दिल हो न जाए तेरा बेक़रार देखना..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
दिल हो न जाए तेरा बेक़रार देखना
हम मिल रहे हैं आज बार बार देखना
लुट जाते कितने लोग हैं हुसूल-ए-इश्क़ में
पड़ता है दामनों को तार तार देखना !!
मौसम बदलता रहता है जहाँ में रोज़ ही
हर वक़्त मिलता है किसे बहार देखना ?
कितनी हसीन यादें मेरी खो गईंं कहीं
क्या-क्या बने है अब जी यादगार देखना
बर्बाद कर रहे हैं इस की ख़ूबसूरती
इस मुल्क से है कितना किसको प्यार देखना
अब क्या है कहना सुनना सारा राज़ खुल गया
अब देखना है जो भी ख़ुद ही यार देखना !!
मंज़िल कोई भी मिलती है यूँ ही नहीं 'जेहद'
पड़ता है राह में बहुत ग़ुबार देखना !!
Comments