इस दिल का लपकना देख ज़रा कुछ तुझसे किनारा हो न सका..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
इस दिल का लपकना देख ज़रा कुछ तुझसे किनारा हो न सका
अब कैसे कहूँ मैं ऐ हमदम कि तू तो हमारा हो न सका !!
सोचा था हमारे जीवन में जो तुम न मिले तो और सही
अफ़सोस तुम्हारे बाद मगर कोई और हमारा हो न सका
तू ने तो कहा था हम न मिले तो मर जाएंगे हम हमदम
वो कैसा था तिरा मरना कि जो तुझको गवारा हो न सका
हरे-भरे इक पेड़ से लिपटी, इक बेल दिवानी रहती थी
पर आई ख़िज़ाँ जब उसपे तो फिर उसका गुज़ारा हो न सका
खा-खा के थपेड़ा मौजों का ग़रक़ाब हुए हम बिल-आख़िर
मँझधार ही वो कुछ ऐसी थी कम मौज का धारा हो न सका
ये कैसी है तेरी जंग 'जेहद', ये कैसी तेरी लड़ाई है
कि इतने बरस से बहता लहू क्यों ठंडा तुम्हारा हो न सका
Mob_ 9772365964
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