनी थी 'जेहद'
फ़स्ल जो लहलहाती रही रात भर
Mob_ 9772365964
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