ये दौर-ए-क़यामत, लानत है..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
ये दौर-ए-क़यामत, लानत है
ये क़त्ल-ओ-ग़ारत, लानत है
जिसमें भरे हों चोर-लुटेरे
ऐसी तो हुकूमत, लानत है
बर्बाद जहाँ को करने वाले
शस्त्रों की तिजारत, लानत है
जनता से ताक़त पाकर जो
करे उनपे ही कसरत, लानत है
ये इल्म-ओ-हुनर के ज़माने में
ये बढ़ती जहालत, लानत है !
इक ही तो मोहब्बत की थी बस
उसमें भी फ़ुर्क़त, लानत है !!
माँ, बेटी, बहन, मासूमों की
जो लूटे इज़्ज़त, लानत है !
जो ज़ालिम हो, हत्यारा हो
फिर उसकी इज़्ज़त, लानत है
सेवा तो इबादत है लेकिन
सेवा में रिश्वत, लानत है !
जिस फ़न से कुछ न हासिल हो
उसमें तो महारत, लानत है !!
जब शायर भूखे मरते हों
तो ऐसी शोहरत, लानत है
प्यार की दौलत लुटती जाए
नफ़रत में बरकत, लानत है
दुनिया में आग लगाने वाली
ये गंदी सियासत, लानत है
अल्ला ने जिसे अशरफ़ माना
उसमें ही बदअत, लानत है !!
जिस देश में भूखे-नंगे 'जेहद'
उस देश की दौलत, लानत है
Mob_ 9772365964
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