रावण सा बना फिरता है आदमी..

   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

रावण सा बना फिरता है आदमी
आदमी पे सितम करता है आदमी

मस्अले भी हल करता है आदमी
और उलझनें भी धरता है आदमी

रखता है ये हद में ख़ुद को तो कभी
हद से भी कभी गुज़रता है आदमी

छूना चाहता है ये तो बुलंदियां
और गिरने से भी डरता है आदमी

छुक्के छुड़ाता है कभी तो दुश्मनों के
कभी दोस्तों से ही डरता है आदमी !!

आदमी ही पाता है सारी दौलतें
ख़ाक भी छाना करता है आदमी

काम की ये बात तो करता ही है
फ़ालतू बात भी करता है आदमी

आती है मौत तो एक बार ही
कई बार भी कभी मरता है आदमी

दुनिया में वो 'जेहद' क्या कर नहीं सकता
हौसलों से जो गुज़रता है आदमी !!
          #जावेेद_जहद
करन सराय, सासाराम, बिहार

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