मेहर-ओ-वफ़ा की बात कहाँ अब..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
मेहरो-वफ़ा की बात कहाँ अब
प्यार की वो बरसात कहाँ अब
दिन में है जब डर का डेरा
चैन भरी फिर रात कहाँ अब
प्यार की बैठे बात करें हम
हैं ऐसे हालात कहाँ अब
दिन तो कट गया उनसे मिलके
गुज़रे गी ये रात कहाँ अब
तुमसे मिलूँ मैं खुलके जानम
इतनी मिरी औक़ात कहाँ अब
दुनिया में शायर हैं अब भी अच्छे
उनमें मगर वो बात कहाँ अब
जिनका दिवाला निकल चुका है
वो देंगे ख़ैरात कहाँ अब
सब जिसकी इज़्ज़त करते हों
ऐसी कोई भी ज़ात कहाँ अब
बातें बहुत होती हैं लेकिन
असली मुद्दे की बात कहाँ अब
बस ज़ह्र उगलते रहते हैं
उनमें भले कलमात कहाँ अब
आज के ग़म में दिल है उलझा
यादों की बारात कहाँ अब
सब जिस पे भरोसा करते रहे
वो भी सबके साथ कहाँ अब
सच पूछो तो दुनिया में 'जहद'
बस है मौत, हयात कहाँ अब
करन सराय, सासाराम, बिहार
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